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नाटक ‘किस्सागोई’ एक आम आदमी की वास्तविक जिंदगी और इच्छाओं के बारे में बात करता है।

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प्रेस विज्ञप्ति

हंसाते-हंसाते जीवन के छुपे हुए पक्षों को दिखा गया नाटक ‘किस्सागोई’

रोहतक। आज़ादी के अमृत महोत्सव के तहत हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ परफोर्मिंग आर्ट्स (हिपा) द्वारा स्थानीय स्वतंत्र मंच पर नाटक ‘किस्सागोई 2’ का मंचन किया गया। हरियाणा सरकार के कला और संस्कृति कार्य विभाग द्वारा प्रायोजित तथा विश्वदीपक त्रिखा द्वारा निर्देशित इस प्रस्तुति में एक आम आदमी के जीवन के व्यक्तिगत संकोचों को बेहद रोचक एवं भावपूर्ण अंदाज़ में प्रस्तुत किया। नाटक में दिखाया गया कि एक साधारण व्यक्ति प्रेम, घृणा, तिरस्कार और उपेक्षा जैसी संवेदनाओं को किस प्रकार अनुभव करता है। वह संकोचवश अपने इन अनुभवों को जीवनभर सबसे छिपा कर रखता है, जबकि सबको इनके बारे पता होता है। एक घंटे तक चली नाट्य प्रस्तुति में विश्वदीपक त्रिखा ने अपने भावपूर्ण अभिनय से अंत तक दर्शकों को बांधे रखा। सुजाता और विकास ने भी प्रभावित किया। जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी संजीव सैनी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल रहे। जाने-माने नाटककार एवं निर्देशक विभांशु वैभव विशिष्ट अतिथि रहे। नाट्य संध्या का उद्घाटन संजीव सैनी, विभांशु वैभव और सुभाष नगाड़ा ने दीप प्रज्वलित कर के किया।

नाटक ‘किस्सागोई’ एक आम आदमी की वास्तविक जिंदगी और इच्छाओं के बारे में बात करता है। नाटक का मुख्य पात्र कहता है कि शादी से पहले पति-पत्नी प्यार की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं और एक दूसरे से कहते हैं कि वे एक-दूसरे के बिना नहीं रह सकते। वहीं शादी के 2 साल बाद न जाने ऐसा क्या हो जाता है कि वे एक दूसरे के साथ रहना भी पसंद नहीं करते और सीधे तौर पर कह देते हैं कि मैं तुम्हारे साथ नहीं रह सकता या मैं तुम्हारे साथ नहीं रह सकती। रिश्तों में कमी कहां से आती है, क्यों आती है, इन्हीं सब बातों को लेकर नाटक का आलेख विश्व दीपक त्रिखा ने लिखा और इसमें पति की भूमिका भी विश्व दीपक त्रिखा ने निभाई। प्रेमिका की भूमिका सुजाता ने और प्रेमी की भूमिका विकास रोहिल्ला ने निभाई। नाटक तब और भी सार्थक लगा जब नाटक का पात्र पति कहता है कि देशभर का डाटा यह बताता है कि 85% पति-पत्नी एक दूसरे से प्यार नहीं करते। वे अक्सर एक-दूसरे से झगड़ते रहते हैं। इसके बावजूद हमारी आबादी बढ़ कर चीन से अधिक हो गई और हम नंबर एक पर आ गए। अगर पति-पत्नी एक दूसरे से सच में प्यार करते होते, तो निश्चित ही हम चीन की आबादी से दोगुने हो गए होते। इंसानी रिश्तो पर आधारित यह नाटक दर्शकों के दिल को छूने में कामयाब रहा। हर व्यक्ति को यह लगा, जैसे यह उसी की अपनी कहानी है।

नाटक में संगीत सुभाष नगाड़ा का रहा। नगाड़े पर सुभाष नगाड़ा और गिटार पर विकास रोहिल्ला ने बेहतरीन साथ निभाया। मेकअप अनिल शर्मा ने किया। लाइट और साउंड तथा प्रोडक्शन की जिमेवारी अविनाश सैनी ने संभाली। संजीव सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि कला एवं संस्कृति मामले विभाग हरियाणा सभी तरह की प्रस्तुत्य कलाओं के प्रचार-प्रसार का काम कर रहा है। इसी कड़ी में रंगमंच के क्षेत्र में भी नए प्रयोगों को पर्याप्त प्रोत्साहन दिया गया है। विश्वदीपक त्रिखा प्रदेश के प्रतिष्ठित रंगकर्मी हैं और हरियाणा के रंगकर्म को राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलवाने वाले चुनिंदा नाटककारों में शामिल हैं। आज इन्होंने नाटक की एक नई विधा को हमारे सामने प्रस्तुत किया है, जो निश्चित ही रंगमंच के बारे में इनकी गहरी समझ को दिखाता है।

मंचन के दौरान कपिल सहगल, वीरेन्द्र मधुर, संजय राठी, आर के रोहिल्ला, डॉ. हरीश वशिष्ठ, विक्रमादित्य, रवि रविन्द्र, शक्ति सरोवर त्रिखा, गुलाब सिंह खांडेवाल, मनीष खरे, इंदरजीत सैनी, पंकज शर्मा, पवन गहलौत, यतिन वधवा, अभिषेक, हैरी रंगा, विष्णु मित्र, अनिल शर्मा, गर्व कोचर सहित अनेक रंगकर्मी और नाट्य प्रेमी उपस्थित रहे।

– अविनाश सैनी

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