To The Point Shaad

Shaad, Pen

चलो घर लौट चले घऱ कोई इंतज़ार कर रहा है

चलो घर लौट चले…. हर कोई घर में रहता है बहुत सोचते है यार अपना भी कोई घर हो …सपनो का घर लेकिन बदलते वक्त में घरों के नक्शे बदल रहे है शायद इसलिए पिता का बनाया घर पुत्र को कम ही पसंद आता है ….घर को देखना कभी देखना आपने कमरे को सहज भाव …

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उस फकीर का तारा बोले…

इक तारा लेकर रेल गाड़ी में गाते देखा था उसको और नंगे पांव फ़टे कपड़े दाड़ी बड़ी हुई और काली सी चादर पैसो के लिए बढ़ते हाथ उसकी आवाज में जादू था जो आज भी गूँजता इतने वर्ष बीत जाने के बाद … रेल गाड़ी में मेरे साथ बैठे कुछ यात्रियों ने सिक्के फ़टे पुराने …

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एक तिनके का कमाल…..

(मेरे एकल नाटक तिनका का पहला डायलॉग…) बस ये ही इक बात खतरनाक …. हर कोई चाहता है कोई और लडे ….. बंदूक हमारी और कंधा किसी का तो फिर लड़ाई….. अब और किस लिए किसके लिये क्योकि मै और नहीं चाहता लड़ना और बोलना बस मै मुर्दा हो गया हूँ और शामिल हूँ भेड़ो …

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सोचो तो सही हम ये क्या सोच रहे है….

टैक्स फ्री शब्द हम कभी किसी जमाने मे फिल्मो के पोस्टर पर पढा करते थे..लेकिन थोड़ा सा सोच कर देखा तो ख्याल आया क्यो न वर्तमान दौर में इस योजना का लाभ लिया जाए जो प्रभु ने हम अब को दी है…. कमाल तो तब है पल पल बदलती सोच को हम ये सोचे कि …

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डबवाली क्षेत्र की कला व शिक्षा संस्थाओं के संरक्षक थे स्व. प्रिंसिपल आत्मा राम अरोड़ा

आदरणीय स्व. आत्माराम जी अरोड़ा अपनी कर्मभूमि किलियांवाली-डबवाली में आयोजित प्रत्येक कार्यक्रम में आमंत्रित फ्रंटलाइन वी वीआईपी थे। उनके किसी कार्यक्रम में उपस्थित होने भर से ही कार्यक्रम का स्तर भव्य हो जाता था। उनका किसी भी कार्यक्रम में आना न केवल आमंत्रित करने वाले की प्रतिष्ठा-शोभा को बढ़ाता था बल्कि स्वर्गीय अरोड़ा ही अपने …

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युद्ध…आदमी इक हादसा होने से डरता है….

शंखनाद हो चुका है पुराने जमाने मे युद्ध सूरज ढलने के साथ रुक जाते थे आमने सामने होते थे सीधे होते थे दुश्मन सामने होता था यानी युद्ध के नियम होते थे लेकिन वर्तमान दौर में युद्ध  बदल गए है दुश्मन छुप कर वार करता है या किसी का कन्धा होता है निशाने पर कोई …

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वक्त का मिजाज एक सा नही होता…

यह सही है कि आने वाले वक्त की सूरत अनजान होती है, लेकिन हमारे अपने खयाल उस वक्त को शक्ल दे रहे होते हैं। हम भविष्य के प्रति इतना सोचते हैं कि पूरी एक कहानी ही गढ़ लेते हैं। आने वाले वक्त में वैसा होगा या नहीं, पता नहीं, पर भविष्य में झांकने की हमारी तैयारी ऐसी …

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