Home News Point जो मिला उसका आभार, जो नहीं मिला उसका प्रयास “हर अधूरी इच्छा, एक नई दिशा” 🌻✍️ डॉ विनय सेठी

जो मिला उसका आभार, जो नहीं मिला उसका प्रयास “हर अधूरी इच्छा, एक नई दिशा” 🌻✍️ डॉ विनय सेठी

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मनुष्य के जीवन में निराशा और हताशा का एक बड़ा कारण उसकी अधूरी इच्छाएँ होती हैं। हम जैसा चाहते हैं, जब वैसा नहीं होता तो मन बेचैन होने लगता है। किसी काम में देर हो जाए, कोई अवसर हाथ से निकल जाए, किसी व्यक्ति से अपेक्षित व्यवहार न मिले या मेहनत के बावजूद परिणाम मन के अनुसार न आए, हम तुरंत परिस्थितियों को दोष देने लगते हैं। धीरे-धीरे यही असंतोष हमारे विचारों का हिस्सा बन जाता है।

समस्या इच्छा करने में नहीं है। इच्छाएँ ही तो हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। समस्या तब शुरू होती है जब हमारी खुशी पूरी तरह इच्छाओं की पूर्ति पर निर्भर हो जाती है। हम वर्तमान में उपलब्ध अच्छाइयों को भूलकर उस चीज़ पर ध्यान केंद्रित करने लगते हैं जो अभी हमारे पास नहीं है।

हम जिस बात पर बार-बार सोचते हैं, हमारा मन उसी दिशा में ऊर्जा लगाने लगता है। यदि हम लगातार बाधाओं, देरी, कठिनाइयों और असफलताओं के बारे में सोचते रहेंगे, तो हमारा ध्यान समाधान से हटकर समस्या पर टिक जाएगा। फिर छोटी-सी कठिनाई भी बहुत बड़ी दिखाई देने लगेगी। यही वह अवस्था है जिसमें हम अनजाने में अपनी ही संभावनाओं के रास्ते में खड़े हो जाते हैं।

हर देरी असफलता नहीं होती। कभी-कभी समय हमें बेहतर अवसर के लिए तैयार कर रहा होता है। हर बंद दरवाज़ा नुकसान नहीं होता। कई बार वही हमें ऐसी दिशा में भेजता है जहाँ हमारे लिए कुछ अधिक उपयुक्त हमारा इंतज़ार कर रहा होता है।

जब कोई इच्छा पूरी न हो तो स्वयं से पूछिए, “मैं इस परिस्थिति से क्या सीख सकता हूँ? अभी मेरे हाथ में क्या है? अगला छोटा कदम क्या हो सकता है?” ये प्रश्न मन को शिकायत से निकालकर कर्म की ओर ले जाते हैं।

अपने मन को यह विश्वास दीजिए कि आपकी अच्छाई केवल किसी एक परिणाम पर निर्भर नहीं है। आप आज भी उतने ही मूल्यवान हैं, चाहे आपकी कोई इच्छा पूरी हुई हो या नहीं। सफलता का अर्थ यह नहीं कि जीवन में कोई बाधा न आए; सफलता का अर्थ है कि बाधाओं के बीच भी आपका मन आशा, विश्वास और प्रयास की दिशा न छोड़े।

इच्छाएँ रखिए, बड़े सपने देखिए, पूरी शक्ति से प्रयास कीजिए, लेकिन अपनी शांति को इच्छाओं की पूर्ति की शर्त मत बनाइए। जो मिला है उसके लिए कृतज्ञ रहिए, जो नहीं मिला उसके लिए प्रयास कीजिए और जो आपके नियंत्रण में नहीं है उसे स्वीकार करना सीखिए।

आपकी सोच आपकी ऊर्जा की दिशा तय करती है। यदि आप लगातार अभाव, देरी और कठिनाई पर ध्यान देंगे तो मन उसी का विस्तार करेगा। लेकिन यदि आप संभावना, समाधान, विश्वास और कृतज्ञता पर ध्यान देंगे तो वही मन आपके लिए नई राहें खोजने लगेगा।

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