Home News Point नॉर्थ ज़ोन कल्चरल सेंटर की ग्रीष्मकालीन कार्यशाला का भव्य समापन, 200 से अधिक बच्चों ने मंच पर बिखेरे लोक संस्कृति के रंग

नॉर्थ ज़ोन कल्चरल सेंटर की ग्रीष्मकालीन कार्यशाला का भव्य समापन, 200 से अधिक बच्चों ने मंच पर बिखेरे लोक संस्कृति के रंग

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25 दिनों तक चली यह कार्यशाला बच्चों के लिए सीख, सृजन और सांस्कृतिक संस्कारों का एक प्रेरणादायी अनुभव साबित हुई।

 

चंडीगढ़, 27 जून। नॉर्थ ज़ोन कल्चरल सेंटर (एनजेडसीसी), पटियाला द्वारा कलाग्राम में आयोजित 25 दिवसीय ग्रीष्मकालीन कार्यशाला का रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ भव्य समापन हुआ। 1 से 25 जून तक आयोजित इस कार्यशाला में 8 से 17 वर्ष आयु वर्ग के 200 से अधिक बच्चों ने पंजाबी एवं हरियाणवी लोक नृत्य, थिएटर तथा आर्ट एंड क्राफ्ट का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

समापन समारोह में बच्चों ने पूरे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम की शुरुआत पंजाबी लोक नृत्य झूमर से हुई। इसके बाद जूनियर ग्रुप ने हरियाणवी लोक नृत्य पाखी, पंजाबी लोक नृत्य सम्मी तथा ऊर्जावान भांगड़ा की प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरीं। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण अहिल्याबाई होल्कर के जीवन पर आधारित लगभग 40 मिनट का नाट्य मंचन रहा। बच्चों ने अपने सशक्त अभिनय और प्रभावशाली संवादों से ऐतिहासिक चरित्र को जीवंत कर दर्शकों की भरपूर सराहना प्राप्त की।

समारोह के दूसरे चरण में पंजाबी लोक नृत्य लुड्डी, जिंदुआ, हरियाणवी लोक नृत्य घूमर, पंजाबी गिद्धा तथा सीनियर ग्रुप के जोशीले भांगड़ा ने ग्रैंड फिनाले को यादगार बना दिया। रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा में सजे बच्चों ने पूरे माह के प्रशिक्षण की शानदार झलक प्रस्तुत करते हुए पंजाब और हरियाणा की समृद्ध लोक संस्कृति को जीवंत रूप में मंच पर उतारा।

कार्यक्रम के दौरान कार्यशाला में तैयार की गई आर्ट एंड क्राफ्ट प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही। बच्चों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों को अभिभावकों और दर्शकों ने खूब सराहा।

 

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के. एस. गुरु ने बच्चों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने, अपनी प्रतिभा को निरंतर निखारने तथा कला के माध्यम से समाज में सकारात्मक योगदान देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने प्रशिक्षकों, सहायक प्रशिक्षकों और संगीतकारों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी किया।

डॉ. अश्विन दलवी ने बताया कि एनजेडसीसी का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय लोक कला एवं संस्कृति से जोड़ना और उनमें रचनात्मकता का विकास करना है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं बच्चों के व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

समापन समारोह में अभिभावकों, कला प्रेमियों और आम दर्शकों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी यादगार बना दिया। 25 दिनों तक चली यह कार्यशाला बच्चों के लिए सीख, सृजन और सांस्कृतिक संस्कारों का एक प्रेरणादायी अनुभव साबित हुई।

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