–सैनिकों की कलाई पर राखी बांधना त्यौहार नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और भाईचारे का प्रतीक है : आर्य

डबवाली। शहर की अग्रणी सामाजिक संस्था ऑल इंडिया अरोड़ा खत्री पंजाबी कम्युनिटी की ओर से इस बार भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का त्यौहार ‘‘रक्षा-बंधन’’ खास अंदाज में मनाया गया। ऑल इंडिया अरोड़ा खत्री पंजाबी कम्युनिटी महिला विंग की अध्यक्षा अनीता धमीजा के सानिध्य एवं शाखाध्यक्ष पुनीत धमीजा के नेतृत्व में भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे फाजिल्का बॉर्डर पर राखी सैनिकों के नाम कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के आयोजन में फाजिल्का के स्थानीय नागरिक कृष्ण तनेजा व बीएसएफ से अधिकारी केके शुक्ला जी व उपाध्यक्ष हैप्पी मोंगा का विशेष सहयोग रहा।

इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए पीआरओ सुदेश कुमार आर्य ने बताया कि असफवाला वॉर मैमोरियल एवं फाजिल्का बॉर्डर पर आयोजित कार्यक्रम में अध्यक्षा अनीता धमीजा, कोषाध्यक्ष सुषमा जुनेजा व संस्था के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष परमजीत कोचर द्वारा नि:शुल्क संचालित बालाजी इंस्टीच्यूट की छात्राओं कीर्ति राजपूत, पूजा, पायल, मुस्कान सेठी, रागिनी, डिंकी, अंशिका व प्रो. ममता आर्य ने भारतीय सेना और बीएसएफ के विंग कमांडर अजय कुमार सहित अन्य जवानों की कलाई पर राखी बांधी। इस अवसर पर महिलाओं ने भारतीय सेना के जवानों के प्रति सम्मान कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि सैनिक अपने परिवारों से दूर रह कर देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं। ऐसे में रक्षा-बंधन पर्व पर उनकी कलाई पर राखी बांधना गर्व की बात है। पीआरओ सुदेश कुमार आर्य ने कहा कि यह आयोजन देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद जवानों को समर्पित है। उन्होंने कहा कि सैनिकों की कलाई पर बहनों द्वारा राखी बांधना केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और भाईचारे का प्रतीक है। आर्य ने बताया कि असफवाला वॉर मैमोरियल का यह स्मारक 1971 के भारत-पाक युद्ध में फाजिल्का सैक्टर की रक्षा करते शहीद हुए 272 भारतीय सैनिकों की स्मृति में बनाया गया है। पार्क के प्रवेश द्वार पर स्थापित विक्टरी टॉवर उस कीर्ति की कहानी कहता है, वहीं स्मृति दीवार, उस समय के चित्र व शहीदों की प्रतिमाएं हमें भी निस्वार्थ भाव से समाज सेवा के प्रति प्रेरित करती हैं। इस कार्यक्रम के दौरान शहीदों का श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई। इसके अतिरिक्त संस्था की ओर से स्मृति चिन्ह एवं पौधारोपण के लिए विभिन्न प्रजातियों के छह पौधे भेंट किए गए। यह कार्यक्रम सभी के दिलों पर एक अमिट छाप छोड़ गया।
By Sanjiv Shaad
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