– कला कुंज के माध्यम से अब डबवाली में हर माह होंगी साहित्यिक गतिविधियां
डबवाली
इलाके की प्रमुख संस्था वरच्युस क्लब द्वारा वरच्युस भवन में आयोजित कला कुंज कार्यक्रम में साहित्य और भावनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में सिरसा से प्रख्यात साहित्यकार लाज पुष्प साहित्यिक अतिथि के तौर पर शामिल हुए। उन्होंने अपनी कविताओं और शायरी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी रचनाओं पर सभागार बार-बार ‘वाह-वाह’ की गूंज से भर उठा। लाज पुष्प ने अपनी शायरी प्रस्तुत करते हुए कहा-
‘जमना जैसे दरिया से तुम पानी लेने आए हो,
सचमुच प्यासे हो या प्रेम कहानी लेने आए हो।’
उन्होंने अपनी प्रसिद्ध गजल-
‘पहले से पता घर का है आसान तुम्हारा,
भटकेगा बहुत देखिए मेहमान तुम्हारा’ भी सुनाई।
एक और गजल-
‘वरना रोते किसी किरदार को शाना करके,
हम कहानी से निकल आए हैं बहाना करके’
आदि सुनाकर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी

उन्होंने जीवन के यथार्थ और मानवीय संवेदनाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि कविता, गजल और गीत लिखे नहीं जाते, बल्कि वे मन:स्थिति से जन्म लेते हैं और सीधे हृदय पर दस्तक देते हैं। श्रोता अपनी अनुभूतियों को कवि की रचना में तलाशता है और साहित्य व्यक्ति को उसके वास्तविक स्वरूप से परिचित कराता है।
वरच्युस क्लब के संस्थापक केशव शर्मा ने कहा कि कला कुंज कार्यक्रम साहित्य, रंगमंच और संगीत का ऐसा मंच है, जो समाज में रचनात्मक ऊर्जा का संचार करता है और युवाओं को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है। कार्यक्रम के दौरान नवोदित लेखकों को साहित्यिक मार्गदर्शन का अवसर मिला। प्रश्न-उत्तर सत्र अत्यंत रोचक एवं ज्ञानवर्धक रहा। मंच संचालन संजीव शाद ने अपने जोशीले अंदाज में कुशलता से निभाया।

कार्यक्रम के समापन पर क्लब के सचिव नरेश शर्मा ने धन्यवाद करते हुए साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान हेतु लाज पुष्प को वरच्युस अवार्ड प्रदान किया तथा उन्हें दोशाला ओढ़ाकर सम्मानित किया।
क्लब के पीआरओ. सोनू बजाज ने बताया कि कला कुंज का आयोजन अब प्रत्येक माह किया जाएगा। मासिक आयोजनों में चर्चित, प्रतिष्ठित कवि, लेखक और कलाकार डबवाली के कला प्रेमियों से सीधे संवाद करेंगे। इस अवसर पर सत्य प्रकाश यादव, जसदीप गिल, रसदीप गिल, वंदना वाणी, सेवक सिंह सोनू, वेद भारती, पुनीत कुमार, तरसेम गर्ग, परमजीत कोचर, जितेंद्र शर्मा, जितेंद्र खैरा सहित बड़ी संख्या में साहित्य एवं कला प्रेमी उपस्थित रहे।
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