बाल साहित्य पर शोध से मिली डॉक्टरेट, डबवाली में खुशी की लहर

डबवाली की बेटी, जानी-मानी कवयित्री एवं वरिष्ठ अध्यापिका मीनाक्षी आहुजा (सुपुत्री रिटायर्ड पोस्ट मास्टर श्री चमन लाल मिढ़ा, माता स्वर्गीय श्रीमती सुमन रानी मिढ़ा) ने साहित्य, शिक्षा और शोध के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। टांटिया यूनिवर्सिटी द्वारा उन्हें पीएच.डी. की उपाधि प्रदान की गई है। उनकी इस उपलब्धि से डबवाली सहित आसपास के क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है।
मीनाक्षी आहुजा की साहित्यिक यात्रा निरंतर साधना, संवेदनशील अभिव्यक्ति और मूल्यपरक लेखन की पहचान रही है। वे एक प्रतिष्ठित कवयित्री हैं और अब तक उनके तीन कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदनाओं, नैतिक मूल्यों और सामाजिक यथार्थ का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है। साहित्य के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता ने उन्हें साहित्य जगत में एक विशिष्ट स्थान दिलाया है।

राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर से पुरस्कृत मीनाक्षी आहुजा ने वरिष्ठ बाल साहित्य रचनाकार गोविंद शर्मा के बाल साहित्य को केंद्र में रखकर ‘गोविंद शर्मा के बाल साहित्य में चिंतन: नैतिकता और यथार्थ’ विषय पर अपना शोध प्रबंध प्रस्तुत किया। यह शोध कार्य उन्होंने डॉ. दशरथ के निर्देशन में सफलतापूर्वक पूर्ण किया।
उल्लेखनीय है कि मीनाक्षी आहुजा वर्तमान में फतूही स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में वरिष्ठ अध्यापिका के पद पर कार्यरत हैं। शिक्षा के साथ-साथ साहित्य और शोध के क्षेत्र में उनकी सक्रियता युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
मीनाक्षी आहुजा को पीएच.डी. की उपाधि मिलने की सूचना मिलते ही डबवाली में साहित्य प्रेमियों, शिक्षकों और गणमान्य नागरिकों में खुशी की लहर दौड़ गई। सभी ने इसे डबवाली के लिए गर्व का विषय बताते हुए मीनाक्षी आहुजा को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

