जन-कवि संत राम उदासी की स्मृति में हुआ समारोह..
सिरसा जिला के गाँव श्री जीवन नगर स्थित श्री गुरु हरि सिंह महाविद्यालय में केंदरी पंजाबी लेखक सभा (रजि.) के सहयोग से जन-कवि संत राम उदासी स्मृति समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में गीत-गायन, विचार-चर्चा व काव्य-गोष्ठी का आयोजन हुआ। समारोह की अध्यक्षता केंदरी पंजाबी लेखक सभा (रजि.) के अध्यक्ष दर्शन बुट्टर, संत राम उदासी के अग्रज प्रकाश सिंह रायसरी, सुपुत्री इक़बाल उदासी, श्री गुरु हरि सिंह महाविद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एडवोकेट गुरमीत सिंह वड़ैच, महासचिव गुरचरण सिंह धालीवाल, सदस्य ऐडवोकेट हरभजन सिंह विर्क, बलविंदर सिंह मुक्ता, प्राचार्य डा. हरजवन्त सिंह वड़ैच, पंजाबी अकादमी, दिल्ली के पूर्व सचिव एडवोकेट गुरभेज सिंह गुराया, केंदरी पंजाबी लेखक सभा (रजि.) के कार्यकारिणी सदस्य डा. हरविंदर सिंह व नामधारी पंजाबी साहित सभा, श्री जीवन नगर के अध्यक्ष लखविंदर सिंह बाजवा पर आधरित अध्यक्षमंडल ने की। प्राचार्य डा. हरजवन्त सिंह वड़ैच द्वारा अतिथियों के स्वागत एवं परिचय व गुरभेज सिंह गुराया द्वारा कार्यक्रम की रूप-रेखा से अवगत करवाने उपरांत उपस्थितजन ने पिछले दिनों बिछुड़े मास्टर अमरीक सिंह, बली सिंह वहमी, साधु सिंह किसान, विनोद दुआ, विपिन रावत एवं उनके सहयोगी, फ़तेहजीत, दर्शन बुट्टर की धर्मपत्नी व किसान आंदोलन के शहीदों के प्रति शोक व्यक्त करते हुए मौन धारण कर उन्हें श्रद्धांजली अर्पित की।
कार्यक्रम का आगाज़ इक़बाल उदासी व कुलदीप सिरसा द्वारा संत राम उदासी रचित गीतों के गायन से हुआ। विचार-चर्चा में प्रबुद्ध प्रगतिशील चिंतक का. स्वर्ण सिंह विर्क, पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला के पूर्व प्रोफेसर एवं मार्क्सवादी चिंतक डा. सुरजीत सिंह भट्टी व प्रख्यात इतिहासकार, चिंतक एवं अदारा 23 मार्च पंजाब के निदेशक डा. सुमेल सिंह सिद्धू ने जन-कवि संत राम उदासी के व्यक्तित्व, कृतित्व व उन द्वारा रचित काव्य की समकालीन प्रासंगिकता पर विस्तृत चर्चा की। का. स्वर्ण सिंह विर्क ने संत राम उदासी की पारिवारिक पृष्ठभूमि व वैचारिक प्रतिबद्धता से अवगत करवाते हुए उन्हें प्रगतिशील लेखन व सामाजिक सरोकारों के प्रति समर्पित एक जुझारू व्यक्तित्व बताया। डा. सुरजीत सिंह भट्टी ने कहा कि संत राम उदासी काव्य आमजन व हाशियाकृत अवाम के मुद्दों को बड़ी बेबाकी से ज़ुबान प्रदान करने में सक्षम है। डा. सुमेल सिंह सिद्धू ने कहा कि वर्तमान किसान आंदोलन के दौरान जिस तरह संत राम उदासी रचित गीतों, कविताओं का गायन व उद्धरण किया जा रहा है वह उन द्वारा रचित काव्य की समकालीन प्रासंगिकता की ज्वलंत उदाहरण है। वक्ताओं ने उन द्वारा रचित काव्य के कथ्य एवं शिल्प को लासानी बताते हुए कहा कि वह शब्द के सही मायनों में जन-कवि के ख़िताब से नवाज़े जाने के असल हकदार हैं। इस अवसर पर आयोजित काव्य-गोष्ठी में प्रख्यात पंजाबी कवियों सर्वश्री दर्शन बुट्टर, बलविंदर सिंह संधु, गुरतेज कोहारवाला, विजय विवेक, गुरसेवक लंबी, जगसीर जीदा, डा. नीतू, डा. कुलदीप दीप, जगदीप सिद्धू, वाहिद, पुष्पिंदर विर्क व डा. सिमरन अक्स ने ख़ूबसूरत व भावपूर्ण कविताओं, ग़ज़लों एवं गीतों की शानदार प्रस्तुति दी। काव्य-गोष्ठी का संचालन परिपक्व मंच-अदाकारा एवं बेबाक शायरा डा. सिमरन अक्स ने किया। समारोह के दौरान लखविंदर सिंह बाजवा रचित ‘हक्कां दी जंग’ व निर्मल सिंह गंगा रचित ‘बलदे रुक्खां दी छां’ पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।

समारोह में आयोजकों द्वारा प्रकाश सिंह रायसरी, इक़बाल उदासी एवं अन्य अतिथिगण, चिंतकों व आमंत्रित कविजन को स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर केन्दरी पंजाबी लेखक सभा (रजि.) अध्यक्ष दर्शन बुट्टर ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में सभा की ओर से इस भव्य, सार्थक एवं सफ़ल आयोजन हेतु आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए ऐसी स्वस्थ परम्पराओं की निरंतरता बनाए रखने का आह्वान किया। श्री गुरु हरि सिंह महाविद्यालय, श्री जीवन नगर की प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एडवोकेट गुरमीत सिंह वड़ैच ने अपने धन्यवाद प्रस्ताव में सभी मेहमानों एवं उपस्थितजन के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हुए विश्वास दिलाया कि भविष्य में भी वह ऐसे आयोजनों की निरंतरता बनाए रखेंगे।

कार्यक्रम का संचालन गुरभेज सिंह गुराया, डा. हरविंदर सिंह व प्रो. मनदीप कौर ने किया। समारोह में पांच सौ के क़रीब लेखकों, चिंतकों, प्राध्यापकों, बुद्धिजीवियों, अन्य सम्मानितजन प्रबुद्ध नागरिकों, महाविद्यालय के स्टाफ़ सदस्यों एवं विद्यार्थियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज़ करवाई।


