वरिष्ठ हिंदी अध्यापिका एवं स्कूल को-ऑर्डिनेटर मैडम आराधना मित्तल को ससम्मान एवं भावभीनी विदाई दी गई।
बाल मंदिर विद्यालय प्रांगण आज एक भावुक, गरिमामय और अविस्मरणीय क्षण का साक्षी बना, जब वरिष्ठ हिंदी अध्यापिका एवं स्कूल को-ऑर्डिनेटर मैडम आराधना मित्तल को ससम्मान एवं भावभीनी विदाई दी गई। वर्षों तक अपने समर्पण, निष्ठा और उत्कृष्ट कार्यशैली से विद्यालय को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने वाली मैडम मित्तल के सम्मान में आयोजित यह समारोह सभी के लिए भावनात्मक और प्रेरणादायक रहा।
समारोह का शुभारंभ ‘अर्थ डे’ के पावन अवसर पर एक अत्यंत सराहनीय पहल के साथ हुआ। विद्यालय की माननीय चेयरपर्सन श्रीमती पुष्पा देवी जिंदल, प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्री नीरज जिंदल, बाल वाटिका के अध्यक्ष श्री अरुण जिंदल जी, डॉ. महेश बासंल जी, शैक्षणिक सलाहकार सुरेंद्र कुमार कौशिक, श्रीमती आराधना मित्तल, श्रीमती सीमा सिंगला, सुबेदार शाह जिंदर जी एवं कुछ अध्यापकों ने एकजुट होकर विद्यालय परिसर में पौधारोपण किया।
इस सामूहिक प्रयास के माध्यम से न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का प्रेरणादायक आह्वान भी किया गया।
इस भावुक अवसर पर मैडम आराधना मित्तल ने अपने विचार साझा करते हुए कहा,
“एक शिक्षक का जीवन एक माली के समान होता है, जो नन्हे-नन्हे पौधों को ज्ञान, संस्कार और अनुशासन से सींचकर उन्हें वटवृक्ष बनाता है।”
उनके ये शब्द केवल विचार नहीं, बल्कि उनके सम्पूर्ण जीवन दर्शन का प्रतिबिंब थे, जिन्होंने उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति के हृदय को गहराई से स्पर्श किया।
कार्यक्रम के दौरान प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नीरज जिंदल जी ने मैडम मित्तल के व्यक्तित्व और कृतित्व की सराहना करते हुए उन्हें विद्यालय की “आत्मा” और “मजबूत आधारस्तंभ” बताया। उन्होंने कहा कि उनके कुशल नेतृत्व, अनुशासनप्रियता और समर्पण ने न केवल विद्यालय को सशक्त बनाया, बल्कि शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच एक सकारात्मक और प्रेरणादायक वातावरण भी स्थापित किया।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि स्कूल को-ऑर्डिनेटर के रूप में मैडम मित्तल ने सदैव पारदर्शिता, संतुलन और उत्कृष्ट प्रशासनिक क्षमता का परिचय दिया। वे प्रबंधन और शिक्षकों के बीच एक सुदृढ़ सेतु बनकर कार्य करती रहीं, जिससे विद्यालय निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहा।
विद्यालय के शैक्षणिक सलाहकार सुरेंद्र कुमार कौशिक ने भी अपने संबोधन में उन्हें “संस्कारों की धरोहर” बताते हुए कहा कि हिंदी भाषा के माध्यम से उन्होंने विद्यार्थियों के जीवन में जो नैतिक मूल्यों के बीज बोए हैं, वे सदैव फलते-फूलते रहेंगे और आने वाली पीढ़ियों को दिशा देते रहेंगे।
समारोह के अंत में प्रबंधन समिति द्वारा मैडम आराधना मित्तल को शाल ओढ़ाकर सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। यह दृश्य अत्यंत भावुक था—आँखों में आँसू थे, पर दिल में अपार सम्मान और कृतज्ञता भी।
यह विदाई केवल एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि एक ऐसे महान व्यक्तित्व को नमन था, जिन्होंने अपने कर्म, समर्पण और संस्कारों से विद्यालय के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय लिखा है। मैडम आराधना मित्तल की सेवाएँ सदैव विद्यालय परिवार के लिए प्रेरणा का दीप बनी रहेंगी।

