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आज कैसे याद कर लिया… कोई काम था? ❤️

कभी किसी के घर जाने के लिए काम होना जरूरी नहीं था।

मन किया… और चले गए।

कभी चाय पीने, कभी हाल पूछने, कभी पुरानी बातें करने और कभी सिर्फ इसलिए कि वह अपना था।

तब रिश्तों के लिए कोई वजह नहीं चाहिए थी।

रिश्ता ही काफी था।

आज मोबाइल है, वीडियो कॉल है, सोशल मीडिया है…
लेकिन शायद एक-दूसरे के पास बैठने का समय कम हो गया है।

अब मिलने से पहले पूछना पड़ता है—

“आना है… कोई काम तो नहीं?”

और कभी सामने से सुनने को मिलता है—

“आज कैसे याद कर लिया… कोई काम था?”

शायद हमने रिश्तों को भी जरूरत और मतलब की नजर से देखना शुरू कर दिया है।

लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे भी होने चाहिए जहाँ कोई काम न हो, फिर भी मुलाकात हो।

किसी दोस्त के साथ बिना वजह चाय पीने के लिए।
किसी बुज़ुर्ग के पास दो पल बैठने के लिए।
किसी अपने का हाल पूछने के लिए।

बस इतना कहने के लिए—

“कोई खास काम नहीं था… बस तुम्हारी याद आ गई।” ❤️

यकीन मानिए, आज के समय में यह वाक्य बहुत बड़ी दौलत है।

तो अगली बार किसी अपने के घर जाने का मन करे…

काम मत ढूँढिए।
बस चले जाइए।

क्योंकि जिंदगी की कुछ सबसे खूबसूरत मुलाकातें वही होती हैं…

जिनके पीछे कोई काम नहीं होता। ❤️

आप बताइए…

क्या आज भी आप किसी के घर सिर्फ मिलने के लिए जाते हैं—बिना किसी काम के?

👇 हाँ या नहीं? और क्यों? कमेंट में जरूर बताइए।

✍️💎By Sanjivv Shaad
🌟 Social Media Influencer & Motivational Content Creator
🎙️ To The Point Shaad

🌊 The Mission — Positive Waves

Show Must Go On… ज़िंदगी ज़िंदाबाद!

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