एक तिनके का कमाल…..
(मेरे एकल नाटक तिनका का पहला डायलॉग…) बस ये ही इक बात खतरनाक …. हर कोई चाहता है कोई और लडे ….. बंदूक हमारी और कंधा किसी का तो फिर लड़ाई….. अब और किस लिए किसके लिये क्योकि मै और नहीं चाहता लड़ना और बोलना बस मै मुर्दा हो गया हूँ और शामिल हूँ भेड़ो की भीड़ में कल अंतिम …

