
_12 सालों से कलाकारों का मेकअप करते आ रहे हैं तीन विषयों में एमएससी पास राहुल_

खुद कोचिंग सेंटर चलाते हैं, रात आठ बजे क्लास आफ करके रामलीला मैदान में पहुंच जाते हैं

डबवाली।
43 साल के राहुल धमीजा। ट्रिपल एमएससी हैं, यानी फिजिकस, केमिस्ट्री तथा कंप्यूटर में एमएससी पास हैं। बीएड तथा पीजीडीसीए हैं। मेकअप मैन की डिग्री समाज ने इन्हें दी है। दरअसल, राहुल पिछले करीब 12 सालों से निशुल्क रामलीला में राम, लक्ष्मण, रावण तथा ताड़का आदि कलाकारों का मेकअप करते आ रहे हैं।

ऐसे लगता है कि जैसे कलाकार में किरदार को जीवित कर दिया हो। कहते हैं कि मेकअप के बाद कलाकार खुद को शीशे में देखता है तो खुद को वैसे ही पाता है, जिसके लिए वह अदाकारी करने जा रहा है। वह आत्मविश्वास से लबरेज हो जाता है। मंचन के दौरान दर्शकों को खूब आनंद आता है। एक कलाकार का मेकअप करने के लिए राहुल को 20 से 30 मिनट लगते हैं। रावण का मेकअप करना सबसे ज्यादा पसंद है।

राहुल कोचिंग सेंटर चलाते हैं। रात को आठ बजे क्लास आफ करके सीधा रामलीला मैदान पहुंचते हैं। जुट जाते हैं, आपने काम में। अहम बात यह है कि किसी भी कलाकार का मेकअप करने से पहले उसके पांव पर हाथ लगाकर आशीर्वाद लेते हैं। मेकअपमैन का गुण उन्हें विरासत में मिला है। दरअसल, राहुल के पिता विनोद धमीजा खुद रामलीला के कलाकार थे। वे दशरथ, खेवट, हनुमान आदि का रोल अदा किया करते थे। वे पिंटू मोंगा, हंसराज तथा मास्टर के दिलावर के साथ मिलकर कलाकारों का मेकअप किया करते थे। राहुल अपने पिता को मेकअप करते देखता था। वर्ष 2011 में विनोद धमीजा की मृत्यु के बाद राहुल ने उनकी जगह ले ली। पिता से मिले गुणों को रंगों में मिलाकर कलाकारों का मेकअप किया तो मंच के सामने दर्शकों की गूंजती तालियां बेहतरीन कार्य की गवाही देने लगी।

महिला पात्र का मेकअप है मुश्किल
कलाकार बेहतरीन हो सकता है, उसके द्वारा बोले जाने वाले डायलाग अच्छे हो सकते हैं। लेकिन कलाकार खुद को किरदार में तभी ढाल पाता है, जब उसका मेकअप अच्छा हो। वैसा हो, जिसका वह रोल करने जा रहा है। राहुल बताते हैं कि शुरुआत में उसे काफी मुश्किल आई। चूंकि वह फोटो देखकर मेकअप करता था। फिर प्रेक्टिस हो गई कि अब बिना फोटो देखकर ही मेकअप कर देता हूं। हालांकि ककई, सीता की सहेलियों या अन्य महिला पात्रों का मेकअप करना आसान नहीं। लेकिन 12 साल के अनुभव के कारण अब कलाकार में किरदार जिंदा में मजा आने लगा है।

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सात-आठ वर्ष का हूं, मैंने बाल राम तथा लक्ष्मण का रोल अदा किया है। पहले मैं म्यूजिक प्ले किया करता था। पिता के देहांत के बाद रामलीला के समय कलाकारों के बीच जाता था। वहां कलाकार मेरे पिता को याद करते हुए उनके कार्यों का उल्लेख करते थे। मेरा लगाव बढ़ता ही गया। मैं भी मेकअपमैन बन गया। मेकअप करते हुए ऐसे लगता है कि जैसे मैं अपने पिता से मिल रहा हूं। भावनात्मक रुप से मेरा मजबूत लगाव हो गया हैं
-राहुल धमीजा, डबवाली
स्टोरी आइडिया :
संजीव शाद
स्टोरी क्रेडिट :
*डीडी गोयल*
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