राजा हरिशचन्द्र
इतिहास
का इक चरित्र ……
याद आया आज जब स्कुल की दीवार पे लिखा पढ़ा ” सदा सच बोलो”
ये भी लिखना पड़ता है दीवारो पे
अफ़सोस….सीखना पड़ता
शायद
सच कड़वा होता है
मुश्किल
होता है
लेकिन सच परेशान हो सकता है
हारता नही
उग आता है
जीत सत्य की होती है
तो
सत्य बोलना इतना मुहाल था की इक दिन सूरज की जुबान पे छाले निकल गए
झूठ की चादर …..
चहेरे नही मुखोटे है …….
और सत्य को परीक्षा देनी पड़ती
तभी कभी कोई कोई किरदार पैदा होता है
और कहानी बनता है
सुनना पढ़ना और बच्चों को बताना
की हरिशचन्द्र राजा से रंक और फिर कैसे इतिहास का सम्राट हो गया
क्योकि……
बादलो की तरह आवारा है दोस्तों
आवारगी ने हमे सवारा है दोस्तों
झूठ ने की 100 शादियाँ
फिर भी बे औलाद
सच के हज़ारो बेटे है
फिर भी कंवारा है दोस्तों………
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