Home updates रिजक

रिजक

4 second read
4
0
3

रीजक(रोजी-रोटी)बिखेर दी
संसार में उसने हवा में उछाल के
उसको इकठ्ठा करने के लिए
भटकता रहा सूखे पते की तरह
मेरा जीवन ………..
आज देर रात
घर लौटा हूँ
बड़े दिनों बाद
वो भी
खाली जेब
खाली हाथ
जानता  हूँ मैं की …….
कुछ कमाई ऐसी भी होती  है
जो  सिर्फ  मिलती है
परखने के बाद
या
दुनिया में ना होने के बाद ….
इसलिए तो..
उड़ रही है पल पल ज़िन्दगी रेत सी,
और मुझे भ्रम है कि मैँ बड़ा हो रहा हू
शुभ रात्रि …….
कल सवेरे फिर काम की तलाश….. में
मैं और मेरा जीवन … shaad
(कभी कभी बस यूँ ही……..)

4 Comments

  1. Siva Brushes

    February 16, 2018 at 12:02 pm

  2. Siva Brushes

    February 16, 2018 at 12:02 pm

  3. Dr Sukhpal

    May 12, 2020 at 12:41 pm

    जिन्दगी जिंदाबाद

    Reply

  4. Dr Sukhpal

    May 12, 2020 at 12:41 pm

    जिन्दगी जिंदाबाद

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

खेलकूद से पैदा होती है अनुशासन की भावना: डा. संदीप गोयल

जीएनसी सिरसा में नैशनल स्पोर्ट्स डे पर हुआ आयोजन सिरसा: 29 अगस्त: व्यक्तित्व के सर्वांगीण …