हर कोई घर से निकलता
कुछ खरीदने
या कुछ
बेचने
या फिर नगद या
उधार
ये है
बाजार
कुछ ऐसे भी है
न लाभ
न हानि
ना हिसाब
न किताब
और सिर्फ खाली हाथ
उनके लिए
सिर्फ इक चक्कर है
बाज़ार
और शाम को घर आ कर सोचते है
धरती गोल है
बाकि सब के लिए धरती
चपटी तिकोनी
गज फुट इंच
और
ब्याज है जो दिन और रात
को भी
घड़ी की सुई
के साथ
चलता रहता है
फिर भी
हर कोई
हर वक्त
है
खाली हाथ
और
बाज़ार …………… और ख्बाव ।।
2 Comments
बाजार
हर कोई घर से निकलता
कुछ खरीदने
या कुछ
बेचने
या फिर नगद या
उधार
ये है
बाजार
कुछ ऐसे भी है
न लाभ
न हानि
ना हिसाब
न किताब
और सिर्फ खाली हाथ
उनके लिए
सिर्फ इक चक्कर है
बाज़ार
और शाम को घर आ कर सोचते है
धरती गोल है
बाकि सब के लिए धरती
चपटी तिकोनी
गज फुट इंच
और
ब्याज है जो दिन और रात
को भी
घड़ी की सुई
के साथ
चलता रहता है
फिर भी
हर कोई
हर वक्त
है
खाली हाथ
और
बाज़ार …………… और ख्बाव ।।
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Unknown
September 25, 2015 at 4:25 pm
ਸਮੰਦਰ ਤੋਂ ਡੂੰਗੇ ਖਿਆਲਾਂ ਜਹੀ ਉਪਜ ਸਫ਼ੇ ਉਤਾਰੀ ਹੈ ਸ਼ਾਦ ਜੀ..?
Unknown
September 25, 2015 at 4:25 pm
ਸਮੰਦਰ ਤੋਂ ਡੂੰਗੇ ਖਿਆਲਾਂ ਜਹੀ ਉਪਜ ਸਫ਼ੇ ਉਤਾਰੀ ਹੈ ਸ਼ਾਦ ਜੀ..?