Home updates खुद से ……

खुद से ……

0 second read
0
0
2

जिंदगी में…..
ख़ुशी गम
परेशान
मौन
और खुद की नज़र भी
कितने सवाल खड़े करती है खुद से
वैसे
में दिखता कुछ और ही हूँ
तुम्हे
जैसे ……..
अक्सर तुम मुझे दिखते हो
खुद के रूबरू हो कर इक दिन
ये ख़याल आया
कितना बदल गया हूँ मैं
मन जितना जीना चाहे
तन उतना ही मरता जाये
दिल भी पागल है
उम्मीद ही करता जाये
खुद रूपी-शीशे में बने
अक्स से डर गया मै……
पसीना पोछते हुए सोचा
खुद के रूबरू होना कितना मुश्किल है
और दुनिया के सामने कितना आसान …..
क्योकि
वक़्त रूबरू करवाता है,
कभी ख़ुद से कभी सब से. .!
शुभ रात्रि……..
कभी खुद के रूबरू……होना ।
और
शुभ सवेर
कहना मुझे….

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

खुद से ……

0 second read
0
0
0

जिंदगी में…..
ख़ुशी गम
परेशान
मौन
और खुद की नज़र भी
कितने सवाल खड़े करती है खुद से
वैसे
में दिखता कुछ और ही हूँ
तुम्हे
जैसे ……..
अक्सर तुम मुझे दिखते हो
खुद के रूबरू हो कर इक दिन
ये ख़याल आया
कितना बदल गया हूँ मैं
मन जितना जीना चाहे
तन उतना ही मरता जाये
दिल भी पागल है
उम्मीद ही करता जाये
खुद रूपी-शीशे में बने
अक्स से डर गया मै……
पसीना पोछते हुए सोचा
खुद के रूबरू होना कितना मुश्किल है
और दुनिया के सामने कितना आसान …..
क्योकि
वक़्त रूबरू करवाता है,
कभी ख़ुद से कभी सब से. .!
शुभ रात्रि……..
कभी खुद के रूबरू……होना ।
और
शुभ सवेर
कहना मुझे….

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

खेलकूद से पैदा होती है अनुशासन की भावना: डा. संदीप गोयल

जीएनसी सिरसा में नैशनल स्पोर्ट्स डे पर हुआ आयोजन सिरसा: 29 अगस्त: व्यक्तित्व के सर्वांगीण …