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गलतियों की दुनिया में इंसानों का कंप्यूटर” विषय पर विचार गोष्ठी सम्पन्न

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शिक्षाविदों, वरिष्ठ नागरिकों और समाजसेवियों ने मानव मस्तिष्क की शक्ति, तकनीक के संतुलित उपयोग और युवाओं में सकारात्मक सोच विकसित करने पर दिया जोर

वरिष्ठ नागरिक कल्याण संघ (रजि.) द्वारा “गलतियों की दुनिया में इंसानों का कंप्यूटर” विषय पर आज एक विचार गोष्ठी का सफल आयोजन सतलुज पब्लिक स्कूल, मंडी डबवाली के सभागार में किया गया। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, वरिष्ठ नागरिकों एवं समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

 

कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुए एसोसिएशन के सचिव श्री शशि कांत शर्मा ने सर्वप्रथम विषय की भूमिका प्रस्तुत करते हुए बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस युग में भी मानव मस्तिष्क की संवेदनशीलता, विवेक और अनुभव उसे हर मशीन से श्रेष्ठ बनाते हैं तथा गलतियाँ ही मनुष्य के विकास का आधार हैं। आचार्य रमेश सचदेवा ने विचार चर्चा का शुभारंभ यह कह कर किया कि “स्मरण शक्ति, एकाग्रता और सकारात्मक चिंतन के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन में असाधारण सफलता प्राप्त कर सकता है।” गलतियों की दुनिया में मशीनें केवल आदेश मानती हैं, लेकिन इंसान का मस्तिष्क गलतियों को अनुभव में, अनुभव को ज्ञान में और ज्ञान को सफलता में बदलने की अद्भुत क्षमता रखता है। यही उसे इस संसार का सबसे महान कंप्यूटर बनाती है।

तदुपरांत प्रोफेसर अमित बहल ने अभिव्यक्त किया कि “ आग और बिजली की खोजें भी कभी डराती थी और उन्हीं का हमने ठीक उपयोग करना सीख करके उसे अपना मित्र बना लिया है। “कंप्यूटर सूचना का भंडार हो सकता है, लेकिन सही निर्णय लेने की क्षमता केवल जागरूक और प्रशिक्षित मानव मस्तिष्क में होती है।” याद रखिए—दुनिया का सबसे शक्तिशाली कंप्यूटर किसी प्रयोगशाला में नहीं, बल्कि हर इंसान के मस्तिष्क के भीतर है। यदि हम उसे सही दिशा, सही प्रशिक्षण और सही उद्देश्य दें, तो वह न केवल अपनी गलतियों को सुधार सकता है, बल्कि समाज और राष्ट्र का भविष्य भी बदल सकता है।

 

एम एच डी स्कूल ओढ़ा के प्रधानाचार्य कृष्णकान्त ने कहा गलतियाँ करना मानव स्वभाव है।

इंसान भूलता है, भ्रमित होता है और निर्णयों में त्रुटियाँ करता है। यही गलतियाँ सीखने का अवसर भी बनती हैं।

किड्स किंगडम स्कूल के चेयरमैन के. के. वर्मा ने कहा कि कंप्यूटर गलतियाँ नहीं करता, निर्देशों का पालन करता है । कंप्यूटर वही करता है जो उसे प्रोग्राम किया जाता है। उसकी त्रुटियाँ भी मानव द्वारा दिए गए गलत निर्देशों का परिणाम होती हैं, इसमें मशीनों का कोई दोष नहीं और ना ही मशीनों से डरने की जरूरत है। शिक्षाविद भीम सैन ने कहा कि तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता के कारण मोबाइल और कंप्यूटर पर बढ़ती निर्भरता के कारण लोग अपनी प्राकृतिक स्मरण शक्ति और सोचने की क्षमता का कम उपयोग कर रहे हैं।  डॉ. विनीता गुप्ता, प्राचार्या महाराणा महिला महाविद्यालय ने कहा कि “स्वस्थ शरीर के साथ स्वस्थ और सक्रिय मस्तिष्क ही जीवन की वास्तविक सफलता का आधार है।

शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में सोचने और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना है।” प्राध्यापक डा. बलराज सिंह सिद्धू ने विचार दिया कि समस्याओं का प्रचार कम और उपचार ज्यादा करने की और ध्यान देने की जरूरत है। “मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति उसकी सीखने और स्वयं को निरंतर बेहतर बनाने की क्षमता है ओर अनुभव से प्राप्त ज्ञान किसी भी डिजिटल सूचना से अधिक मूल्यवान होता है।”

सतलुज पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल श्री सोहित शर्मा ने बोला कि “तकनीक का उपयोग तभी सार्थक है जब वह मानव मूल्यों और नैतिकता के साथ जुड़ा हो।” उन्होंने कहा कि “युवाओं को मोबाइल और सोशल मीडिया के साथ-साथ अपने मस्तिष्क के विकास पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहिए।” मैडम अनुराधा मित्तल ने कहा कि “सकारात्मक सोच और अनुशासित जीवनशैली से मनुष्य अपनी मानसिक क्षमता को कई गुना बढ़ा सकता है।” इस तकनीक के युग में सबसे बड़ा प्रभाव वृद्ध जनों पर पड़ा है क्यूंकि वे इसे सीखने में अब स्वयं को असमर्थ समझते है।रंगमंच के मंजे हुए अदाकार संजीव शाद, रिटायर्ड एजीएम परमजीत कोचर, सतलुज स्कूल के मैनेजर सत्यप्रकाश यादव, मोहित शर्मा, प्रेम खुराना, सुभाष अरोड़ा ने भी अपने -अपने विचार रखे। सभी उपस्थित शिक्षाविदों और सामाजिक वक्ताओं व विचारकों ने सर्वसमिति से निर्णय लिया कि 16 वर्ष के बच्चों के लिए सरकार द्वारा सोशल मीडिया प्रतिबंधित कर देना चाहिए। शिक्षा में इसका उपयोग करने से पहले यह सुनिश्चित हो की यह लाभकारी है न कि यह मात्र एक प्रयोग है ।किड्स किंगडम से मैडम मीनाक्षी खूँगर , बठिंडा डिस्ट्रिक कॉर्डिनटर एवं टीचर ट्रैनर बाल कृष्ण गुप्ता, सतीश सिडाना, मलकीत सिंह, रमेश चंद्र शर्मा, सुभाष मेहता ओम प्रकाश वध्वा, सुरिंदर मोंगा, सुरजीत सिंह बरजोत, व एन पी स्कूल से वेद भारती उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री सुरिन्दर मित्तल ने सभी विशिष्ट वक्ताओं, अतिथियों एवं उपस्थित नागरिकों का हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज के बौद्धिक विकास एवं सकारात्मक चिंतन को बढ़ावा देने के लिए भविष्य में भी इस प्रकार की विचार गोष्ठियों का आयोजन संस्था द्वारा निरंतर किया जाता रहेगा।

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