मेरे शब्द आपके लिए नये नही….बल्कि उनके अर्थ अलग अलग हैवक्त और मौसम के हिसाब केख़याल केख्बाव केदेखो मैं इस बार कुछ भी नही बोलातुमने देखा और और मेरे सिर्फ देखने के भी अर्थ निकाल लिएशब्द गूंगे होते है सिर्फ आवाज ही होती हैअक्षरो का जोड़ तोड़ होता हैउच्चारण होता हैदेखा इस बार कुछ बोला भी नही और बोलने से …

