Home News Point “‘यार बोलदा…’ में गूंजे आधी सदी के किस्से: साहित्यकार गीतकार जनाब शमशेर संधू से खास रूबरू”

“‘यार बोलदा…’ में गूंजे आधी सदी के किस्से: साहित्यकार गीतकार जनाब शमशेर संधू से खास रूबरू”

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गीतकार शमशेर संधू ने खुलकर की बातें

खेल लेखक नवदीप गिल ने शमशेर संधू के साथ रोचक संवाद किया

पंजाबी लेखक सभा के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जुटे लोग

चंडीगढ़, 12 अप्रैल

आज पंजाब कला भवन में पंजाबी लेखक सभा चंडीगढ़ ने पंजाब कला परिषद के सहयोग से प्रख्यात गीतकार और वरिष्ठ पत्रकार शमशेर संधू के साथ एक विशेष रूबरू कार्यक्रम आयोजित किया।

बड़ी संख्या में उपस्थित श्रोताओं ने ‘यार बोलदा…’ नामक इस कार्यक्रम का आनंद लिया, जिसमें खेल लेखक नवदीप सिंह गिल ने सूत्रधार की भूमिका निभाते हुए शमशेर संधू के साथ खुली बातचीत की।

पंजाबी लेखक सभा के जनरल सचिव भूपिंदर सिंह मलिक ने कहा कि पंजाबी गीत लेखन में शमशेर संधू का नाम सुसंस्कृत लेखन का प्रतीक है, जो साहित्यिक मिठास के साथ सांस्कृतिक गीत लिखते हैं।प्रधान दीपक शर्मा ने सभी उपस्थित लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि शमशेर संधू ने आज की महफ़िल में आधी सदी का इतिहास आंखों के सामने प्रस्तुत कर दिया। सचिव सुखविंदर सिंह सिद्धू ने स्वागत भाषण में कहा कि शमशेर संधू ने अपनी उच्च स्तर की गीत लेखनी से इस विधा को नई दिशा दी, जिसके चलते सुरजीत बिंदरखिया और सतविंदर बिट्टी सहित कई गायकों ने बड़ी सफलता हासिल की।

अपनी मधुर आवाज में शमशेर संधू का गीत ‘पेकें हुंदे मावां नाल’ सुनाकर मनदीप कौर मराड़ ने उपस्थित सभी श्रोताओं की खूब सराहना प्राप्त की।

सूत्रधार की भूमिका में नवदीप गिल ने कहा कि शमशेर संधू ने जीवन की हर भूमिका को पूरे समर्पण से निभाया। शिक्षक के रूप में करियर शुरू करने के बाद उन्होंने खुद को एक प्रतिष्ठित पत्रकार के रूप में स्थापित किया और 30 वर्षों तक एक संस्था से जुड़े रहे। शमशेर संधू के 500 से अधिक गीत 80 से अधिक गायकों की आवाज में रिकॉर्ड हो चुके हैं और अब तक उनकी 68 एल्बम रिलीज हो चुकी हैं। उन्हें पंजाब के लगभग सभी प्रमुख कवियों की अनेक रचनाएं कंठस्थ हैं।

शमशेर संधू ने अपने अनोखे अंदाज में खुलकर बातचीत करते हुए श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। शिव कुमार बटालवी, डॉ. महिंदर सिंह रंधावा, डॉ. मोहन सिंह, सुरजीत पातर, अवतार पाश, जगदेव सिंह जस्सोवाल, दीदार संधू सहित कई साहित्यकारों से जुड़े अनेक किस्से साझा करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने श्रेष्ठ साहित्यकारों को पढ़कर ही खुद को एक गीतकार के रूप में स्थापित किया है। पंजाब की धरती बहुत ही सुंदर लोक रंगों से समृद्ध है।

अपने गीत लेखन के सफर के बारे में बताते हुए शमशेर संधू ने कहा कि अधिकतर गीतों की धुनें भी उनके मन में ही बन जाती थीं, जिससे संगीतकारों को काफी मदद मिलती थी। इस संबंध में उन्होंने कई उदाहरण भी दिए। बतौर पत्रकार अपने अनुभव को उन्होंने रचनात्मक लेखन के लिए बहुत उपयोगी बताया।

दविंदर कौर ढिल्लों ने सतविंदर बिट्टी का एक गीत बहुत ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया, जिसे शमशेर संधू ने लिखा था। ‘यार बोलदा’ गीत कैसे बना और इसके पीछे की कहानी क्या थी, इस बारे में भी उन्होंने विस्तार से जानकारी साझा की। नवदीप सिंह गिल ने शमशेर संधू के जीवन के कई अनछुए पहलुओं पर प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने बड़े रोचक ढंग से उत्तर दिया और पूरे कार्यक्रम को बांधे रखा।

इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रसिद्ध लेखक, पत्रकार, गायक, गीतकार, अभिनेता और अन्य बुद्धिजीवी उपस्थित रहे। इनमें बलकार सिद्धू, डॉ. गुरमिंदर सिद्धू, संजीवन सिंह, कमल दुसांझ और अजायब औजला ने शमशेर संधू की गीत लेखनी से जुड़े गहन प्रश्न पूछे।

कार्यक्रम में प्रसिद्ध कवयित्री सुखविंदर अमृत, गायक सूफी बलबीर, दर्शन औलख, वरिष्ठ पत्रकार बलजीत बली, जय सिंह छिब्बर, जगतार भुल्लर, दविंदर पाल, हरबंस सोढ़ी, कमलजीत सिंह बनवैत, अजायब औजला, के. पी. सिंह, सुशील दुसांझ, अवतार सिंह भंवरा, कैप्टन नरेंद्र सिंह आई.ए.एस., डॉ. बलदेव सिंह खहिरा, पाल अजनबी, मनजीत कौर मीत, सुखविंदर सिद्धू, हरमिंदर कालड़ा, मलकीअत बसरा, बलविंदर आर्या, मान सिंह, वरिंदर चठा, जसबीर सिंह गिल, यादविंदर सिद्धू, भट्टी भड़ीवाला, जगजीत सिंह, सरबजीत सिंह, कृष्ण लाल शर्मा, परविंदर सिंह, रजिंदर कौर सरां, राज समद्धर, जसविंदर सिंह जस्सी, ध्यान सिंह काहलों, दर्शन त्यूणा, डॉ. पन्ना लाल मुस्तफाबादि, सुरजीत सिंह धीर, डॉ. लाभ सिंह खीवा, डॉ. अवतार सिंह पतंग, दिनेश कुमार शर्मा, विंदर माजी, सुरजीत सुमन, डॉ. कमलजीत कौर, समरीन कौर, सुखविंदर आही, सुखविंदर सिंह सराओ, चरणजीत कौर बाठ, सुरिंदर कुमार, सुरिंदर कौर बाड़ा, डॉ. शिंदर पाल, जसविंदर सिंह कायनौर, रणजीत कौर कायनौर, राहुल चौहान, अनीश दाबड़ा, पवनदीप चौहान, धर्म सिंह, जगतार सिंह जोग, दाता राम सैनी, मनमोहन सिंह कलसी, सतवंत सिंह मोहाली, अमरजीत, केवल भारती, हरभजन कौर ढिल्लों, कुलदीप कौर, सुखचैन सिंह, मुहिंदर गर्ग, जसवीर समर, शमशील सिंह सोढ़ी, आर. डी. कैले, मनजीत कौर मोहाली, डॉ. मनजीत सिंह बल्ल, ए. एस. लांबा, जीत सिंह, डॉ. सतिंदर सिंह बेदी, बाबू राम दीवाना, परमिंदर सिंह गिल एडवोकेट, प्रभजोत ढिल्लों, प्रो. दविंदर कौर कनाडा, बलविंदर कौर, रेखा मित्तल, जोगिंदर सिंह जग्गा, गुरचरण सिंह, राज कुमार साहोवालिया, परमिंदर सिंह परवाना, जे. एल. कनौजिया, गुरजंट सिंह, शीनू वालिया, रघबीर सिंह, कुलजीत कौर, मलकीअत सिंह औजला, राखी बालासुब्रमण्यम, रमिंदर पाल सिंह, गुरमेल सिंह, हरजीत सिंह, बलजीत सिंह, संजीव जग्गी, इं. पवन कुमार, उमा कांत मेहता और जतिंदर पाल सिंह शामिल थे।

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