Home News Point कलाग्राम में ‘बैसाखी उत्सव-2026’ की धूम: लोक रंगों और सुरों से सजी पहली शाम” आज भी होगा शाम 6 बजे कार्यक्रम ..दर्शकों के लिए प्रवेश निःशुल्क

कलाग्राम में ‘बैसाखी उत्सव-2026’ की धूम: लोक रंगों और सुरों से सजी पहली शाम” आज भी होगा शाम 6 बजे कार्यक्रम ..दर्शकों के लिए प्रवेश निःशुल्क

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कलाग्राम में ‘बैसाखी उत्सव-2026’ का भव्य आगाज़

चंडीगढ़, 12 अप्रैल उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (NZCC), संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, पटियाला द्वारा आयोजित दो दिवसीय “बैसाखी उत्सव-2026” का आज कलाग्राम में बड़े उत्साह और धूमधाम के साथ शुभारंभ हुआ। यह सांस्कृतिक आयोजन पंजाब की समृद्ध विरासत को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

बैसाखी के इस पावन अवसर पर उत्साहित किसान समुदाय अपने घरों से निकलकर एक साथ जुटा और भरपूर फसल की खुशी में जश्न मनाया। लोगों ने खुशी के गीत गाकर ईश्वर का आभार व्यक्त किया और ढोल की थाप पर पारंपरिक लोक वाद्य यंत्रों जैसे ढोल, ढोलकी, चिमटा, अल्गोजा, तुम्बी, सारंगी, सप, मंजीरा और घड़ा आदि की मधुर धुनों पर रंग-बिरंगे परिधानों में नृत्य कर पंजाब की जीवंत संस्कृति की झलक पेश की।

 

उत्सव के पहले दिन विभिन्न मनमोहक पंजाबी लोक नृत्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और शाम को संगीतमय माहौल में बदल दिया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण प्रसिद्ध लोक कलाकार मेजर सिंह और उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत मालवाई गिद्धा रहा, जिसने अपनी गरिमामयी प्रस्तुति से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। इसके साथ ही मेजर सिंह की दमदार पंजाबी लोक गायकी ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया।

इसके बाद जसवंत सिंह द्वारा झूमर, नरोत्तम सिंह द्वारा जिंदुआ और लुड्डी, अमनिंदर सिंह द्वारा भांगड़ा, बख्शीश सिंह द्वारा बाजीगर, मनोज जले द्वारा घूमर और फाग तथा सोम सेहोता द्वारा भांड-मिरासी जैसे लोक नृत्यों की शानदार प्रस्तुतियां दी गईं। वहीं तलविंदर सिंह और उनकी टीम ने सिख मार्शल आर्ट ‘गतका’ का अद्भुत प्रदर्शन कर दर्शकों को रोमांचित कर दिया।

उत्सव के दूसरे और अंतिम दिन 13 अप्रैल को भी शानदार लोक प्रस्तुतियों की श्रृंखला जारी रहेगी। इस दिन प्रसिद्ध लोक कलाकार शमिंदर शम्मी अपनी टीम के साथ दमदार गायकी से समां बांधेंगे, जबकि देश राज लच्छकानी अपनी टीम के साथ पारंपरिक ‘ढाडी’ गायन प्रस्तुत करेंगे।

कार्यक्रम का समय शाम 6 बजे से रहेगा और दर्शकों के लिए प्रवेश निःशुल्क है।

NZCC के निदेशक मोहम्मद फुरकान खान ने शहरवासियों से इस सांस्कृतिक आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि ऐसे उत्सव समाज में एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करते हैं तथा युवाओं को अपनी समृद्ध विरासत से जोड़ते हैं।

 

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