क्योंकि कई बार मुस्कान किसी खुशी का परिणाम नहीं होती, बल्कि एक नई शुरुआत का पहला कदम होती है
कभी अपने आप से यह सवाल पूछा है — आप पिछली बार कब मुस्कराये थे?
सिर्फ चेहरे पर आई एक औपचारिक मुस्कान नहीं, बल्कि वह मुस्कान जो भीतर से निकली हो… बिना किसी कारण, बिना किसी दिखावे के।
आज की जिंदगी में हम अक्सर बीते हुए कल की यादों और आने वाले कल की चिंताओं के बीच झूलते रहते हैं। कभी पुराने घाव हमें रोक लेते हैं, तो कभी भविष्य का डर हमें घेर लेता है। इसी भाग-दौड़ में वर्तमान कहीं पीछे छूट जाता है। जबकि मुस्कान वही दरवाज़ा है जो हमें वर्तमान में वापस लेकर आती है।
मुस्कान का संबंध केवल खुशी से नहीं है। कई बार मुस्कान संघर्षों के बीच भी जन्म लेती है। जब कोई थका हुआ इंसान अपने बच्चे को देखकर मुस्करा देता है, जब किसी दोस्त का एक छोटा-सा संदेश दिल को छू जाता है, जब सुबह की पहली किरण खिड़की पर दस्तक देती है — तब मुस्कान हमें याद दिलाती है कि जिंदगी अभी भी सुंदर है।
मुस्कान वर्तमान की दहलीज है।
क्योंकि जब आप सच में मुस्कराते हैं, तब न आप बीते हुए कल में होते हैं और न ही आने वाले कल में। उस एक पल में आप सिर्फ “यहीं” होते हैं, “अभी” होते हैं। और शायद जीवन का सबसे बड़ा सत्य भी यही है — जो पल अभी है, वही सबसे वास्तविक है।
हमने बड़ी उपलब्धियों को खुशी का कारण मान लिया है। सोचते हैं कि जब सब कुछ ठीक हो जाएगा, तब मुस्कराएंगे। लेकिन जिंदगी का अनुभव कहता है कि सब कुछ ठीक होने का इंतजार करते-करते कई बार मुस्कराने के कारण ही खो जाते हैं।
तो आज खुद से पूछिए —
“आप पिछली बार कब मुस्कराये थे?”
यदि याद नहीं आ रहा, तो शायद समय आ गया है थोड़ी देर रुकने का… आसमान को देखने का, किसी अपने से बात करने का, किसी बच्चे की मासूमियत को महसूस करने का, या फिर बिना वजह खुद से मुस्करा लेने का।
क्योंकि कई बार मुस्कान किसी खुशी का परिणाम नहीं होती, बल्कि एक नई शुरुआत का पहला कदम होती है।
To The Point Shaad
– Saanjiv Shaad
The Mission: Positive Waves

