Home News Point प्रलेस हरियाणा का राज्य प्रतिनिधि सम्मेलन हुआ संपन्न डॉ. रामेश्वर दास अध्यक्ष, परमानंद शास्त्री वरिष्ठ उपाध्यक्ष व डॉ. हरविंदर सिंह सिरसा महासचिव निर्वाचित

प्रलेस हरियाणा का राज्य प्रतिनिधि सम्मेलन हुआ संपन्न डॉ. रामेश्वर दास अध्यक्ष, परमानंद शास्त्री वरिष्ठ उपाध्यक्ष व डॉ. हरविंदर सिंह सिरसा महासचिव निर्वाचित

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संघर्षशील व्यवहार हरियाणा की मुख्य सांस्कृतिक विरासत: अशोक गर्ग

आमजन को वैचारिक नेतृत्व प्रदान करना लेखकों का दायित्व: डॉ. सुखदेव सिंह सिरसा

सिरसा: 31 अगस्त:
अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) हरियाणा राज्य इकाई के कुरुक्षेत्र में संपन्न हुए राज्य प्रतिनिधि सम्मेलन में आगामी तीन वर्षों के लिए राज्य कार्यकारिणी का पुनर्गठन किया गया। नव-निर्वाचित कार्यकारिणी में डॉ. रामेश्वर दास को अध्यक्ष, परमानंद शास्त्री को वरिष्ठ उपाध्यक्ष व डॉ. हरविंदर सिंह सिरसा को महासचिव चुना गया। इनके अलावा डॉ. अनिल ख़्याल अत्री, भगवंत सिंह सेठी, राजिंदर कौर को उपाध्यक्ष; अरवेल सिंह विर्क, डॉ. कुलविंदर सिंह पदम, डॉ. करनैल चंद को सचिव; प्रो. गुरदेव सिंह देव, अनीश कुमार को वित्त सचिव; प्रो. एस जेड एच नक़वी, डॉ. अतुल यादव, डॉ. शेर चंद को संगठन सचिव; डॉ. गुरप्रीत सिंह सिंधरा, यादविंदर सिंह को प्रैस सचिव मनोनीत किए जाने के साथ कार्यकारिणी सदस्यों का भी मनोनयन किया गया। कार्यकारिणी सदस्यों में गुरतेज सिंह बराड़, रमेश शास्त्री, कृष्ण अवतार सूरी, डॉ. कुलदीप सिंह बारना, मुख्त्यार सिंह चट्ठा, डॉ. हरमीत कौर, डॉ. हरविंदर कौर, बलजीत कौर, गीता गीतांजलि, डॉ. मीना नवीन, प्रो. दिलराज सिंह, सुरेश बरनवाल, सरबजीत सिंह, डॉ. बलविंदर सिंह, अमनदीप सिंह, डॉ. जोगिंदर सिंह अंबाला, नरेश कुमार, विनोद कुमार एवं नवनीत सिंह रेणू को शामिल किया गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता अश्वनी बख़्शी क़ानूनी सलाहकार की ज़िम्मेवारी का निर्वहन करेंगे। सुरिंदर सिंह ओबरॉय, प्रो. अमृत लाल मदान, डॉ. रतन सिंह ढिल्लों, कॉ. स्वर्ण सिंह विर्क, डॉ. अशोक भाटिया एवं प्रो. हरभगवान चावला पर आधारित संरक्षणमंडल के साथ राज्य इकाई को और सशक्त एवं सुचारु बनाने हेतु डॉ. पाल कौर, डॉ. अमरजीत सिंह ‘अरपन’ एवं तनवीर जाफरी पर आधारित अध्यक्षमंडल का भी गठन किया गया है। वरिष्ठ सदस्यों सुरिंदर सिंह ओबरॉय, डॉ. रतन सिंह ढिल्लों, कॉ. स्वर्ण सिंह विर्क, डॉ. अशोक भाटिया, डॉ. पाल कौर व जनवादी लेखक संघ के प्रदेश अध्यक्ष जय पाल पर आधरित अध्यक्षमंडल की अध्यक्षता में संपन्न हुए इस सम्मेलन में प्रलेस के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. सुखदेव सिंह सिरसा ने मुख्य अतिथि व प्रलेस पंजाब इकाई के महासचिव डॉ. कुलदीप सिंह दीप ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर शिरकत की। सम्मेलन के प्रथम सत्र में ‘हरियाणा की बहुलवादी सांस्कृतिक विरासत एवं राष्ट्रीय चेतना’ पर आधारित विमर्श के अंतर्गत सेवानिवृत्त आईएएस अशोक गर्ग ने मुख्य वक्ता के तौर पर व्याख्यान की प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि हरियाणा की संस्कृति बहुरंगी है और संघर्षशील व्यवहार इसकी मुख्य पहचान है। इसलिए यहाँ सामंतवादी दबाव कभी हावी नहीं हो पाया। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि पाखंड विरोधी स्वभाव के कारण हरियाणा की संस्कृति धर्मभीरुता से काफ़ी हद तक मुक्त रही है। इस विमर्श को और विस्तार देते हुए प्रो. सुभाष सैनी ने कहा कि हरियाणा की संस्कृति मध्यकालीन भक्तिधारा के संतों से प्रभावित है। हरियाणा का क्षेत्र सूफ़ी परंपरा का प्रवेश द्वारा रहा है। बहुलतावाद का सम्मान यहाँ के व्यवहार का हिस्सा है। वर्तमान में इस बहुलतावादी प्रवृत्ति को तहस-नहस करने के लिए तरह-तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रो. सैनी ने आह्वान किया कि अपनी बहुलतावादी सांस्कृतिक विरासत को प्रचारित-प्रसारित करने हेतु सक्रिय रूप से संगठित प्रयास करना समय की अनिवार्यता है। इस विमर्श से संबंधित डॉ. सुखदेव सिंह सिरसा, डॉ. कुलदीप सिंह दीप, संत कुमार, सुरिंदर सिंह ओबरॉय, डॉ. रतन सिंह ढिल्लों, कॉ. स्वर्ण सिंह विर्क, राम मोहन रॉय, हरियाणा तर्कशील सोसायटी के गुरमीत सिंह, डॉ. जोगिंदर सिंह, डॉ. पाल कौर व जलेस राज्य अध्यक्ष जय पाल ने भी अपने विचार व्यक्त किए। मुख्य अतिथि के तौर पर अपने संबोधन में प्रलेस के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. सुखदेव सिंह सिरसा ने कहा कि लेखकों को अवाम को दरपेश चुनौतियों की पहचान करनी चाहिए। लेखक आम जन का पक्षधर होता है, सत्ता का चारण नहीं। उन्होंने कहा कि मानव समाज के व्यापक हित में वैचारिक नेतृत्व प्रदान करना लेखकों का दायित्व है। सम्मेलन के दौरान डॉ. रतन सिंह ढिल्लों द्वारा लिखित ‘क़ाज़ी हो गए रिश्वतखोर’, डॉ. अशोक भाटिया द्वारा लिखित ‘अंध विश्वास: रोग और ईलाज़’, अशोक गर्ग, मनोज छाबड़ा एवं राम कुमार जांगड़ा द्वारा संपादित ‘ज़हर जो हमने पीया’, राजेंद्र टोंकी द्वारा संकलित ‘स्वामी विवेकानंद के विचार’ व गुरदीप सिंह मुक़्दस्स द्वारा लिखित ‘ग़ुलामी’ पुस्तकों को लोकार्पित किया गया। यूनीक प्रकाशन की ओर से विकास साल्याण द्वारा लगाई गई पुस्तक एवं मूर्तिकला प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। कार्यक्रम का संचालन डॉ. हरविंदर सिंह सिरसा व प्रो. गुरदेव सिंह देव ने किया। सम्मेलन में प्रलेस व सम-वैचारिक बिरादराना संगठनों के सौ से अधिक प्रतिनिधियों ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज़ करवाई।

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