डॉ. हरविंदर सिंह सिरसा को मिला ‘हरिभजन सिंह रेणु स्मृति सम्मान’

रेणु की कविता में सत्ता के समक्ष तीखे प्रश्न उठाने की अदम्य क्षमता: कॉ. स्वर्ण सिंह विर्क

पुस्तक चर्चा एवं नारी कवि दरबार हुआ सफ़लतापूर्वक संपन्न

सिरसा: 7 सितंबर:
पंजाबी लेखक सभा, सिरसा द्वारा श्री युवक साहित्य सदन, सिरसा में आयोजित ‘पुस्तक चर्चा एवं नारी कवि दरबार’ कार्यकम सफ़लतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात लेखक एवं प्रबुद्ध चिंतक कॉमरेड स्वर्ण सिंह विर्क, पंजाबी लेखक सभा, सिरसा के अध्यक्ष परमानंद शास्त्री व पंजाबी साहित्य सभा, कालांवाली के अध्यक्ष भुपिंदर पन्नीवालिया पर आधारित अध्यक्षमंडल ने की। सेवानिवृत्त प्राचार्य अरवेल सिंह विर्क द्वारा सभी अतिथिगण एवं उपस्थितजन के स्वागत उपरान्त प्रथम सत्र में छिंदर कौर सिरसा के नव-प्रकाशित काव्य-संग्रह ‘यारड़िया’ का लोकार्पण किया गया। पंजाबी साहित्य अकाडमी, लुधियाना की उपाध्यक्ष एवं प्रगतिवादी चिंतक डॉ. अरविंदर कौर काकड़ा ने छिंदर कौर सिरसा के इस काव्य-संग्रह पर समीक्षा प्रस्तुत की। डॉ. अरविंदर कौर काकड़ा ने कहा कि इस संग्रह की अधिकतर कविताएं वैचारिक नज़रिए से आत्मनिरीक्षण की प्रवृत्ति को उजागर करते हुए अपने प्रियतम को संबोधित हैं। इनमें निजी अनुभव के पहलूओं को महत्व दिया गया है। ये कविताएं प्रेम को मानव जीवन की आंतरिक जटिलताओं, लालसा, दर्द और आध्यात्मिक खोज से जोड़ती हैं। इनमें प्रेम की पवित्रता, दर्द की बहुलता, आत्मनिरीक्षण की प्रवृत्ति और आध्यात्मिक प्रकाश की अनुभूति मौजूद है। लोक भाषा की सहजता, मुहावरेदार शैली, प्रतीक, बिंब और लोक-उन्मुख शब्दों का घनत्व इस कविता को एक विशिष्ट पहचान देते हैं।
दूसरे सत्र में पंजाबी लेखक सभा, सिरसा द्वारा स्थापित ‘हरिभजन सिंह रेणु स्मृति सम्मान’ प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय सचिवमंडल के सदस्य, प्रलेस हरियाणा के महासचिव एवं पंजाबी साहित्य अकाडमी, लुधियाना के प्रबंधकीय बोर्ड के सदस्य डॉ. हरविंदर सिंह सिरसा को प्रदान किया गया। प्रशस्तिपत्र का वाचन मुख्त्यार सिंह चट्ठा ने किया। इस अवसर पर कॉ. स्वर्ण सिंह विर्क ने डॉ. हरविंदर सिंह सिरसा की लेखन, शिक्षण एवं संगठनात्मक क्षेत्रों में प्रदत्त सेवाओं का उल्लेख करते हुए उनको इस प्रथम सम्मान से सम्मानित होने पर मुबारक़बाद प्रदान की। उन्होंने इस अवसर पर हरिभजन सिंह रेणु का स्मरण करते हुए कहा कि आधुनिक पंजाबी कविता के क्षेत्र में रेणु एक ऐसे प्रगतिशील कवि हैं जिन्होंने पंजाबी कविता को नए तेवर दिए हैं। एक ओर जहां उनके द्वारा सत्ता से पूछे गए सवालों की धार बहुत तीखी है, वहीं दूसरी ओर उनकी कविता में किसी झरने की कलकल का मधुर नाद भी है और फुहारों का भीगापन भी। उनकी कविता ऐसे आलोक-स्तंभ की तरह है जो पीढ़ियों तक पथ आलोकित करती रहेगी। इन सत्रों का संचालन पंजाबी लेखक सभा, सिरसा के सचिव सुरजीत सिरड़ी ने किया।
कार्यक्रम में तीसरे सत्र में नारी कवि दरबार का आयोजन किया गया जिसमें राष्ट्रीय ख़्यातिनाम पंजाबी कवयित्रियों डॉ. अरविंदर कौर काकड़ा, नरिंदर पाल कौर, कमल सेखों, डॉ. हरमीत कौर, छिंदर कौर सिरसा व कर्मजीत देओन ने सामाजिक सरोकारों से सराबोर भावपूर्ण कविताओं, ग़ज़लों और गीतों की ख़ूबसूरत प्रस्तुतियां दीं। इस सत्र का संचालन डॉ. हरमीत कौर ने किया। कार्यक्रम के दौरान प्रख्यात संगीतज्ञ राज वर्मा, वरिष्ठ रंगकर्मी संजीव शाद, सुमन कंबोज व मनजीत सिंह ने भी रोचक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। पंजाबी लेखक सभा, सिरसा के अध्यक्ष परमानंद शास्त्री ने सभी अतिथिगण व उपस्थितजन के प्रति तहेदिल से आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रो. हरभगवान चावला, डॉ. प्रेम कंबोज, रमेश शास्त्री, गुरतेज सिंह बराड़ एडवोकेट, जगदेव फौगाट, महल सिंह संधु, डॉ.शेर चंद, अनीश कुमार, सुशील पुरी, नवनीत सिंह रेणु, नवगीत सिंह रेणु, नवमीत सिंह रेणु, कॉ. गुरदीप सिंह, कॉ. जगरूप सिंह चौबुर्जा, कॉ. प्रितपाल सिंह सिद्धू, कॉ. हरजिंदर सिंह भंगु, कॉ. राज कुमार शेखुपुरिया, कॉ. सरबजीत सिंह सिद्धू , साथी सुरिंदर पाल सिंह, बलजीत बिट्टू मलिकपुरा, सुखदेव सिंह ढोट, करनैल सिंह असपाल, कुलवंत सिंह, लाजपुष्प, सुरेश बरनवाल, कृष्णा फौगाट, जसवंत कौर, बलविंदर कौर, डॉ. हरविंदर कौर, सुरिंदर कौर, चरनजीत कौर, तलविंदर कौर, राजदीप कौर, मनमीत कौर, ईशनजोत कौर, अर्चना, रिछपाल सिंह संधु, मनजीत सिंह, अशोक कंसल, रघुवीर सिंगला, गुरबाज सिंह, मनिंदर मिंटा इत्यादि सहित गणमान्य प्रबुद्धजन ने विशाल संख्या में अपनी उपस्थिति दर्ज़ करवाई।

