दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से 18 नवंबर से लेकर 22 नवंबर तक श्री माता वैष्णो मंदिर , वाटर वर्क्स रोड मंडी डबवाली में पाँच दिवसीय श्री राम कथा का आयोजन किया जा रहा है ।
कथा के प्रथम दिवस का शुभारंभ श्रीमती विनोद सिंगला,श्री अभय सिंगला और उनकी धर्मपत्नी तनु सिंगला, श्री ध्रुव सिंगला ने पूजन करके किया ।कथा के प्रथम दिवस में सर्व श्री आशतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री त्रिपदा भारती जी ने कहा मानव जीवन आत्मा और परमात्मा के मिलन का एक दुर्लभ अवसर है। लेकिन मननशील प्राणी होते हुए भी एक इंसान अपने जीवन के लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाता।क्योंकि वह जीवन के इस रहस्य से अपरिचित है यही हालात यही हालत हिमालय में हिमवान और मैना की थी। अपनी ही बेटी के रूप में साक्षात शक्ति तथा द्वार पर खड़े भगवान भोलेनाथ को वह पहचान नहीं पाए।लेकिन जब उनको नारद जी ने आकर वास्तविकता का बोध करवाया तो वह सत्य से परिचित हो पाए। मानव भी अपने भीतर बैठे परमात्मा को ना जानने से दुखी व अशांत है।लेकिन वह उसे तब तक नहीं जान सकता जब तक उसके जीवन में नारद रूपी गुरु का आगमन नहीं होता।क्योंकि यह सृष्टि का अटल नियम है जिसे भी परमात्मा रूपी रहस्य की पुष्टि हुई उसके जीवन में पहले पूर्ण गुरु का आगमन हुआ। समाज की स्तिथि पर प्रकाश डालते हुए साध्वी जी ने कहा कि समाज मानव मन की अभिव्यक्ति है ।जब-जब संतों के आदर्शों का परित्याग करते हुए मानव भोग वासना को ओर प्रवृत हुआ तब तब समाज रूपी यमुना विषाक्त होती गईं । जरूरत मन को प्रदूषण से मुक्त करने की है। जब मन का प्रदूषण समाप्त होगा तब बाहरी पर्यावरण स्वतः ही स्वच्छ हो जाएगा। इसके लिए जरूरत है बह्यज्ञान की जो मानसिक शुद्धता का सशक्त साधन है । हमें आवश्यकताओं और लालसाओं में भेद करना होगा । क्या हम आने वाली पीढ़ियों को ऐसी दुनिया देना चाहेंगें? जिसकी हवाओं में जहर घुला हो, जहाँ घूल , धुँअेंऔर बीमारियाँ आम बात हो , जहाँ सूख़ा और बाढ़ विनाश की सृष्टि करते हो ।संभवतः कोईं भी माता- पिता अपने बच्चों को ऐसी विभीषक दुनियां नहों देनाचाहेंगें। यदि हमें एक स्वच्छ एवं सुन्दर समाज का निर्माण करना है तो भारतीय संस्कृति जीवन दृष्टि को पुनर्जीवित करना होगा और उसे सक्रिय रूप से लागू करना होगा। इसी भारत भूमि के संतों ने हमें चेताया कि भूमि के सुखों को भोगो तो सही परन्तु त्यागपूर्वक , यदि त्यागपूर्वक नहीं भोगोगे तो भोगने की क्षामता और सामर्थ्य नहों रहेगा। संतों के बताए मार्ग पर चलना चाहिए।

कथा का समापन श्री तरसेम कुमार गर्ग(रिटायर्ड इन्शुरन्स ऑफिसर),श्री कश्मीरी लाल गर्ग(गर्ग स्वीट हाउस),श्री गोविंद राम शर्मा लखुआना से,एडवोकेट जेपी मिड्डा और उनकी धर्मपत्नी सुषमा मिड्डा,श्री प्रदीप कुमार गुप्ता और उनकी धर्मपत्नी,श्री नाथू राम बट्ठेवाले के परिवार से उनकी पुत्रवधू मंजू सिंगला और पूजा सिंगला, डिंपल सिंगला(प्रधान वैष्णो माता मंदिर),श्री पुरषोत्तम(कैशियर),श्री पवन कुमार(सेवक),श्री सोम प्रकाश(सेवक),श्री घनश्याम दास,श्री विजय मुंजाल,श्री व्लजोत(मीडिया से ),श्री बघेल गिरी(भगवा हिंदुस्तानी),श्री राज कुमार वधवा(नेकी दी हट्टी),श्री लवली वधवा, स्वामी ज्ञानेशानंद,स्वामी दामोदरानन्द द्वारा प्रभु की पावन आरती द्वारा किया गया ।


