Home News Point साहित्य, संगीत और संवेदनाओं से सजे समारोह में ‘सुहिरद’ का लोकार्पण -वरच्युस क्लब द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कलाकारों ने शानदार प्रस्तुतियों से किया मंत्रमुग्ध

साहित्य, संगीत और संवेदनाओं से सजे समारोह में ‘सुहिरद’ का लोकार्पण -वरच्युस क्लब द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कलाकारों ने शानदार प्रस्तुतियों से किया मंत्रमुग्ध

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त्रिवेणी शहर डबवाली में  वरच्युस क्लब  की साहित्यक दस्तक

क्लब का स्थायी प्रोजेक्ट ‘कला कुंज’ क्षेत्र में कला, साहित्य और संस्कृति को नई पहचान देने के लिए लगातार कार्य कर रहा है

डबवाली -शब्द जब संवेदनाओं से जुड़ते हैं तो वे केवल पन्नों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि दिलों में उतर जाते हैं। ऐसा ही भावनात्मक और यादगार दृश्य रविवार को नव प्रगति सीनियर सेकेंडरी स्कूल के सभागार में देखने को मिला, जहां वरच्युस क्लब द्वारा युवा लेखक रसदीप की पहली पुस्तक ‘सुहिरद’ का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। साहित्य, संगीत, शायरी और कला से सजे इस यादगार आयोजन ने उपस्थित लोगों को भावनाओं की दुनिया से रूबरू करवाया।

समारोह का शुभारंभ लेखक रसदीप की माता परमजीत कौर और पिता बलवीर सिंह ने मंच पर पुस्तक ‘सुहिरद’ का विमोचन करते हुए किया। तालियों की गूंज के बीच यह पल लेखक और उसके माता पिता के लिए गर्व से भरा हुआ था।

मुख्य वक्ता एवं प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. बलराज सिंह ने पुस्तक की समीक्षा करते हुए कहा कि ‘सुहिरद’ केवल एक साहित्यिक कृति नहीं, बल्कि टूटते रिश्तों और कम होती संवेदनाओं के दौर में इंसानियत को जिंदा रखने की सशक्त आवाज है। उन्होंने कहा कि रसदीप ने अपने शब्दों में प्रेम, अपनत्व, दर्द और रिश्तों की गहराई को इतनी सहजता से पिरोया है कि पाठक खुद को पुस्तक के हर पन्ने से जुड़ा हुआ महसूस करता है। उन्होंने कहा कि आज के भागदौड़ भरे समय में जहां लोग भावनाओं से दूर होते जा रहे हैं, वहां ‘सुहिरद’ जैसी पुस्तकें समाज को संवेदनशील बनाने का कार्य करती हैं। डॉ. बलराज सिंह ने इसे लेखक की 15 वर्षों की साहित्यिक साधना, अनुभव और भावनात्मक सोच का जीवंत प्रतिबिंब बताया।

अपने संबोधन में लेखक रसदीप ने कहा कि किताबें इंसान की सबसे सच्ची साथी होती हैं। इंसान जिन भावनाओं को दुनिया के सामने खुलकर नहीं कह पाता, उन्हें वह अपनी लेखनी के माध्यम से अभिव्यक्त करता है। उन्होंने कहा कि ‘सुहिरद’ उनके जीवन के अनुभवों, रिश्तों और उन एहसासों का आईना है जिन्हें उन्होंने शब्दों में ढालने का प्रयास किया है। कार्यक्रम के दौरान साहित्य और संगीत का ऐसा रंग बिखरा कि पूरा सभागार भावनाओं से सराबोर हो उठा। वंदना वाणी, बलकरण बल, वीर बसंत और रिश्पिंदर सिंह ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बठिंडा से पहुंचे बलकरण बल की गजलों ने जहां साहित्यिक गहराई का अहसास करवाया, वहीं कुरुक्षेत्र से आए चर्चित शायर दविंदर बीबी पुरिया ने अपने खास अंदाज से खूब वाहवाही बटोरी।शायर सुखम मनजीत ने कहा कि साहित्य समाज को दिशा देने का कार्य करता है। किताबें केवल पढ़ने के लिए नहीं होतीं, बल्कि वे इंसान को बेहतर सोच और सकारात्मक दृष्टिकोण भी देती हैं।

प्रो. अमित बहल और डॉ. वेद प्रकाश भारती व हरदीप ढिल्लो ने कहा कि जब युवा अपनी कलम के माध्यम से समाज को जोड़ने का प्रयास करता है तो वह देश की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करता है। ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देते हैं। कार्यक्रम का प्रभावशाली मंच संचालन प्रसिद्ध रंगकर्मी एवं एंकर संजीव शाद ने किया। नरेश शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया और क्लब संस्थापक केशव शर्मा का संदेश पढ़कर सुनाया। प्रबंधक समिति सदस्य परमजीत कोचर ने सभी अतिथियों और कलाकारों का धन्यवाद किया। वहीं चित्रकार शिवम द्वारा मंच पर बनाई गई लाइव पेंटिंग आकर्षण का केंद्र बनी रही। वरच्युस क्लब के पीआरओ भारत वधवा ने बताया कि क्लब का स्थायी प्रोजेक्ट ‘कला कुंज’ क्षेत्र में कला, साहित्य और संस्कृति को नई पहचान देने के लिए लगातार कार्य कर रहा है और स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में संवेदनशीलता, रचनात्मकता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का कार्य करते हैं। अंत में आयोजन समिति ने सभी अतिथियों, कलाकारों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर रिपुदमन शर्मा, रजनी मोंगा, शशिकांत शर्मा, चिमन लाल मिढा, सुरजीत मान, डॉ. विनय सेठी, कृष्ण कायत, तरसेम गर्ग, संतोष शर्मा, ज्ञान सिंह, वेद कालड़ा, एम.एल. ग्रोवर, सोनू बजाज, प्रणव ग्रोवर, मनोज शर्मा, राकेश सिंगला सहित बड़ी संख्या में साहित्य एवं कला प्रेमी तथा लेखक रसदीप के पारिवारिक सदस्य मौजूद रहे।

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