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ख्याल, ख्बाव….जज्बात

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सच लिखू तो मेरे पास बहुत से शब्द है मैं शब्दो को जोड़ जोड़ कर वाक्य लिख सकता हूँ   भाषण दे सकता हूँ  कविता बना सकता हूँ गीत सजा सकता हूँ…कहानियां लिख सकता हूँ
इतना कुछ मेरे पास है तो भी 
सिर्फ मौन हूँ 
कोई शब्द नही है 
बेबस है कलम 
जुबाँ शब्द अर्थ ….
और मेरे ख्याल मेरे ख्बाव जज्बात को किन्ही शब्दो की जरूरत नही …..
सिर्फ श्रदा ही मौन की भाषा है ये भी
जनता हूँ की मौन के अर्थो को लिखने के लिए 
मुझे कलम की जरूरत है जुबान की जरूरत है ताकि हिम्मत के साथ कुछ शब्द लिख सकू जिसके कोई अर्थ न हो सिर्फ श्रदा ही श्रदा हो अरदास ही अरदास हो
इसलिए  कुछ अनकहे अल्फाज
मेरी श्रदा में अरदास बन जाये ….
शायद मेरे मौन के अर्थ को समझने के लिए ……
इसलिए आज अभी इसी पल जितने भी शब्द मेने लिखे है वो भी कम है खमोश है लाचार है  बेबस है…..
मेने कितनी बार शब्द लिख कर मिटा दिए क्योकि सब मुझे झूठे लगते थे 
तभी तो इस वक्त मेरे शब्दकोश में कोई भी शब्द नही जिससे मै कुछ लिख सकू कुछ बना सकू …..
किसी  शब्दो का आकार दे सकू…
सिर्फ मौन……निशब्द सी प्राथना तुझे स्वीकार है
मेरे भाव मेरे प्रयास  मेरी कलम 
हर पल इक याद मेरी कविता  के लिए …@shaad

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