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घर लौट आओ

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तुम जहाँ कही भी हो
बस घर लौट आओ
क्योकि
ता उम्र सफर में  ही गुजरी है हम आपने शहर में होकर भी आपने घर में नही होते
घर और दर
आना ही पड़ता है
अक्सर मैं शाम को या देर रात को घर लौटता हूँ
और घर में होकर भी घर में नही होता
तब वो मेरे पास आती है और धीरे से कान में कहती है
तुम जहाँ कही भी
shaad सहाब बस घर लौट आओ……..
और आज सारा दिन घर पे हूँ उसके पास

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