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तुम मैं और दुनिया

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विचार
संस्कार
अहसास
मिलने से घर बनता है ।
तुम मेरी जिंदगी का वो इकलौता सच हो
जिसके लिए मैने सारी दुनिया से झूठ कहा…
झूठ
फरेब
धोखा
बे इंसाफ
मिलने से इक दुनिया बनती है
तुम मेरी जिंदगी का इकलौता ख्बाव हो
जिसके लिए मेने सारी दुनिया का
ख्याल छोड़ दिया ……
मौन
इंतज़ार
वक्त
डर
मिलने से प्रेम बनता है
तुम मेरी जिंदगी का पहला प्रेम महोबत हो इबादत हो
जिसके लिए मैंने दुनिया का
आखरी प्रेम छोड़ दिया …….
उम्मीद
सपना
भाव
मिलने से विशवास बनता है
तुम मेरी जिंदगी में पहले इंसान हो
जिसमे रब दीखता है कल मिलने आया खुद खुदा मेने तेरी खतिर उस से मिलना छोड़ दिया
कलम
शब्द
अर्थ
कागज
मिलने से इक  कविता बनती है
तुम मेरी जिंदगी की गजल हो
गीत हो तेरी खातिर
मैने सब किस्से कहानियाँ को छोड़ दिया
दिन
रात
भूख
प्यास
मिलने इक इक भटकाव बनता है
तुम मेरी जिंदगी की इक अनभुझ पहेली हो
जिसके लिए खुद को समझना छोड़ दिया
न रंग
न रूप
न आकार
मिलने से निरंकार बनता है
तुम मेरी जिंदगी के करम हो
और करम देख के करोगे फैसला
इसलिए मैंने  जात और औकात अपनी छोड़ दी

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