नाम : रघुराज सिंह कर्मयोगी
1.सेवानिवृत सहायक मंडल यांत्रिक
अभियंता प.म.रेलवे, कोटा राज.
2.अध्यक्ष, हिंदी साहित्य समिति, कोटा
3. महासचिव, भारत पेंशनर समाज कोटा.
जन्म : गांव आवल खेड़ा जिला आगरा उ. प्र.
जन्मतिथि : 9-8-1951
निवास : 10 59/B,3rd एवेनयू
आदर्श कॉलोनी,डडवाड़ा,कोटा,जं.
पिन 32002 राजसथान
मो. : 8003851458, 8118830886
ई-मेल :karmyogi [email protected]
प्रकाशन : तकनीकी पुस्तकें-
1.वैगन मेंटिनेंस टैक्नोलॉज,
2. पैसेंजर कोच मेंटिनेंस टेक्नोलॉजी,
3.डीजल लोको संचालन एवं सिद्धांत .
साहित्यिक :थाम लो तिरंगा (शौर्य गाथा),कहानी-संग्रह
-(मटकी भर पानी ,आज का एकलव्य,
सीता लौट आओ),पिघलते हिम शिखर
(उपन्यास ),शिक्षा ही धन है (बाल कहानी
संग्रह ),ओठों की थरथराहट(लघु कथा
संग्रह ),देहदान (नाटक संग्रह ),चंबल का
कलरव (निबंध संग्रह ),नीले आसमान की
परछाई (उपन्यास),सिसकतीआहटे(काव्य)
संपादन: 1. प्रयास पत्रिका रेलवे वर्कशॉप कोटा जं,
2. स्मारिका लज्जाराम मेहता,
3. स्मारिका श्रावणी तीज मेला कोटा.
विविध :1.देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में154
आलेख,कहानियां, नाटक, निबंध, बाल-
कथाएं आदि प्रकाशित.
2.दूरदर्शन केंद्र जयपुर मे चार बार कवि
गोष्ठियों में शिरकत की.
3.आकाशवाणी कोटा से 6 बार कविता
एवं कहानी कार्यक्रमों में भाग लिया.
पुरस्कार:1.वैगन मेंटिनेंस टैक्नोलॉजी पुस्तक हिन्दी
मैं लिखने पर रेल मंत्री महोदय द्वारा
7 अप्रैल 1999 को” लाल बहादुर शास्त्री
तकनीकी लेखन पुरस्कार” एवं ₹10000
से सम्मानित किया.
2. भारतेंदु समिति कोटा, राष्ट्रीय स्तर
की उपाधि’साहित्य श्री’ से वर्ष 2006 में
नवाज गया.
3. कहानी संग्रह “आज का एकलव्य”
मुंशी प्रेमचंद कथा साहित्य पुरस्कार
से रेल मंत्री महोदय ने 11 फरवरी
2014 को प्रदान किया.
4.वर्ष 2,000 2001 में प्रादेशिक
सेना के लिए टेबलाइड रेलवे वर्कशॉप
कोटा में बनाया गया .इस हेतु रक्षा
मंत्री द्वारा नई दिल्ली में पूरे समूह को
स्मृति चिन्ह दे कर सम्मानित किया.
इस कार्य में मैं भागीदार था.
5.साहित्य कला एवं संस्कृति संस्थान
हल्दीघाटी,नाथद्वारा मे 3 सितंबर
2017 को राष्ट्रीय कार्यक्रम में
प्रेमचंद कथा सम्मान प्राप्त किया.
6.श्रावणी तीज मेला कोटा मे
13 अगस्त 2016 को कोटा में
आयोजित हुआ, जिसमें कोटा
सांसद एवं वर्तमान मैं लोकसभा
अध्यक्ष श्री ओम बिरला जी ने
साहित्य साधना के लिए
पुरस्कृत किया.
7.”भारत रत्न पुरस्कार” मेरी कहानी
को साहित्य समर्था संस्थान जयपुर
में सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया. इसे
अखिल भारतीय डॉ.कुमूद
टिक्कू कहानी प्रतियोगिता
पुरस्कार-2017 से जयपुर में मिला.
8.रेलवे वर्कशॉप मैं 16 सितं.2017
को हिंदी दिवस समापन के अवसर
पर आयोजित कवि सम्मेलन में
राजभाषा सम्मान-2017 पुरस्कार
से नवाजा गया.
9.बिरला उत्तम सीमेंट प्रबंधन
संस्थान द्वारा 9 फरवरी 2017
को सारस्वत सम्मान से पुरस्कृत .
10.काव्य कलश संस्था द्वारा
12 अक्ट. 2014 को
साहित्यकार सम्मान दिया.
11.आर्यावर्त साहित्य समिति कोटा
ने “आर्यावर्त-रत्न 2011” देकर
सारस्वत सम्मान किया.
12.दीप ज्योति पत्रिका संस्थान
द्वारा 17 सितंबर 2017 को
अलवर में राष्ट्रीय कार्यक्रम मे
‘श्री लालचंद भंसाली स्मृति
पुरस्कार’ से सम्मानित किया.
13.बाल साहित्य संस्थान अल्मोड़ा
द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित
कार्यक्रम में बाल कहानी संग्रह
“शिक्षा ही धन है”के लिए10जून
2018 को “श्री कल्याण सिंह
बिष्ट स्मृति पुरस्कार” से
सम्मानित किया.
14.पत्रिका “रेल राजभाषा” ने मेरी
कहानी “अंगूठे की बलि ” को
9 .7.2012 को सर्वश्रेष्ठ कहानी
घोषित किया. पुरस्कार स्वरूप
₹700/- प्रदान किए,जो मेरे
लिए एक गौरव का विषय था.
15.पश्चिम मध्य रेलवे एंप्लाइज
यूनियन के राष्ट्रीय सहायक
महासचिव श्री मुकेश गालव द्वारा
एक भव्य समारोह में 21 अगस्त
2016 को “साहित्य भूषण” की
उपाधि से सम्मानित किया गया.
16. राजस्थान सरकार के स्वायत्तशासन
मंत्री श्री शांति धारीवाल जी द्वारा
डॉ बी.आर अंबेडकर की 127वी
जयंती के अवसर पर ‘सारस्वत
सम्मान दिया गया.
17.वैगन रिपेयर शॉप कोटा में
आयोजित संरक्षा, स्वच्छता अभियान
के अवसर पर वर्ष 2003 चल
वैजयंती शील्ड जीती.जो कि
एक रिकॉर्ड है.
18.पश्चिम मध्य रेलवे के महाप्रबंधक
द्वारा 15 सितंबर 2008 को
₹1000/- की राशि के साथ प्रशस्ति
पत्र देकर उत्कृष्ट साहित्य सेवा के
लिए सम्मानित किया.
19.राजस्धान विधानसभा अध्यक्ष
द्वारा 26 जनवरी 2003 को रजत
पदक, स्मृति, चिन्ह एवं प्रशस्ति
पत्र से सम्मानित.
20. राजस्थान सरकार के कृषि मंत्री
द्वारा 15 अगस्त 2014 को
सारस्वत सम्मान. रजत
पदक,प्रशस्ति पत्र, स्मृति
चिन्ह देकर सम्मानित किया.
21.भारतेंदु समिति कोटा द्वारा
भारतेंदु जी की हीरक जयंती
वर्ष 2001 को स्मृति चिन्ह
देकर सम्मानित किया .
22.अखिल भारतीय साहित्य
परिषद के संभागीय साहित्यकार
सम्मेलन मे परिषद द्वारा 2007 में
सम्मानित.
23.डॉ.विश्वेश्वरैया की जयंती केअवसर
पर कोटा के समस्तअभियंताओं
द्वारा अभिनंदन वर्ष 2001.
24. साहित्य समिति कोटा द्वारा
वर्ष 2000 में सारस्वत सम्मान
25.माल डिब्बा मरम्मत कारखाना
कोटा द्वारा प्रतिवर्षआयोजित
रेल सप्ताहो में 10 बार
प्रशस्ति पत्र मिले.
26.पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी
शिलांग,मेघालय में 25 मई
2019 को संपूर्ण जीवन की
उल्लेखनीय उपलब्धियों के
लिए शिखर सम्मान.
27.ज्ञान भारती संस्थान कोटा
द्वारा 15 सितंबर 2019 को
उत्कृष्ट साहित्य सेवाओं के
लिए सारस्वत सम्मान.
28.राजस्थान सरकार द्वारा
26 सितंबर 2019 को वरिष्ठ
नागरिक सम्मान कार्यक्रम में
“वयोश्री-2019″उपाधि से
नवाजा गया.
29.ब्रज लोक साहित्य,कला,
संस्कृति अकादमी फतेहाबाद
आगरा ने 14 जनवरी 2020
को “श्रेष्ठ साहित्य साधक”की
उपाधि से विभूषित किया.
30.कानपुर में 23 फरवरी2020
को डॉ में श्रीमती शिव देवी स्मृति
पुरस्कार से सम्मानित किया.
31.पश्चिम रेलवे की मासिक पत्रिका
रेल दर्पण और आरडीएसओ
लखनऊ की मासिक पत्रिका मानक
रश्मि, दोनों ने मेरे कृतित्व और व्यक्तित्व
पर आलेख प्रकाशित किए हैं.
32.कोरोना के ऑनलाइन समस्या पूर्ति
काव्य गोष्ठी में देश के कई राज्यों के
प्रसिद्ध कवियों ने हिस्सा लिया.इस
काव्य गोष्टी में मुझे संस्था द्वारा सम्मानित किया गया…….
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: कान की सुसकली
अरेरेरेsssरे, ……….किक धीरे से लगाओ ना. जैसे ही मैंने मोटरसाइकिल के पेडल पर पैर रखा एक पीड़ा युक्त स्वर सुनाई दिया. इधर सूर्यदेव माथे पर सिलवटें लिए दूर पेड़ों के झुरमुट से धीरे-धीरे ऊपर उठ रहे थे.
प्रतिदिन की भांति आज भी मैं योगा करके राम मंदिर के माधव भवन से निकला और सीढ़ियां उतरता हुआ मेरी अपनी प्यारी मोटरसाइकिल नैंसी के पास आकर खड़ा हो गया.नाश्ते के लिए मैं गरम-गरम प्याज की कचौड़ी और मिर्ची बड़ा लेकर शीघ्र घर पहुंचना चाहता था कि दर्दनाक स्वर सुनकर मेरा पैर उठा का उठा रह गया.
मैं चौका!नजर को इधर-उधर करके कौण दिया तो ऐसा कुछ नहीं लगा कि मेरा कोई मित्र या परिचित मुझसे बात करना चाहता है. सोचा कहीं मेरे मन का भ्रम तो नहीं. इसलिए मस्तिष्क को हल्का सा झटका दिया. मगर मन मानने को तैयार नहीं था. क्योंकि आवाज तो मैंने सुनी थी.नींद में होता तो भी मान लेता कि कहीं सपना तो नहीं देख रहा हूं.पुनः करंक मारने का मानस बना कर पेडल पर पैर रखा.मैं बोला- ‘कौन है भाई? सामने क्यों नहीं आते हो?
“सुना नहीं तुमने, मैं बोल रही हूं.तुम्हारी प्यारी मोटरसाइकिल नैंसी. मेरी आवाज भी भूल गए.दिन रात पीठ पर लदे रहते हो. फर्राटे मार कर कभी इधर कभी उधर दौड़ जाते हो.पीछे मुड़कर कभी नहीं देखते .क्या कभी तुमने मेरे बारे में सोचा है”?
“अच्छा, तो तुम हो. तभी तो मैं सोचू’, इतनी देर से कौन भाषण झाड़ रहा है?क्या कहना चाहती हो? मैं कृतघ्न नहीं हूं. मैंने कभी तुम्हें भूखे पेट रखा है?नहीं ना.पेट्रोल के दाम हनुमान की पूंछ की तरह बढ़ते जा रहे हैं. क्या कभी तुम्हारा पेट खाली नहीं रहने दिया?फिर भी मुझे कोस रही हो”.
“पता है,बिना घी के खिचड़ी भी स्वाद नहीं देती. आज मेरी तबीयत खराब है. तुम तो योगा करके फिट रहते हो.योग गुरु कान की सुसकली का उच्चारण करके कानों तक का व्यायाम करा देते हैं.पैर मिलाकर आगे पीछे,पैर मिलाकर दाएं-बाएंऔर सूर्य नमस्कार जैसे आसन रोजाना करते हो. मगर दुर्भाग्य!! मेरा स्पार्क प्लग खोल कर चेक तो करो. उस पर ढेर सारा कार्बन चढ़ गया है. चालू नहीं होती क्रोधित होने लगते हो.एक वर्ष से सर्विस तक नहीं कराई है. मेरे कान ऐंठ ऐंठ कर सिर्फ रेस बढ़ाने में लगे रहते हो”- नैंसी ने कहा तो मैं सन्न से रह गया.
मैंने हाथ लगाकर नैंसी को चैक किया. उसका शरीर ठंडा पड़ गया था. हिरनी जैसी नेत्रों वाली नैंसी की आंखों से गंगा-जमुना बह रही थी. उसे देखकर मेरा मन पसीज गया.
” पिछले हफ्ते ही तो तुम्हें मल मल कर नहलाया धुलाया था.स्नान के बाद जिस तरह षोडशी की काया चमकने लगती है, वैसी तुम चमक रही थी .अब नखरे छोड़ कर तैयार हो जाओ, ड्यूटी पर जाना है”.
“ना बाबा ना, मै तुम पर कतई विश्वास नहीं कर सकती. मोटे-मोटे 90-90 किलो के दोस्तों को बैठा लेते हो तो मेरी सांस गले में अटक जाती है”-नैंसी ने मुंह
बिचकाते हुए कहा और नजरें दूसरी ओर फेर ली. उसके मूड से लग रहा था जैसे वह अवकाश पर जाने वाली है.
“देखो, यह अनावश्यक बातें मुझसे मत करो. बकरी की तरह मिमियाना मुझे अच्छा नहीं लगता. उपचुनाव में जो रैली निकाली जाएगी, उसमें मुझे जाना है. अतः मुंह बंद करो और खुशी-खुशी चली चलो”-मैंने मनुहार करते हुए कहा. नैंसी के चेहरे पर चमक आ गई. रैली का जिक्र आते ही मैंने ऑफिस जाने का विचार त्याग दिया.
“तुम मेरे स्वामी हो या कसाई. जिस देश में पीपल, गाय और तुलसी को पूजा जाता है.गणेश जी की मूर्ति दूध पीने लग जाती है .उस देश में मेरी जैसी मोटर साइकिल की कोई इज्जत नहीं. सिर्फ काम से मतलब है.शंकर भगवान नंदी को,विष्णु जी गरूण को ढेर सारा प्यार करते हैं.इसलिए कभी भी भागने के बारे में सोचते तक नहीं हैं. वह फिर बोली-
” एक तुम हो कि कभी मेरी परवाह ही नहीं करते हो .जैसे मुझे तो कभी सर्दी जुकाम होता ही नहीं है .जहां तक रैली की बात है तो बाप रे बाप!! गति पर कोई नियंत्रण नहीं,चीं ची’ करके कब ब्रेक लगा दो,घर्र से कब एक्सीलेटर घुमा दो, पता ही नहीं चलता”.
“नैंसी, तेरा हाल तो आग जैसा हो गया है. आग जले तो धुआं दे बुझे तो धुआं दे”- मैंने कहा.
वह मुझे गंतव्य तक पहुंचाने का सुख देती है. उस पर बैठकर मैं कार से स्पर्धा करने लगता हूं उसे मैंने प्यार से सहलाया.नैंसी मेरे जीवन में उतनी ही महत्वपूर्ण हैं. जितनी एक धर्मपत्नी. यह मैं समझ चुका था.
उसकी जली कटी बातों को मैंने अनसुना कर दिया. कुछ देर बाद दिमाग का बोझ कम हुआ. मैंने नैंसी से वादा किया कि उसने जिन जिन बातों की मुझसे शिकायत की है, मैं उनका समाधान अवश्य करूगा. जिससे वह लंबे समय तक मेरा साथ दे सके.
बाल कहानी —
बिजली रानी मत कर नखरे.
बच्चों,एक दिन बिजली रानी की पानी, कोयलाऔर परमाणु के साथ बहस हो गई। बिजली का प्रयोग प्रायः हर घर और हर मशीन में होता है। इसलिए वह अपने आप को श्रेष्ठ समझती थी। वह भौंहों को वैष्णव आकार देते हुए बोली -“मैं तुम सबसे श्रेष्ठ हूं”।
“कोयला भैया मुझे गर्म करके भाप बनाता है।उससे तुम बनती हो। इसलिए कोयला और मैं श्रेष्ठ हैं”-‘पानी ने हिलोरें भरते हुए कहा।
“मैं, तुम सबसे अधिक ताकतवर हूं। मैं श्रेष्ठ हूं”– परमाणु ने अपना इलेक्ट्रॉन चक्र पूरा करते हुए कहा।
बिजली अपने आपको राजमाता से कम नहीं समझती थी ।अतः वह कोयला, परमाणु,सोलर बैटरी, प्राकृतिक गैस, पवन शक्ति आदि सभी पदार्थो से घृणा करती थी।उन्हें हेय दृष्टि से देखती थी।इन सब को बिजली का अपमानजनक व्यवहार सहन नहीं हो रहा था। उसका घमंड दूर करने के लिए उन्होंने एक मीटिंग बुलाई।सभी पदार्थों ने विस्तार से चर्चा की। वे सब इन तीनों की बातों से सहमत थे।
बैठक में सर्वसम्मति से बिजली रानी को सबक सिखाने का निर्णय लिया गया । साथ में उन्होंने इंसान को भी ले लिया। वे सब समूह में बिजली के घर पहुंचे। वहां जा कर पता चला कि बिजली क्रोध में भरी हुई अकड़ कर बैठी हुई है ।इंसान को देखते ही उस पर उबल पड़ी। कहने लगी–
“ए ए ए आदमी,तू भी इनके साथ है।मेरी वजह से बहुत आलसी हो गया है।”
“तेरा आविष्कार मैंने अपनी सुख-सुविधा के लिए किया है। केला छीलने के लिए नहीं। मैं आलसी नहीं हुआ हूं, देवी।जैसे भस्मासुर शंकर भगवान का वरदान पाकर वह उन के ऊपर हावी हो गया था। लगता है, तू उसी तरह का बर्ताव मेरे साथ कर रही है।”
” तू,मेरे कारण ही एसी. में बैठकर जीवन का आनंद ले रहा है।
“इसके लिए मैं आपका अभिनंदन करता हूं”।
” मैं,थोड़ी देर के लिए भी चली जाती हूं तो पृथ्वी पर त्राहि-त्राहि मच जाती है। तू मुझे स्पर्श करके बता, फिर देख मैंने तुझे छठी का दूध याद न दिला दिया तो कहना”।
इतना सुनते ही वहां उपस्थित सभी सदस्य सहम गए। इंसान ने बिजली का उपकार मानते हुए कहा–
“हां देवी, आप सच कह रही हैं।आप के कारण ही मानव आराम तलब हो गया है।आपके बिना वह जीवन की कल्पना नहीं कर सकता है। परंतु आज आपकी नाक पर क्रोध की मक्खी क्यों बैठी है “?..
“तुम, मेरी चोरी करते हो।पूरा बिल नहीं भरते हो”- बिजली चिल्लाती हुई बोली।
” बस इतनी सी बात। इतना क्रोध तो महारानी केकई को भी नहीं आया था। जितनी आप क्रोधित हो रही हैं। सामने देखिए यह परमाणु बैठा है।आपको इसकी शक्ति का अंदाजा है? यह चाहे तो पूरी दुनिया को तबाह कर सकता है। फिर भी वह शांत रहता है। इस का तुमसे कोई मुकाबला नहीं है”– पानी ने कहा। वह ठंडे दिमाग से बातचीत कर रहा था।
“राजमाता बिजली, आपका जन्म तो मेरी कोख से हुआ है। भ्राता कोयला अपनी आग से मुझे गर्म करते हैं।तब भाप बनती है।भाप टरबाइन घुमाती है और आपका जन्म होता है। यदि हम सब मिलकर इस प्रक्रिया को पूरा न करें तो आप इस इंद्रधनुषी संसार जिसमें हजारों तरह के रंग भरे हैं।उसे देख नहीं पाएंगी”-सोलर बैटरी ने मुस्कुराते हुए कहा।
परमाणु,कोयला और पवन शक्ति की हंसी छूट गई। बिजली का चेहरा फक पड़ गया। पानी ने फिर से डायलॉग मारा–
“हम सब मानते हैं कि आपकी उपस्थिति के कारण ही कल कारखाने,मशीने, हवाई जहाज, पंखा, रेल इंजन, कपड़े धोने की मशीन संचालित होते हैं। आप नहीं आती है तो इंसान गर्मी से पसीना पसीना हो जाता
है ।
परंतु सामने देख,यह जो नैफथा खड़ा है। इसे जला कर पानी गर्म न किया जाय तो टरबाइन ही नहीं चल पाएगा।आप पैदा ही नहीं होंगी ।आपका सारा घमंड चूर-चूर हो जाएगा,समझी”- प्राकृतिक गैस ने कहा। वह काफी देर से उनकी चर्चा सुन रही थी ।
” बच्चो, पता है तुम्हें इसके बाद क्या हुआ”?
” क्या हुआ अंकल”?- बच्चों ने सामूहिक स्वर में जोर से कहा। उनकी आवाज पूरे कक्ष में गूंज गई।
वहां उपस्थित सभी मित्रों की बातें सुनकर बिजली का सारा घमंड पिघल गया। वह समझ गई कि इनके बिना उसका कोई अस्तित्व नहीं है।इसके बाद आंखों के आंसू बाहर निकल आए।जो गालों की यात्रा करते हुए पृथ्वी पर गिर रहे थे।
उसको देखकर वहां उपस्थित इंसान अपने स्थान पर खड़ा हुआ।उसने प्यार से बिजली के सिर पर हाथ फेरा तो वह सुबक सुबक कर रोने लगी, बोली–
” आप सभी का मैं अभिनंदन करती हूं।मैं समझ गई कि आप सभी बहन भाइयों, मां समान आदरणीयो’ के बिना मेरा उत्पादन संभव नहीं हैं। वह चाहे मित्र पानी हो या फिर भाई परमाणु, कोयला या सोलर बैटरी।सभी के संयुक्त प्रयासों से ही मेरा निर्माण होता है।मैं अपने अभिमान पर क्षमा चाहती हूं।
निवेदन करती हूं कि आप सभी उसी तरह मुझे सहयोग देते रहेंगे जैसे कि अब तक दिया है”।इसके बाद परमाणु ने बिजली रानी के आंसुओं को रुमाल से पोंछा।सभी ने उसके हाथ उठा कर हिप-हिप हुर्रे कहा और खुशी खुशी अपने अपने कार्य में जुट गए।
बचपन
चांद सितारे सब ले लो,मेरा बचपन लौटा दो.
धन दौलत सोना ले लो,मेरा बचपन लौटा दो 1
दूध निकाले थी जब मैया,
शान्त भाव से खडी थी गैया।
एक ओर से मैं पीता था ,
दूसरे थन बछिया का भैया
ताया,ताई,बुआ,दादी, रिश्तो की तुरपन लौटा दो.
चांद सितारे सब ले लो, मेरा बचपन लौटा दो. 2
केले के पत्ते पर रख कर,
गरम-गरम गुड़ खाते थे.
आगे-पीछे बैठ साइकिल ,
पापा संग हाट जाते थे.
छुक छुक इंजन,गुल्ली डंडा, अपनापन लौटा दो. चांद सितारे सब ले लो, मेरा बचपन लौटा दो. 3
शीतल छांह आम बरगद की ,
छुपा छुपैया खेला करते.
तब न किसी पर मोबाइल था,
चंगा पौ सतमौला करते.
चुगली करने लगी हवाएं, परिवर्तन लौटा दो.
चांद सितारे सब ले लो,मेरा बचपन लौटा दो. 4
भैया भाभी और सटगोटे,
रूठे और मनाते थे
लंगडी चाल ,बर्फ के गोले,
चूस चूस कर खाते थे
कोरोना सा ताप नहीं था,पावस का सावन लौटा दो.
चांद सितारे सब ले लो, मेरा बचपन लौटा दो. 5
अदधा,पव्वा और पहाडे
ठंड में आग जलाते थे.
कंचा कंची और कबड्डी,
खुले में रोज नहाते थे.
लडते और दोस्ती करते,फूलों सा बचपन लौटा दो. .
चांद सितारे सब ले लो,मेरा बचपन लौटा दो. 6
पर्यावरण पर विशेष रचना
र
भैया कोटा,
राखी बांधती हुई,
बहन चंबल से इतराते हुए,
रक्षाबंधन पर बोला-
मांग लो बहना,
क्या चाहिए तुम्हें?
चंबल चौंकी और सकुचाई।
भरे हुए गले से बोली-
भैया हम जानते हैं कि आजकल,
तुम्हारे पास बहुत सारी धन दौलत है।
,नरम नरम गददो पर,
एसी की हवा में,
चैन से सोते हो।
हमें नहीं चाहिए,
तुम्हारा सोना चांदी।
सिर्फ एक वचन दे दो।
मगर सोच लो,
उसका तुम्हें पालन करना होगा।
क्योंकि,मुकर जाना ही तुम्हारी नियति है।
बचन दो कि तुम्हारे बेटे
मेरी स्वच्छ जलधारा में,
उद्योगों का गंदा पानी नहीं डालेंगे।
उपहार की वह राशि ,
जो आप हमें देना चाहते हो,
उससे गंदे नालों के अंतिम छोरों पर,
जल शोधक संयंत्र अवश्य लगवा देना।
और तुम जो टनो’ धुआं निगल जाते हो,
अपना उपचार करवा लेना।
रिमझिम रिमझिम पड़े फुहारे’।
रिमझिम रिमझिम पड़ें फुहारै।
रिमझिम रिमझिम पड़े फुहारै । …1
रिमझिम रिमझिम पड़ें फुहारै,
बदरा आए कारे कारे।
प्रियतम का संदेशा लाऔ,
बिरहन बोली जा रे जा रे।
रिमझिम रिमझिम पड़ें फुहारै।
रिमझिम रिमझिम पड़ें फुहारै……2
निंदिया लौट जात अंखियन सो’,
आंसू झरि रहे मोटे बारे ।
बिटिया रोवे दिन औ रैना,
बिटुआ सिसकै घर के द्वारे।
रिमझिम रिमझिम पड़ें फुआरे।
रिमझिम रिमझिम पड़े फुहारै।….3
कोयल की मीठी बोली भी,
अंगारे बरसाती है।
बंजमारे पपिहा की पी पी,
छतियन शूल चुभाती है।
रिमझिम रिमझिम पड़ें फुहारै।
रिमझिम रिमझिम पड़ें फुहारै।…4
कलियों ने घूंघट खोला है,
ताल तलैया सारे सारे।
पावस बैरिन घुमड़ घुमड़ कर,
तन मदनावै आ रे आ रे।
रिमझिम रिमझिम पड़ें फुहारै ।
रिमझिम रिमझिम पड़ें फुहारै….5
“पिंजरे का पंछी”
हे दीन दयाला,सर्वेश्वर, मैं पिंजरे का पंछी.
क्या करूं, कित जाऊं,मैं तो पिंजरे का पंछी.—-1
एक तरफ घरवाली डांटे,करबट लू’ तो मच्छर काटे.
नागपाश सा कोविड भैया, छूबत ही काई सी फाटे. संबंधों में पड़ी दरारें, पिंजरे का पंछी.
क्या करूं,कित जाऊं,मैं तो पिंजरे का पंछी,—-2
खड़ी फसल पर ओले पाड़े,पीले हाथ सुता ना होंगे.
आंगनबाड़ी चंदनबाड़ी, तितली भंवरे अब ना होंगे.
हे जगदीशवर आस तुम्हारी, पिंजरे का पंछी.
क्या करूं,कित जाऊं, मैं तो पिंजरे का पंछी.——3
पृथ्वी पर गंगा ले आए,भागीरथ ने पुण्य कमाया.
सोने का पीला रंग महंगा,चांदी गई हाथ से भाया.
नदियों का कलरव खलता है,पिंजरे का पंछी..
क्या करूं, कित जाऊं,मैं तो पिंजरे का पंछी.—-4
मम्मी-डैडी का बटवारा, भैया-भाभी रोज कराते,
कालीनों पर चलने वाले,रोज-रोज नफरत फैलाते.
पूरा कश्मीर हमारा, लेंगे, पिंजरे का पंछी.
क्या करूं,कित जाऊं,में तो पिंजरे का पंछी.–5
कविता- एक प्यादा मात देगा…….
छीना तुझसे देश बंगला,खाक क्या कश्मीर लेगा,
ढाई घर तू चल रहा है, एक प्यादा मात देगा.
घास खाकर युद्ध करने,की कसम खाई हजारों,
परमाणुओं से कब डरे,हम हर सिपाही लात देगा. 1
35ए और 370 पर था, पगले तुझे गुमान,
मिटा दिया,मोदी उसको,टूटा नहीं आसमान.
भारत भूमि पर यदि तू,गलती से भी आया,
इतने छेद करें भेजे में,पीओके थाली में देगा. 2
करले कितने ही परीक्षण,हत्फ औ शाहीन के,
भाड़े के हथियार लेता , सकल पुर्जे चीन के,
गौरी गजनवी के प्रहारों से,तनिक चिंतित नहीं हम.
ब्रह्मोस ही पर्याप्त है,अब्दाली कब तक साथ देगा. 3
मान करते हम रहे हैं ,भाइयों सा पाक दुर्जन,
हम अहिंसा के पुजारी,भावनाओं से तू निर्धन.
सब्र का तटबंध छिद्रित , कब्र तेरी खो देगा,
तप्त सीमा,अटल सैनिक,घात को प्रतिघात देगा 4
ये धरा है राम की, मिर्जा गालिब सूर की,
धर्म की तकरीर देकर,मित्रता भी चूर की.
कारगिल में कुचला तुझको,लाहौर से भी भाग लेगा,
घुसपैठ करना छोड़ वरना, सिंध को भी बांट लेगा 5
शांत ठंडी वादियों को ,रक्तरंजित रोज करता, रे इमरान तू डर खुदा से,नित नए षड्यंत्र रचता.
प्रीति का संगीत ही , तुझको नई सौगात देगा.
अन्यथा मिट जाएगा , तेरी बता औकात देगा. 6
रघुराज सिंह “कर्मयोगी’
पता 1059/B 3rd एवेन्यू, आiदर्श कॉलोनी, डडवाड़ा, कोटा जंक्शन. 324002
Mo.-8118830886 नोट -यह रचना अप्रकाशित एवं मौलिक है



Rakesh jain
June 19, 2020 at 9:21 am
वाह!बहुत खूब ?
Rakesh jain
June 19, 2020 at 9:21 am
वाह!बहुत खूब ?