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गरीब है हम…

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“चुनावी तड़का”
कितने हिस्सों में बाँट देता है ।।
क्योकि
आओ लोगो ख़ैर माँगे धरती की
आया है आजकल
तूफान सियासतदानो का
हमारे मुख पे हम को कहते है गरीब
माँगते खुद है देखो यारो
कमाल सियासतदानो का
जितनी देर चुनाव बाबा होता नहीं
बस उतनी देर का ही है रिश्ता
हम से सियासतदानो का।
हम है भोले पंछी आखिर उलझ जायेगे
दिखता नहीं आपनी आँखों के आगे जो
बिछाया जाल सियासतदानो का।

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“चुनावी तड़का”
कितने हिस्सों में बाँट देता है ।।
क्योकि
आओ लोगो ख़ैर माँगे धरती की
आया है आजकल
तूफान सियासतदानो का
हमारे मुख पे हम को कहते है गरीब
माँगते खुद है देखो यारो
कमाल सियासतदानो का
जितनी देर चुनाव बाबा होता नहीं
बस उतनी देर का ही है रिश्ता
हम से सियासतदानो का।
हम है भोले पंछी आखिर उलझ जायेगे
दिखता नहीं आपनी आँखों के आगे जो
बिछाया जाल सियासतदानो का।

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