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नफरत की दुनिया को छोड़ कर प्यार की दुनिया मे खुश रहना…

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बहुत वर्ष पुरानी एक फ़िल्म याद आ गई हाथी मेरे साथी जिसमे उस दौर के सुपर स्टार स्व राजेश खन्ना साहब एक गीत गाते है “नफरत की दुनिया को छोड़ कर प्यार की दुनिया मे खुश रहना मेरे यार….” नफरत प्रेम इस संसार मे रहा है जीयो ओर जीने दो का मूल मंत्र है इस देश की प्रचीन जीवन शैली का । हथनी के पेट मे बच्चा ओर इतनी बड़ी हरकत महज शरारत नही बल्कि घटिया मानसिक सोच का नतीजा है मानव का राज करने का नाश ओर सिर्फ जनवरो को मनोरजन का साधन बन देना मजाक मात्र नही बल्कि चितन ओर चिन्तन का विषय है दयाभाव रखने वाले लोग आज उस दरिन्दे को कोस रहे है और जीव की हत्या का पाप की सुर्खियां सोशल मीडिया में पढ़ने को मिल रही है। जीने का हक सब को है सिर्फ ये धरा मानव जाति के लिए नही बल्कि उन जीव जन्तुओं के लिए भी है। जो कुदरत के विकास में अपना हिस्सा डालते है हथनी के पेट मे वो बच्चा जिसने इसी रूप ने कुदरत का नज़ारा लेना था। उसके बारे में नही सोचा गया कुदरत ओर जीवन के बीच मे वन्यजीव बहुत बड़ी भूमिका निभाते है। आओ बे जुबान जीवो के प्रति दयाभाव रखे इंसान ने अपनी मानसिकता तो जंगल खत्म कर के दिखा दी है ये आजाद परिदे मर रहे है । जिसका भुगतान मानवजाति को ही भरना होगा। वर्तमान में कैद इंसान ये दीवार पर लिखी इबारत को नही समझ रहा तो आनी वाली नस्ले इस कर्ज को चुकायेगी बे जुबान असहाय के दिल की पीड़ा बहुत बड़ी सजा देती है और मानव को मिल भी रही है सिर्फ पैसा ही नही होता सब कुछ बिना पैसे के कुदरत भी बहुत कुछ देती है  अब भी बहुत कुछ बचाया जा सकता है समझा और समझाया जा सकता है नही तो जब आखरी नदी सुख जाएगी आखरी मछली मर जाएगी  आखरी पेड़ गिर जाएगा तो जेब मे पड़ा रुपया किसी काम नही आएगा …

○ज़िन्दगी जीने का अधिकार सब को है तभी ज़िन्दगी ज़िंदाबाद है :-sanjiv shaad

2 Comments

  1. Meenakshi Ahuja

    June 4, 2020 at 7:09 am

    हथनी के कातिल को सज़ा मिलनी चाहिए। आज मानवता फिर शर्मसार है।

    Reply

  2. Meenakshi Ahuja

    June 4, 2020 at 7:09 am

    हथनी के कातिल को सज़ा मिलनी चाहिए। आज मानवता फिर शर्मसार है।

    Reply

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