मैं तो छोटा सा …..दरिया हूँ
मौज में हूँ
रोज में हूँ
खोज में हूँ
इसी
पल में हूँ
साक्षी
हूँ
वर्तमान में हूँ
बह रहा हूँ
शुक्र है
मैं
समुंदर नही
क्योकि वो
बड़ा हो कर भी ……मेरी तरह वो बह नही सकता…
बस
तड़फता रहता है .
किनारों पे सिर पटकता रहता है………….shaad

