Home updates रास्ते ज़िन्दगी के

रास्ते ज़िन्दगी के

1 second read
0
0
7

मैं
ख़याल
से ख्बाव और फिर
मन
के सवाल
और जबाव सिर्फ खंजर
पैर खानाबदोश
दिल में उम्मीद
जिंदगी पे रोना
और मौत पे हँसना 
कुछ अनकहे अल्फाज
सफेद कागज
मुक्ति का गीत
जन्म की कमान से निकला हुआ तीर
घरती पे अग्नि की चादर
और जलती हुई जीवन की कथा
जो तुम नही समझ सकते और मैं
लिख नही सकता  ……
आपने कन्धों पे
आपने ही सिर का भार
ढो रहा हूँ
आपने आप को खुद इक
मजदूर बना कर
बस वो जंग
जो खुद के भीतर है
कितने हिस्सों में अलग थलग
मैं उसका इक नाम हूँ
जनाब………
हाज़िर होकर भी गैरहाजिर
दिखने वाला …..मैं
तुम
जैसा ही
मुक्कमल
इंसान हूँ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

खेलकूद से पैदा होती है अनुशासन की भावना: डा. संदीप गोयल

जीएनसी सिरसा में नैशनल स्पोर्ट्स डे पर हुआ आयोजन सिरसा: 29 अगस्त: व्यक्तित्व के सर्वांगीण …