आज के दिन
उनमे कोई मेरा अपना नहीं था
किसी के साथ खून का रिश्ता नहीं था
टपके थे आंसू जिनके लिए कांप गया था दिल
इसलिए
शायद इंसानियत श्रदा और विशवास के रिश्ते सब रिश्तो से बड़े होते और जिंदा होते है पक्के होते है इसलिए आज भी सम्मान है नमन है उन रिश्तो को जिन रिश्तो को जाति धर्म समाज ने नहीं बल्कि मानवता ने अपने गर्भ से जन्म दिया ——-आज के दिन
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