थोड़ा
ढंग से
रहो
थोड़ा
सलीक़े से चलो
थोड़ा
ध्यान से खाओ
थोड़ा
ध्यान से उठो-बैठो
थोड़ा
तहज़ीब से हँसो -बोलो
बचपन से
यही तो सुनती आईं हैं
लड़कियाँ
इस ‘थोड़ा -थोड़ा ‘ने ही
नहीं दिया कभी उन्हें
ज़्यादा सोचना
इसीलिए
ज़्यादा की माँग न कर
थोड़े से ही गुज़ारा
करती आईं है
लड़कियाँ
….बस तुम भी
उन्हें उनके हिस्से का
आकाश दे दोचाहे
थोड़ा सा ही….
शमिन्द्र कौर
ज़रा सोचें.….
ज़िन्दगी ठहरी है कुछ पल,
सुस्ता रही है, रुकी नहीं है!
चलेगी फिर उन्ही राहों पर,
ढूंढेगी मंज़िल, थकी नहीं है!
है देर सूरज निकलने में,
रात लंबी है मगर, सवेरा होगा जरूर!
जी लो अंधेरे लम्हों को भी,
साथ अपनों के, हर मुश्किल होगी दूर!
क़वारन्टाईन टाइम मिला है इसलिए,
कि समझ सकें खुद को भी !!
तरस रहे थे रहने को साथ साथ,
आज गले मिलें घर को भी!!
योग करें या मैडिटेशन,
बुक्स पढ़ें या खेलें ताश!
देखें टी वी या पौधे पालें ,
खुद को बस करें तलाश!!
नीलम अरोड़ा
कल्पनाओं के पंख लिए
खुले आकाश में
निर्बाध:
उडता हुआ मन
भर लेता हे
उसका विस्तार
अपनी
नन्ही हथेलियों में;
-तो कभी-
समेट लेता हे
यादों के
झरनों से
छु-कर निकलती
शीतल हवाओं
को
अपने आचंल में
कभी
लड आता हे
प्रारब्ध से
अपनी
‘स्वायतत्ता’
के लिए
योद्दा-सा
तो कभी
शान्त
हो जाता है
झील-सा।
जेसे ‘जी’ आया हो
एक पूरा युग
बस
कुछ ही
क्षणों में।
-अंजु मोंगा
ग़ज़ल-
मत सोचना कि बुर्ज़ से टूटा हुआ हूँ मैं
बस वक्त ही के भार से आधा हुआ हूँ मैं
कनवास पर सदायें मुसव्विर मुझे न दे
अंदर के रंगो-शोर से बहरा हुआ हूँ मैं
गैरों की चालों से तो कोई राब्ता नहीं
अपनों की आहटों से ही चौंका हुआ हूँ मैं
हालात यूँ हैं खेलते और देखते इधर
हाथों में जैसे गेंद का टप्पा हुआ हूँ मैं
रहबर किसी का मैं बनूँ मुमकिन अभी न ‘रीत’
अपनी तलाश में अभी खोया हुआ हूँ मैं
©परमजीत कौर ‘रीत’



Meenakshi Ahuja
May 25, 2020 at 6:02 pm
शानदार रचनायें। सभी को बधाई।
Meenakshi Ahuja
May 25, 2020 at 6:02 pm
शानदार रचनायें। सभी को बधाई।
Reet Mukatsari
May 26, 2020 at 1:11 am
सभी सुंदर,समसामयिक रचनाएं।
ग़ज़ल प्रकाशित करने के लिए काव्यकुंज टीम का आभार ।
Reet Mukatsari
May 26, 2020 at 1:11 am
सभी सुंदर,समसामयिक रचनाएं।
ग़ज़ल प्रकाशित करने के लिए काव्यकुंज टीम का आभार ।
Priyanshu Ansh Babu
May 26, 2020 at 2:15 pm
उम्दा…
यूँ तो सभी रचनाएं अच्छी हैं और आखिर में वो ग़ज़ल भी।
@AnshBabu86
Priyanshu Ansh Babu
May 26, 2020 at 2:15 pm
उम्दा…
यूँ तो सभी रचनाएं अच्छी हैं और आखिर में वो ग़ज़ल भी।
@AnshBabu86
Priyanshu Ansh Babu
May 26, 2020 at 2:16 pm
इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.
Priyanshu Ansh Babu
May 26, 2020 at 2:16 pm
इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.