Home updates युद्ध

युद्ध

8 second read
0
0
2
#युद्ध का 11वा दिन
शंखनाद हो चुका है पुराने जमाने मे युद्ध सूरज ढलने के साथ रुक जाते थे आमने सामने होते थे सीधे होते थे दुश्मन सामने होता था यानी युद्ध के नियम होते थे लेकिन वर्तमान दौर में युद्ध  बदल गए है दुश्मन छुप कर वार करता है या किसी का कन्धा होता है निशाने पर कोई आम जनमानस को तो पता ही नही चलता कब वो शिकार हो गया है लेकिन जिन लोगो की चेतना जगती है वो अपनी समस्याओं का समाधान निकल लेते है 
“#यहां इंसान हर पल हादसा होने से डरता है 
खिलौना है जो माटी का फ़ना होने से डरता है 
मेरे दिल के किसी कोने में इक मासूम सा बच्चा 
बड़ो की देख कर दुनिया बड़ा होने से डरता है 
ना बस में ज़िंदगी इसके ना काबू मौत पे इसका 
मगर इंसान फ़िर भी कब खुदा होने से डरता है 
अजब ये ज़िंदगी की क़ैद है दुनिया का हर इंसान 
रिहाई माँगता है और रिहा होने से डरता #है”
यर परीक्षा की घड़ी है संयम का वक्त है सीखने को इतिहास है समझने को वर्तमान है जिससे भविष्य का रास्ता खुलेगा जीत उसी की होती है जो गिर कर दोबारा उठता है घर पर रहो और समाज के प्रति खुद के प्रति अपनी भूमिका को निर्णायक मौड़ दे और युद्ध लड़े डरे नही आओ पूरा जीवन जीये ओर किसी का सहारा बने 
ज़िन्दगी ज़िंदाबाद।।
Sanjivv Shaad

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

खेलकूद से पैदा होती है अनुशासन की भावना: डा. संदीप गोयल

जीएनसी सिरसा में नैशनल स्पोर्ट्स डे पर हुआ आयोजन सिरसा: 29 अगस्त: व्यक्तित्व के सर्वांगीण …