गुरु नानक कॉलेज किलियांवाली गुरु नानक सोसायटी, डबवाली द्वारा संचालित की जा रही शिक्षण संस्था है, जो कि राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 9{ड़बवाली से मलोट} पर स्थित है एवं पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के साथ संबद्ध इस इलाके का प्रथम शिक्षा संस्थान है। आज से लगभग 64 वर्ष पहले 1956 में इस क्षेत्र के बुद्धिजीवी लोगों ने यहां शिक्षा संस्था बनाने का बीड़ा उठाया व उन्होंने अपनी अग्रणी भूमिका निभाई । उस समय शिक्षा के प्रकाश को फैलाने के लिए सरदार गुरराज सिंह ढिल्लो( MP साहब),बाबू नानकचंद अग्रवाल, सः प्रकाश सिंह बादल, आसपास के गांवों एवं डबवाली शहर आदि से अग्रणी बुद्धिजीवी लोगों ने एक-एक पैसा इकट्ठा करके इस शिक्षा की मशाल को रोशन किया।
1956 से स्थापित शिक्षा की मशाल के रूप में खड़ा हमारा यह महान गुरु नानक कॉलेज किलियांवाली जो उस समय इस क्षेत्र की एकमात्र शिक्षा संस्था थी, अभी तक अपने आप में अद्वितीय इतिहास को समेटे हुए है उस समय से लेकर आज तक यहां पंजाब,हरियाणा,राजस्थान की त्रिवेणी के विद्यार्थी पढ़ने के लिए आते रहे हैं ।
जब इस पिछड़े इलाके में शिक्षा की कोई मशाल नहीं जल रही थी उस समय हमारे इस महान संस्थान ने इस पिछड़े हुए इलाके में शैक्षणिक जागृति की ज्योत जलाई। पिछले लगभग साढ़े 6 दशकों में यहां से हजारों विद्यार्थी आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस निकायों में शिक्षा लेकर अलग-अलग उच्च पदवियों पर पहुंचे हुए हैं जिससे केवल उनका और उनके परिवार का ही नहीं बल्कि इस शिक्षा संस्थान का नाम भी रोशन हुआ है ।
16 मार्च 1956 को महाराजा यादविंदर सिंह ने कॉलेज का नींव पत्थर रखा तब लोगों का बहुत भारी इकट्ठ हुआ था। 7 अक्टूबर 1957 को ज्ञानी करतार सिंह, माल मंत्री पंजाब ने कालेज के स्विमिंग पूल का नींव पत्थर रखा व उन्होंने इसके निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की ।समय समय पर मंत्री और सरकारी अफसर इस कॉलेज में आते रहे जिनमें से जस्टिस गुरनाम सिंह मुख्यमंत्री पंजाब ,सरदार ज्ञान सिंह राड़े वाला बिजली मंत्री पंजाब ,सरदार सतनाम सिंह बाजवा ,सरदार सुरजीत सिंह बरनाला, सरदार सुखबीर सिंह बादल, मनप्रीत सिंह बादल आदि भी इस शिक्षा संस्थान में आए । 14 मार्च 1970 को श्री एम एम चौधरी गवर्नर पंजाब कॉलेज की कॉन्वोकेशन के मौके पर मुख्य अतिथि के रुप में यहां पधारे व उन्होंने टीचर्स हॉस्टल का उद्घाटन किया। 1979 में श्री जय सुख लाल हाथी गवर्नर पंजाब भी कॉलेज के डिग्री वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में आए ।अलग-अलग धार्मिक व्यक्तित्व जैसे नामधारी गुरु जगजीत सिंह और संत हरचंद सिंह लोंगोवाल भी दो बार कॉलेज में आए। सरदार प्रकाश सिंह बादल मुख्यमंत्री बनने के पश्चात भी कॉलेज में समय समय पर कई समारोहों में मुख्य अतिथि के रुप में आते रहे ।उनकी सरपरस्ती के कारण ही कॉलेज अपनी मंजिलों की तरफ दिन प्रतिदिन आगे बढ़ रहा है।
कॉलेज की भौगोलिक स्थिति यह रही कि जब यह कॉलेज बना उस समय यह महा पंजाब का हिस्सा था, हरियाणा प्रांत अस्तित्व में नहीं आया था जिसके कारण यह कॉलेज मंडी डबवाली जिला हिसार में आता था। 1 नवंबर 1966 को महा पंजाब के तीन हिस्से होने के पश्चात जब पंजाब से हरियाणा और हिमाचल अलग किए गए तब यह पंजाब के फिरोजपुर जिले का कॉलेज बना परंतु पंजाब में जिलों के पुनर्गठन के बाद यह फिरोजपुर से फरीदकोट तत्पश्चात नवंबर 1995 में यह श्री मुक्तसर साहिब जिले का कॉलेज बना। मालवा क्षेत्र जो कि शुरू से ही शैक्षणिक तौर पर काफी पिछड़ा हुआ था वहां मंडी किलियांवाली व इसके आसपास के क्षेत्र में अंधेरे में ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाला यह पहला सहशिक्षा संस्थान है, बाकी आसपास की शिक्षा संस्थाएं इससे काफी अंतराल के बाद सामने आईं।
1956 से लेकर आज तक कॉलेज 10 प्रधानाचार्यों के दिशा-निर्देश में आगे बढ़ता रहा है। इसके प्रथम प्रधानाचार्य थे सरदार जीवन सिंह। उन के पश्चात सरदार प्रेम सिंह ,श्री देवीदास वैद्य ,श्री जय किशन ,सरदार जगरूप सिंह सिद्धू ,श्री कृष्ण बलदेव, डॉ हरपाल सिंह चहल ,श्री आत्माराम अरोड़ा ,डॉ. इंदिरा अरोड़ा और वर्तमान समय में डॉ. सुरेंद्र सिंह ठाकुर प्रधानाचार्य के रूप में कॉलेज को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। प्रधानाचार्य के रूप में सरदार जगरूप सिंह सिद्धू ने सर्वाधिक लंबा कार्यकाल पूरा किया।वे दिसंबर 1966 से जनवरी 1987 तक कॉलेज प्रिंसिपल रहे एवं आजकल वे कॉलेज प्रबंधन समिति के सम्मानीय सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं इस शिक्षा संस्था को दे रहे हैं।डॉ. इंदिरा अरोड़ा कॉलेज की प्रथम महिला प्रधानाचार्य बनी और वे मार्च 2003 से अगस्त 2015 तक इस पदवी पर सुशोभित रहीं। 14 मई 2016 से डॉ. सुरेंद्र सिंह ठाकुर प्रधानाचार्य के रूप में इस शिक्षा संस्थान को नई ऊंचाइयों की तरफ अग्रसर कर रहे हैं।
1956 से लेकर आज तक कॉलेज ने अलग-अलग क्षेत्रों जैसे शैक्षणिक, सांस्कृतिक और खेलों के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय प्राप्तियां की हैं ।कॉलेज में मेडिकल, नॉन मेडिकल, कॉमर्स और आर्ट्स यह चारों संकाय पहले चलाए जाते थे । वर्ष 2000 में यहां दो संकाय मेडिकल व नॉन मेडिकल विद्यार्थियों की उपलब्धता ना होने के कारण प्रबंधन समिति को बंद करने पड़े और अब केवल कॉमर्स और आर्ट्स संकाय ही इस कॉलेज में स्थाई रूप में कार्यरत हैं। 2009 से यहां सबसे पहले हिंदी स्नातकोत्तर विभाग शुरू किया गया तथा 2012 में पंजाबी और इतिहास विषयों के स्नातकोत्तर विभाग शुरू किए गए । तत्पश्चात पी.जी.डी.सी.ए. एवं सी.बी.ए. जैसे कोर्सों की शुरुआत की गई ताकि बदलते समय के साथ कदमताल मिलाकर चला जा सके। वर्ष 2017 से एक और नई शिक्षा बुलंदी छूते हुए एवं क्षेत्र की मांग को देखते हुए कॉलेज में बहुप्रतीक्षित एम.कॉम. कक्षा भी शुरू कर दी गई है ।यहां से शिक्षा प्राप्त करके हमारे कई विद्यार्थी आईएएस, पीसीएस, सरकारी और गैर सरकारी उच्च पदवियों ,डॉक्टर, इंजीनियर, कानूनविद, न्यायाधीश ,वकील, सीए, बैंक अधिकारी ,अध्यापक, प्रोफेसर, व्यवसायी, नेता, बालीवुड़, थिएटर आर्टिस्ट आदि के रूप में अपनी सेवाएं देश को दे रहे हैं। कॉलेज को गर्व है अपने विद्यार्थियों श्री विवेक अग्रवाल IAS, श्री मनवेश सिद्धू PCS, श्री सुनील ग्रोवर (गुत्थी) बॉलीवुड कलाकार, श्री संजीव शाद थिऐटर व टी.वी. आर्टिस्ट, श्री हरमंदर जस्सी पूर्व मंत्री पंजाब, C.A. श्री मनोहर ग्रोवर, स. सुखपाल भाट्टी भूतपूर्व सरपंच आदि हजारों छात्रों पर जो आज विभिन्न क्षेत्रों में कॉलेज का नाम रोशन कर रहे हैं। खेलों में भी यूनिवर्सिटी और नेशनल स्तर के कई खिलाड़ी इस कॉलेज ने पैदा किए ।एनसीसी का भी लड़के और लड़कियों का संयुक्त विंग आस-पास के कॉलेजों की तुलना में केवल यहीं उपलब्ध है जिस के योगदान के चलते हमारे कॉलेज के काफी सारे विद्यार्थियों को फौज और पुलिस में भर्ती होने में सहायता मिली। वहीं दूसरी तरफ एन.एस.एस. के चलते विद्यार्थियों को समाज सेवा के पुनीत कार्य में भी जुड़ने का अवसर समय-समय पर प्रदान किया जाता है। इन्हीं उपलब्धियों के चलते कॉलेज को NAAC द्वारा 2016 में बी ग्रेड देकर मूल्यांकित किया गया है।
कॉलेज के पास हरी-भरी विशाल खूबसूरत दो मंजिला इमारत के साथ-साथ एक बहुत बड़ा ऑडिटोरियम है जहां अलग-अलग सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक गति विधियों का आयोजन किया जाता है ।कॉलेज में शुरू से ही स्विमिंग पूल बना हुआ है जो संभवत पंजाब के किसी भी ग्रामीण कॉलेज में नहीं है।विद्यार्थियों की सुविधा के लिए अति आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक जिम्नेजियम भी बनाया गया है ताकि विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रख सकें क्योंकि बेहतरीन दिमाग अच्छी सेहत वाले शरीर में ही पनपता है ।कॉलेज के पास वाईफाई कैंपस और 20 हजार से ऊपर बहुमूल्य पुस्तकों एवं सैकड़ों जरनल, पत्रिकाओं और समाचार पत्रों से सुसज्जित ई-लाइब्रेरी है। कॉलेज की अपनी अत्याधुनिक 2 कंप्यूटर लैबस और सेमिनार हाल है। कॉलेज के अपने 2 विशाल खेल मैदान हैं एवं कॉलेज हाल में इंडोर खेलों की सुविधा भी विद्यार्थियों को दी गई है। पिछले वर्ष कॉलेज के स्थापना दिवस 16 मार्च को आयोजित दीक्षांत समारोह के अवसर पर मुख्य अतिथि बाबा मस्तनाथ यूनिवर्सिटी, रोहतक के वी.सी. प्रो. आर एस पांडे द्वारा स्व. स. गुरराज सिंह ढिल्लों ऐम.पी. साहब को समर्पित एक प्रतिमा एवं स्वर्गीय बाबू नानक चंद अग्रवाल को समर्पित एक पार्क का अनावरण किया गया। कॉलेज का अपना गुरुद्वारा साहिब है जहां सुबह शाम नितनेम होता है ।कॉलेज द्वारा हर वर्ष गुरु पर्व एवं जन्माष्टमी जैसे उत्सव बड़े हर्ष उल्लास से मनाए जाते हैं ।कॉलेज के पास अपना रेड रिबन क्लब, लीगल लिटरेसी क्लब ,वुमन सेल ,इंग्लिश लिटरेरी सोसाइटी, थिंकर्स सोसाइटी ,हिस्ट्री सोसाइटी, पंजाबी लिटरेरी सोसाइटी, करियर गाइडेंस सेल ,एससी बीसी सेल ,आरटीआई और आरटीएस सेल आदि कार्यरत हैं ।कॉलेज द्वारा अपना मैगज़ीन *नानक जोत* हर वर्ष निकाला जा रहा है एवं कॉलेज विद्यार्थियों को यूथ फेस्टिवल और इसी तरह कि अन्य शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए भी तैयार किया जाता है ताकि वे अपने लेखन और वाक् कुशलता का बाखूबी प्रदर्शन कर सकें।















Amit Behal
June 16, 2020 at 9:25 am
हमारे महान शिक्षण संस्थान गुरु नानक कॉलेज जिसकी आप भी पैदावार है संजीव जी, इसको अपने मंच के जरिए जन जन तक पहुंचाने के लिए अंतर्मन की गहराइयों से धन्यवाद भाई…
Amit Behal
June 16, 2020 at 9:25 am
हमारे महान शिक्षण संस्थान गुरु नानक कॉलेज जिसकी आप भी पैदावार है संजीव जी, इसको अपने मंच के जरिए जन जन तक पहुंचाने के लिए अंतर्मन की गहराइयों से धन्यवाद भाई…
दिलबागसिंह विर्क
June 17, 2020 at 10:23 am
आपकी इस प्रस्तुति का लिंक चर्चा मंच पर चर्चा – 3736
में दिया गया है। आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी।
धन्यवाद
दिलबागसिंह विर्क
दिलबागसिंह विर्क
June 17, 2020 at 10:23 am
आपकी इस प्रस्तुति का लिंक चर्चा मंच पर चर्चा – 3736
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धन्यवाद
दिलबागसिंह विर्क