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चिठ्ठी…. अहसास की :-Shaad

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मित्रो…….. 

सबको मेरा आदर और सम्मान ।।
मैं यहाँ पर राजी ख़ुशी हूँ और आप सब की कुशलता भगवान से सदा शुभ नेक चहाता हूँ आगे समाचार यह है की मैं ……………….
उपरोक्त पंक्तियाँ अक्सर 45 वर्ष के लोगो ने ने कही पढ़ी होगी कुछ याद आया पीले कार्ड या नीले लिफ़ाफ़े पोस्टकार्ड अक्सर हमारे घर आते थे साईकल पे डाकिया जब आता था । ख़ुशियों और गम को अपने झोली से निकाल कर बांटता था। 
“सीधा साधा डाकिया जादू करे महान 
इक ही थैले में रखे आँसू और मुस्कान” ।
 चिठ्ठी …..तुम अब क्यों नही आती घर ….
चिठ्ठी लिखने का आपना ही मज़ा है । 
मित्रो लिखा इक इतिहास बनता है ।
हर चिठ्ठी को बार बार पढ़ना, शब्दों के अर्थ बनाना 
और खो जाना ……..दुख सुख  की ये पाती 
जो अनपढ़ थे वो चिठ्ठी पढ़वाने जाते थे, 
और तो ओर किसी की चिठ्ठी पढ़ने का मज़ा ही कुछ और था 
हाथो से छीन कर ………
लोग उस जमाने में प्रेम पत्र भी लिखते थे नराजगी से भरे खत भी होते थे  ।।
कितने रंग होते थे चिठियों के ……….
कोई कोई चिठ्ठी का कोना अगर फटा होता तो… अफ़सोस और अगर हल्दी से भीगी चिठ्ठी ख़ुशी की प्रतीक होती थी ।।
चलो तुम आज इक पोस्ट कार्ड लेकर आओ 
और इक चिठ्ठी लिखो 
अपने बच्चों को चिठ्ठी लिखना सिखाना 
जिनके बच्चे होस्टल में पढ़ते है माँ बाप दूर रहते है रिश्ते नाते में वो आज उन्हें इक चिठ्ठी जरूर लिखना 
सच मानना ………कितने सार्थक परिणाम आयेगे ।
लिखोगे ना आज ही चिठ्ठी …….
कम से कम मुझे इंतज़ार रहेगा 
और अंत में मेरा बच्चों को प्रेम देना घर में बड़ो को सम्मान  ओर आदर देना 
खुश रहो आपन ख़याल रखना  सबको राम राम
ज़िन्दगी ज़िंदाबाद ।।
 आपका  
Sanjivv Shaad

2 Comments

  1. Meenakshi Ahuja

    June 11, 2020 at 5:20 pm

    खो ही गयी चिट्ठी लिखने की कला। अच्छी शुरुआत है आपकी

    Reply

  2. Meenakshi Ahuja

    June 11, 2020 at 5:20 pm

    खो ही गयी चिट्ठी लिखने की कला। अच्छी शुरुआत है आपकी

    Reply

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