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A heart-touching emotional letter to the students by a teacher ….

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मेरे प्यारे बच्चो……
 मैं आपका राजनीति शास्त्र विषय का प्रोफेसर हमारे कॉलेज के ही भूतपूर्व विद्यार्थी, उत्तर भारत के प्रसिद्ध साहित्कार रंगकर्मी मंच संचालकमेरे भाई संजीव शाद द्वारा शुरू की गई इस वेबसाइट/ब्लॉग के माध्यम से आपसे रूबरू होने के इस बेहतरीन अवसर को मुझे प्रदान करने के लिए उनका तहे दिल से धन्यवाद करता हूं। कॉलेज लाइफ एक विद्यार्थी के जीवन का स्वर्णिम काल होता है क्योंकि इस वक्त देश की नौजवान पीढ़ी की ज़िदगी के कैनवस में नए रंग भरे जा रहे होते हैं एवं उनके पंख नई उड़ान भरने के लिए तैयार होते हैं।उनके स्कूली जीवन में चाहे उनकी आधारशिला तैयार हो चुकी होती है परंतु कॉलेज जीवन में अपने प्राध्यापकों,पियर ग्रुप से दिशा-निर्देशन लेते हुए वे नई दिशाओं में अग्रसर होने के लिए परिपक्व होते हैं।इस अहम वक्त में उनकी की गई मेहनत एवं अपने विवेक से लिए गए उनके फैसले उनके अगले जीवन की दिशा और दशा निर्धारित करते हैं।
परंतु वर्ष 2020 के तीसरे माह (मार्च)के मध्यान्ह में हमारे देश में पैर पसारने को आतुर कोरोनावायरस महामारी के चलते हमारी सरकार को सभी कार्यालय,व्यावसायिक परिसर, मार्किट,शिक्षा संस्थान आदि सब कुछ बंद करने का कटु निर्णय लेना पड़ा।आज हमें लॉक डाउन और कर्फ्यू का संताप भोगते 2 महीने से अधिक का समय हो चुका है। चाहे इस समय काल के दौरान हम ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से विद्यार्थियों से निरंतर जुड़े रहे हैं जो कि हमारे अध्यापक वर्ग और विद्यार्थियों के लिए एक नया  अनुभव था परंतु फिर भी मैं समझता हूं यह हम सबके लिए एक तरह से विछोह की स्थिति रही है। मैंने तो अपनी संस्था गुरुनानक कॉलेज, वहां कार्यरत अपने आदरणीय साथियों, अपनी कक्षाओं एवं विशेषत: अपने प्यारे विद्यार्थियों बहुत अधिक मिस किया है।
एक अध्यापक कभी बूढ़ा नहीं होता क्योंकि उसकी अपनी उम्र चाहे जो मर्जी हो जाए किंतु हमेशा नौजवान पीढ़ी के बीच में रहने के कारण वह हमेशा युवा ही रहता है। इस लॉकडाउन में अपने अजीज़ विद्यार्थियों से बिछुड़ कर मैं अपने आप को बहुत क्षीण महसूस कर रहा हूं। इस बात में कोई दो राय नहीं कि छुट्टियों का चाव हम सब को होता है। परंतु इस बार यह छुट्टियां इस माहौल में इस तरीके से हमें मिलेंगी, ऐसी न तो हमने कल्पना की थी और न ही हम भविष्य में ऐसी कामना करते हैं। चाहे हम अपने अपने घर में हैं, अपने परिवारजनों के साथ परंतु फिर भी अपने स्टूडेंट्स को मिले बिना ऐसा लग रहा है जैसे कोई वनवास या संताप भोग रहे हैं। उनके लिए रोज कुछ नया बताने की तैयारी एवं तमन्ना लेकर कक्षाओं में जाना, उनकी अपने करियर व आगामी भविष्य के प्रति संजीदगी,उनकी नटखट शरारतें, चुहलबाजियां, फ्री पीरियड्स में देश और दुनिया यहां तक कि निजी व पारिवारिक मुद्दों पर विचार-विमर्श मुझमें एक नई ऊर्जा भर दिया करता था। क्लासों में उनकी उपस्थिति, अनुशासन और शानदार परफॉर्मेंस पर उनकी पीठ थपथपाना,उनकी नादानी भरी गलतियों पर उन्हें डांटना, क्लास न लगाने पर इधर-उधर घूमते हुए उन्हें तिरछी नजरों से देखना, कॉलेज की लाइब्रेरी में अपने नोट्स तैयार करने के लिए पुस्तकों से माथापच्ची करते उन्हें देखना,कॉलेज ग्राउंड में उनका झुरमुट बना कर बैठना, किसी अध्यापक के क्लास में न आने की खुशी मनाना, केंटीन में अपने साथियों के साथ चाय-समोसों का लुत्फ उठाते देखना, यूथ फेस्टिवल एवं विभिन्न प्रतियोगिताओं/प्रतिस्पर्धाओं एवं स्पोर्ट्स इवेंट्स के लिए उत्साहित उन्हें देखना एवं अंततः अपनी एसेसमेंट और परीक्षाओं के प्रति उन्हें चिंतातुर देखने पर उनकी हौसलाअफजाई करना… ऐसे हजारों- लाखों जिज्ञासा भरे पल जो मुझे घड़ी -घड़ी मेरे अपने विद्यार्थी जीवन काल में ले जाते थे, इस नामुराद कोरोनावायरस महामारी ने मुझसे छीन लिए। जी करता है गोली मार दूं इस करमजले कोरोना को…
हालांकि यदि विद्यार्थियों के पक्ष से देखूं तो आरंभ में उन्हें भी शायद इन अनापेक्षित छुट्टियों से आनंद की उम्मीद रही होगी पर अब तो इतने लंबे समय तक घर में डके रहने के कारण उनकी और उनके माता-पिता की भी अवश्य बस हो गई है। बच्चे अपनी परीक्षाओं के होने या न होने, अगले सेमेस्टर के समय से शुरू होने या न होने आदि के बारे में भी कई तरह की शंकाओं से ग्रस्त हैं। हमें निरंतर आ रहे विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के फोन कॉल से यह परिलक्षित हो रहा है कि डॉक्टरों,सफाई कर्मियों और पुलिसकर्मियों की तरह अब अध्यापक भी उन्हें कोरोना वारियर्स लग रहे हैं जो उनके बच्चों को रोज न सिर्फ इतनी देर तक संभालते हैं बल्कि उन्हें हीरे की तरह तराश कर ज़िंदगी की मंजिलों को प्राप्त करने के काबिल बनाते हैं। चाहे ऑनलाईन शिक्षा ने विद्यार्थियों को इन दो महीनों में अपने चहेते मोबाईल व कंप्यूटर के और नज़दीक कर दिया परंतु साथ ही दूसरी तरफ उन्हें अपने प्राध्यापकों, संगी-साथियों व संस्था का महत्व भी भली-भांति समझा दिया है।अब उन्हें यह स्पष्ट पता है कि मशीन और टेक्नोलॉजी मानवीय संवेदनाओं की जगह नहीं ले सकते।शायद इस बुरे समय की एक यही सकारात्मक प्राप्ति है कि इसने मानवीय रिश्तों को एक बार फिर सर्वोच्च साबित कर दिया है।
मेरा यह मानना है कि कोरोना महामारी के बाद का काल वैसा बिलकुल नहीं होगा जो इस महामारी के आने से पहले का था,बहुत कुछ बदल जाएगा। फिजिकल डिस्टेंसिंग, वर्क फ्रॉम होम,मास्क -सैनिटाइजर,परमाणु हथियारों व मिसाइलों आदि की बजाए शिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाने की तरफ ध्यान,वातावरण और अपने प्राचीन मूल्यों और संस्कृति की कद्र आदि बातें हमारे वैश्विक और राष्ट्रीय परिदृश्य को लाजमी तौर पर प्रभावित करेंगी। जो आईलेट्स करके बाहर जाने की ललक पिछले कुछ वर्षों से हम सब पर भारी पड़ रही थी,विदेशी सरकारों द्वारा हमारे विद्यार्थियों को और वहां काम करने गए कामगरों को इस मुसीबत की घड़ी में अपने देश वापस भेजने के संवेदनहीन निर्णय से यह जुनून भी आगे से क्षीण होता जाने की उम्मीद है। सो प्यारे बच्चो दुआ करता हूं कि जल्द ही सारी दुनिया से इस महामारी का बोरिया बिस्तरा गोल हो, हम फिर अपनी संस्था और कक्षाओं में इकट्ठे हों एक नए जोश और जुनून के संग और आपके और राष्ट्र के भावी भविष्य निर्माण की नई योजना के साथ । आपकी संस्था और मैं अपने स्टाफ के साथ बाहें फैलाकर आपके आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं क्योंकि आप से ही हमारा वजूद और हमारी पहचान है,आपके बिना यह बीत रहे पल बेरंग और बेनूर हैं।
फिलहाल उस वक्त के आने तक घर में रहिए, सुरक्षित रहिए,घर के कामों में अपने माता-पिता का हाथ बटाइए,अपनी पढ़ाई और रचनात्मकता का दामन मत छोड़िए,सरकार द्वारा दिए गए दिशा- निर्देशों का पालन कीजिए और अपने बेहतर भविष्य के लिए आशावादी रहिए। कोई भी समस्या या दिक्कत महसूस करो तो मुझे फोन या व्हाट्सएप पर संपर्क करने से बिल्कुल भी हिचकिचाना मत…
आपके माता-पिता को भी मेरा वंदन और आपको प्यार व ढेर सारे आशीर्वाद…
अंततः- 
बहुत वक्त गुज़रा भटकते हुए अंधेरों में
चलो अँधेरी रात की सुबह हम ढूंढते हैं…*
Love you all beta
आपका हितचिंतक
अमित बहल
अध्यक्ष, राजनीति शास्त्र विभाग,गुरु नानक कॉलेज, किलियांवाली,जिला श्री मुक्तसर साहिब, पंजाब 
फोन -935 732 1784
amitbehal.gnc @gmail.com

2 Comments

  1. Amit Behal

    May 23, 2020 at 10:41 am

    Bundle of thanks Sanjeev Shaad g for conveying my emotions to my dear students through your website…be always in the forefront…

    Reply

  2. Amit Behal

    May 23, 2020 at 10:41 am

    Bundle of thanks Sanjeev Shaad g for conveying my emotions to my dear students through your website…be always in the forefront…

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