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#युद्ध का 13वा दिन..
तिनके का भी अपना सहारा होता डूबने वाले के लिए कण भी भूमिका निभाता है जब भूख लगी हो,देश का स्वभाव है मानवता के कल्याण हेतु उठ खड़े होना सेवा सहयोग समर्पण और प्रेम पहचान है, हमारे देश की मिट्टी की धूल हम माथे पर लगा कर सम्मान देते है लेकिन युद्ध मे सयंम बहुत जरूरी है अतिउत्साही होना ही युद्ध के परिणाम बदल देता है बचत में ही बचाव है मुश्किल घड़ी में बचत किया हुआ ही काम आता है अभी वक्त है बहुत कुछ बचाया जा सकता है समझा जा सकता है नही तो जब आखरी नदी सुख जाएगी जब आखरी मछली मर जाएगी जब आखरी पेड़ गिर जाएगा तो जेब मे पड़ा रुपया किसी काम नही आएगा बस आत्मबल बनाये रखे सहयोग साथ व बचाव व बचत ही उपाय है ये जंग जीतने के घर पर ही रहे हम जीत रहे है खुद से कहिये
जिंदगी ज़िंदाबाद

