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भारतीय ज्ञान परंपरा ने विश्व को नई दृष्टि दी : प्रो. उपासना जोशी

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भारतीय ज्ञान परंपरा एवं संस्कृति के अलोक में जम्मू-कश्मीर का हिंदी साहित्य” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू

जम्मू,:-हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषा विभाग, जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय एवं भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद् (आईसीएसएसआर), उत्तर-पश्चिम क्षेत्रीय केंद्र, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ द्वारा “भारतीय ज्ञान परंपरा एवं संस्कृति के अलोक में जम्मू-कश्मीर का हिंदी साहित्य” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव जैन के मार्गदर्शन में आयोजित इस संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में आईसीएसएसआर की निदेशक प्रो. उपासना जोशी, विशिष्ट अतिथि के रूप में पंजाबी सभा, मास्को, रूस के अध्यक्ष प्रमोद कुमार उपस्थित रहे। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता भाषा संकायाध्यक्ष प्रो. वन्दना शर्मा ने की। हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषा विभाग के अध्यक्ष प्रो. भारत भूषण उस सभी अतिथियों का स्वागत किया। शोधार्थियों ने सरस्वती वन्दना प्रस्तुत की।

सर्वप्रथम प्रो. वन्दना शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान के परिप्रेक्ष में जम्मू-कश्मीर की परंपरा और संस्कृति के आलोक में हिन्दी साहित्य अपने आपमें एक विशिष्ट विषय है। हम सभी को इस परंपरा और साहित्य के प्रचार-प्रसार में पूर्ण योगदान देना चाहिए।

मुख्य अतिथि के रूप में आईसीएसएसआर की निदेशक प्रो. उपासना जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की भाषा और संस्कृति बहुत उत्कृष्ट है, अतः हमें इसके बारे में चिंतन करने की विशेष आवश्यकता है। भारतीय ज्ञान परंपरा ने विश्व को नई दृष्टि दी है। भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध बनाने में हमारे ऋषि-मुनियों का योगदान अविस्मरणीय है। आईसीएसएसआर ने भारतीय ज्ञान परंपरा के संवर्धन के लिए हर संभव प्रयासरत है। विशिष्ट अतिथि के रूप में पंजाबी सभा, मास्को, रूस के अध्यक्ष प्रमोद कुमार ने कहा कि हमें कभी अपनी भूमि, भाषा और संस्कृति को नहीं भूलना चाहिए। मेरा हमेशा प्रयास रहता है कि मैं अपनी जन्मभूमि के साथ राष्ट्र की सेवा कर सकूँ। इसी के लिए मैं विदेश में भी हमारे देश की संस्कृति के प्रचार –प्रसार में लगा हुआ हूँ।

मुख्य वक्ता प्रो. राजेंद्र कुमार अध्यक्ष, हिंदी विभाग, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, बठिंडा ने कहा कि भारतीय संस्कृति एक सामासिक संस्कृति है। इसका स्वरूप विराट है। वर्तमान की स्थिति में बहुभाषिकता को बढ़ावा मिल रहा है। वैदिक ज्ञान ही दुनिया को नया आलोक प्रदान किया है। यह वैदिक ज्ञान हमारे वैदिक काल से चली आर ही है। उद्घाटन कार्यक्रम का संचालन विभाग की सहायक आचार्य डॉ वन्दना शर्मा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन संगोष्ठी के संयोजक डॉ शशिकांत मिश्र ने किया।

विभाग के सहायक आचार्य डॉ विनय कुमार शुक्ल के संचालन में आयोजित संगोष्ठी के दूसरे सत्र की अध्यक्षता हिंदी विभाग, हिमाचल केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला के प्रो. चंद्रकांत सिंह ने की, इसमें बौद्ध धर्म अध्ययन विभाग, जम्मू विश्वविद्यालय, जम्मू के डॉ. विवेक शर्मा, दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. विवेक शर्मा, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के शोधार्थी हनीफ खान, नाजिया कोसर, लक्ष्मी सोलंकी, मौलाना आजाद नेशनल उर्दू विश्वविद्यालय, हैदराबाद के शोधार्थी निखिल साहु, डॉ बी आर अंबेडकर विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के शोधार्थी अनुपम भट्ट, जीडीसी मॅड की डॉ शिक्षा, डॉ शीतल ने अपना-अपना प्रपत्र वाचन किया।

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