रोहतक। सप्तक कल्चरल सोसाइटी द्वारा पठानिया वर्ल्ड कैंपस के सहयोग से आयोजित ‘घर फूंक’ थिएटर सीरीज़ में मंचित नाटक ‘एक्सपायरी डेट’ ने जीवन और मृत्यु पर तीखे सवाल उठाए। स्थानीय सोसर्ग स्टूडियो में अनमोल रंग साहित्य और कला संस्कृति ट्रस्ट द्वारा प्रस्तुत इस नाटक ने दर्शकों से भरे सभागार में अपने विचारोत्तेजक विषय, गहरे भावनात्मक क्षणों और सहज हास्य के चलते सभी को विशेष रूप से प्रभावित किया।

चैतन्य सरदेशपांडे द्वारा लिखित इस नाटक में एक ऐसी कल्पनात्मक दुनिया को प्रस्तुत किया गया, जहां मृत्यु को शोक नहीं, बल्कि उत्सव के रूप में देखा जाता है। इसी दुनिया में लोगों को अपनी ‘एक्सपायरी डेट’ जानने की सुविधा दी जाती है। कहानी एक बुजुर्ग व्यक्ति नाना के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे डॉक्टर उसकी मृत्यु की तिथि बताना चाहता है, लेकिन वह इसका विरोध करता है। यह विरोध एक ऐसे सफर की शुरुआत करता है, जो परिवार, संबंधों, समाज और जीवन के असली मायनों पर सवाल खड़े करता है। नाटक में प्रहसन और व्यंग्य के माध्यम से गहरी संवेदनाएं और सामाजिक टिप्पणी सामने आईं।

फराह अनवर, पूजा, नवदीप, दिव्य, शोएब, अंकित राज, आशीष, अंकुर, गौरव और आध्या के अभिनय से सजे ‘एक्सपायरी डेट’ का निर्देशन और संगीत संयोजन पंकज ध्यानी ने किया। अनुवाद, रूपांतरण और डिज़ाइन नील द्वारा किया गया, जिन्होंने सह-निर्देशक की भूमिका भी निभाई। रूप सज्जा अनिल शर्मा, मंच सज्जा अंकुर जैन और प्रोडक्शन का संचालन विजय कुमार राजवंशी ने किया। नाटक को दर्शकों से भरपूर सराहना मिली। दर्शकों ने इसे “हास्य और संवेदना का अद्भुत संगम” बताया और प्रस्तुति के बाद इस पर लंबी चर्चा की। कई दर्शकों की आंखें नम थीं तो कई को हंसी के बीच जीवन की सच्चाइयों ने छुआ।

निर्देशक पंकज ध्यानी ने कहा कि हम अक्सर मृत्यु से डरते हैं, लेकिन यदि हमें अपने जीवन की अंतिम तारीख पहले से पता हो, तो शायद हम और अधिक ईमानदारी से जीने लगें। उनके अनुसार यह नाटक जीवन को समझने और आत्मनिरीक्षण का अवसर देता है। उन्होंने बताया कि अनमोल रंग साहित्य और कला संस्कृति ट्रस्ट भारत के ग्रामीण और लोक कलाकारों को रंगमंच के मुख्य प्रवाह से जोड़ने का कार्य कर रहा है। ट्रस्ट देश भर में रंगमंच उत्सव, कार्यशालाएं और प्रस्तुतियाँ आयोजित करता है, जिनका उद्देश्य सामाजिक परिवर्तन और सांस्कृतिक समावेश है।
इस अवसर पर हरियाणवी और पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री के चर्चित निर्देशक सुखबीर गिल, जाने माने थियेटर प्रोमोटर विश्वदीपक त्रिखा, डॉ. आनंद शर्मा, सुभाष नगाड़ा, डॉ. कृष्ण लाल, विष्णु मित्र सैनी, शीतल पहल, पंकज शर्मा, सप्तक के अध्यक्ष अविनाश सैनी, शक्तिसरोवर त्रिखा, अनिल शर्मा, डॉ. अमन वशिष्ठ, यतिन वधवा, जगदीप जुगनू, कर्नल सिंह, समीर शर्मा, ललित खन्ना, मनीष खरे, विक्रमादित्य, अंकुर, गर्व कोचर सहित अनेक नाट्य प्रेमी शामिल थे। मंच संचालन अविनाश सैनी ने किया।
अविनाश
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