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वाणी का मौन एक तप है जो बाहरी उलझनों से बचाता हैं..डा. इंदर गोयल

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*वाणी का मौन एक तप है जो बाहरी उलझनों से बचाता हैं..डा. इंदर गोयल*

अखिल भारतीय सेवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ इंदर गोयल ने कहा की वाणी का मौन एक शक्तिशाली तप है जो व्यक्ति को बाहरी उलझनों से बचाता है और आंतरिक शांति और संतुलन को बढ़ावा देता है। जब हम मौन रहते हैं, तो हम अपने विचारों और भावनाओं को नियंत्रित करने में सक्षम होते हैं, और अनावश्यक बातचीत और विवादों से बच सकते हैं।

डा. इंदर गोयल ने 40 दिवसीय मौन साधना संकल्प यात्रा में आज 30 दिन सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं, और पहले 1 घंटा 30 मिनिट के लिए संवाद रखते थे अब संपूर्ण मौन रखा है जिसमें वह अपनी विभिन्न प्रकार के साधना कार्यक्रम में व्यस्त रहते है। जिसमें हवन यज्ञ, गौशाला, सालासर धाम मंदिर, सेवा कार्य, ध्यान, अध्ययन, लेखन, मौन श्रीमद्भागवत कथा, महाभारत, एवं शारीरिक और मानसिक कार्य में मौन रूप से व्यस्त रहते है।

डा. गोयल ने कहा की मौन रहने से आंतरिक शांति और संतुलन बढ़ता है, जो जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है, मौन रहने से विचारों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है, जिससे निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होता है। मौन रहने से बाहरी उलझनों और विवादों से बचा जा सकता है, जो जीवन में तनाव और चिंता को कम करता है। मौन रहने से आध्यात्मिक विकास होता है, जो जीवन को अधिक अर्थपूर्ण और सकारात्मक बनाने में मदद करता है।

उन्होंने आगे बताया कि नियमित रूप से मौन रहने का अभ्यास करें, जैसे कि दिन में कुछ मिनटों के लिए मौन रहना।ध्यान का अभ्यास करें, जो मौन रहने और आंतरिक शांति प्राप्त करने में मदद करता है। प्रकृति के साथ जुड़ने से मौन रहने और आंतरिक शांति प्राप्त करने में मदद मिलती है। वाणी का मौन एक शक्तिशाली तप है जो व्यक्ति को बाहरी उलझनों से बचाता है और आंतरिक शांति और संतुलन को बढ़ावा देता है। मौन रहने से आंतरिक शांति, विचारों का नियंत्रण, और आध्यात्मिक विकास होता है, जो जीवन को अधिक अर्थपूर्ण और सकारात्मक बनाने में मदद करता है।

 

डॉ गोयल ने बताया कि यह असंभव सा प्रतीत होने वाला अब संभव होने जा रहा है, प्रभु की विषेश अनुकंपा के बिना यह संभव नहीं, वस्तुत: इस तीस दिवस की मौन यात्रा में ये अनुभव किया है की आप एक कदम चलो, प्रभु दस कदम का रास्ता साफ कर देते है, लेकिन पहला कदम आपको ही चलना होगा जिसकी प्रेरणा प्रभु देते हैं परंतु हम दुनियां के भौतिक आकर्षण में इतने लीन होते हैं कि हमें आवाज सुनती ही नहीं इसलिए हमें प्रभु की आवाज, आपकी आत्मा की आवाज और स्वयं के कठोर निर्णय असंभव से लगने वाले कार्य को संभव बना देते हैं।

डा इंदर गोयल ने उपरोक्त शब्द सेवा संघ के पदाधिकारीयों, सदस्यों और पूरे देश के कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया के माध्यम से कहे। इनके इस संकल्प में साथ देने वाले सभी साथियों ने बधाई प्रेषित की है और शुभकामनाएं दी है जिनमें श्री विनोद धवन, मुकेश वर्मा, पंकज मित्तल, परविंदर ठठई, अशोक चाचान, पुनीत गोयल, रफ़ूल कंबोज, राजेश शर्मा, महिंद सेतिया, प्रमोद सचदेवा, विकास तिरपाल, चेतन मेहता, संजीव मेहता, आमला गुप्ता, रेनू गर्ग, कांता बंसल, कृष्ण मित्तल, नीनू बंसल, राधा गोयल, शारदा गुप्ता, विशुकांता, जसवीर कौर, संतोष कुमारी, साधना पंकज, पूजा बंसल, रमेश साहूवाला एवं बहुत से मित्रों ने इस मौन यज्ञ की सफलता की कामना की है।

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