Home News Point रोहतक में नाट्य उत्सव का आगाज हरियाणा कला परिषद की प्रस्तुति।

रोहतक में नाट्य उत्सव का आगाज हरियाणा कला परिषद की प्रस्तुति।

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पहले दिन सप्तक कल्चरल सोसायटी के कलाकारों द्वारा नाटक गधे की बारात का मंचन किया गया। ये गधे की बरात का रिकॉर्ड 348 वा मंचन था जिसका निर्देशन विश्व दीपक त्रिखा ने किया

रोहतक 9 अगस्त। कुरुक्षेत्र स्थित हरियाणा कला परिषद द्वारा प्रायोजित और हरियाणा इंस्टीट्यूट आफ परफॉर्मिंग आर्ट्स रोहतक के सह सहयोग से आयोजित नाट्य उत्सव का कल सायं जैड ग्लोबल स्कूल ओमेक्स के सभागार में रंगारंग शुभारंभ हुआ। जैड ग्लोबल स्कूल की प्रिंसिपल डॉक्टर प्रीति समारोह में मुख्य अतिथि रही जबकि श्री सुनीत धवन ने उत्सव की अध्यक्षता की।छोटी बच्ची आद्या वाधवा ने अपनी एंकरिंग से दर्शकों को मुग्ध कर दिया।

पहले दिन सप्तक कल्चरल सोसायटी के कलाकारों द्वारा नाटक गधे की बारात का मंचन किया गया। ये गधे की बरात का रिकॉर्ड 348 वा मंचन था जिसका निर्देशन विश्व दीपक त्रिखा ने किया।दशकों से खचाखच भरे सभागार में नाटक दर्शकों को बांधने में सफल रहा। सप्तक के अध्यक्ष अविनाश सैनी ने जानकारी दी की सप्तक द्वारा अभी तक इस नाटक का भारत के विभिन्न शहरों के अलावा पाकिस्तान के लाहौर में भी मंचन किया जा चुका है हरियाणा के किसी भी ग्रुप द्वारा किया गया यह पहला हिंदी नाटक है जिसके 348 मंचन हुए हैं। हरिभाई बड़गांवकर द्वारा मूल रूप में मराठी में लिखे इस नाटक का हिंदी रूपांतर राजेंद्र मेहरा और रमेश राज हंस ने किया।

हरियाणा कला परिषद द्वारा प्रस्तुत इस नाटक में कल्लू कुमार की भूमिका अविनाश सैनी ने, बृहस्पति गुरु और चौपट राजा की भूमिका डॉक्टर सुरेंद्र शर्मा ने, दीवान की भूमिका तरुण पुष्प त्रिखा ने,शक्ति सरोवर त्रिखा ने इंद्र अनिल शर्मा ने चित्रसेन, चेरी गिरधर ने गंगी, महक कथूरिया ने राजकुमारी, प्रतिष्ठा और वर्षा ने अप्सरा रंभा और राजनर्तकी, कुमार गर्व ने द्वारपाल और नीतिका सिंगल ने बुआ जी की भूमिका निभाई। हरियाणा के प्रसिद्ध नगाड़ा वादक सुभाष नगाड़ा के संगीत से सजी प्रस्तुति में विकास रोहिला और गुलाब सिंह ने हारमोनियम के साथ-साथ गायकी के रंग बिखेरे।मेकअप अनिल शर्मा ने, संगीत और लाइट पक्ष जगदीप जुगनू ने संभाला और प्रोडक्शन का जिम्मा संभाला यतीन वाधवा ने।

गधे की बारात नाटक एक पौराणिक कथा पर आधारित है। इंद्रदेव के दरबार में अप्सरा रंभा नृत्य कर रही है तभी चित्र सेन नामक गंधर्व सुरा के नशे में अप्सरा रंभा का हाथ पकड़ लेता है। इंद्र गुस्से में आकर उसको श्राप देता है कि वह मृत्यु लोक में गधा बनाकर भटकेगा। जब गंधर्व माफी मांगता है तो इंद्र उसको वरदान भी देता है कि जब उसकी शादी वहां के एक राजा की लड़की से होगी तब उसे इस श्राप से मुक्ति मिल जाएगी। चित्र सेन पृथ्वी पर गधा बनाकर कल्लू कुमार के घर में रहने लगता है। कल्लू कुम्हार उसकी बहुत सेवा करता है और एक दिन वहां का राजा मुनादी करवाता है कि जो कोई भी एक रात में महल की ड्योढी से मुफलिसों की बस्ती तक पुल बनाएगा राजकुमार की शादी उसके साथ की जाएगी। गधा बना गंधर्व चित्र सेन शर्त को पूरा कर देता है और पुल बना देता है। अब राजा की परेशानी बढ़ जाती है कि गधे के साथ अपनी बेटी की शादी कैसे करें। लेकिन क्योंकि वादा किया हुआ था तो शादी तो करनी ही पड़ती है। लेकिन जैसे ही जयमाला डालते हैं गंधर्व अपने वास्तविक रूप में आ जाता है और अपनी असलियत बताता है। लेकिन इंसान बनते ही वह अपने पालने पोसने वाले कल्लू कुमार व गंगी को पहचानने से भी इंकार कर देता है। कल्लू कहता है कि वह उसका बाप है, जिसने उसे पाल पास कर बड़ा किया था लेकिन गंधर्व उसको दुत्कार देता है और अपनी बीवी को लेकर कल्लू और गंगी को अकेला छोड़ कर स्वर्ग को चला जाता है। कहते हैं ना कि इस दुनिया में कोई जात पात, छुआ छात नहीं होती बस दो ही ग्रुप हैं एक गरीब और दूसरा अमीर, और अमीर अमीर ही रहता है और गरीब गरीबी ही रहता हैं और कोई गरीब अगर अमीर बन भी जाए तो वो अपने संगी साथियों को बिल्कुल ही भुला देता है हास्य व्यंग्य से भरपूर नाटक अपनी बात करने में पूरी तरह से कामयाब रहा।

 

मुख्य अतिथि डॉक्टर प्रीति, विशिष्ट अतिथि सुनीत धवन के अलावा रंगप्रेमी डॉक्टर संतोष मुदगिल, राज वर्मा,सुशीला देवी, डॉक्टर हरीश वशिष्ठ,नरेंद्र शर्मा, ओम प्रकाश, अजय गर्ग, पंकज शर्मा, रिया शर्मा,मनीष खरे,समीर शर्मा और अंकुश दर्शकों में उपस्थित रहे।

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