Home News Point युग कवि पाश जयंती पर हुआ विचार गोष्ठी व कविता पाठ कार्यक्रम का आयोजन 

युग कवि पाश जयंती पर हुआ विचार गोष्ठी व कविता पाठ कार्यक्रम का आयोजन 

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सिरसा: 10 सितंबर:

स्वतन्त्रता उपरान्त जब आम आवाम को दरपेश मसलों का हल नहीं हुआ तो आमजन की आवाज़ को पाश सरीखे कवियों ने सशक्त काव्याभिव्यक्ति प्रदान की। पाश काव्य में शब्द को हथियार में ढालकर जन-संघर्ष को प्रचंड करने का सामर्थ्य विद्यमान है। यह विचार अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) के राष्ट्रीय अध्यक्षमंडल के सदस्य कॉ. स्वर्ण सिंह विर्क ने सैंतीस वर्ष की अल्पायु में शहीद कर दिए गए युग कवि पाश की जयंती के अवसर पर पंजाबी लेखक सभा, सिरसा और प्रलेस सिरसा द्वारा राजकीय नैशनल महाविद्यालय, सिरसा में आयोजित विचार गोष्ठी व कविता पाठ कार्यक्रम में अपने अध्यक्षीय संबोधन में व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉ. स्वर्ण सिंह विर्क, जीएनसी सिरसा के प्राचार्य प्रो. हरजिंदर सिंह, पंजाबी लेखक सभा, सिरसा के अध्यक्ष परमानंद शास्त्री, प्रलेस सिरसा के अध्यक्ष डॉ. गुरप्रीत सिंह सिंधरा, पूर्व अध्यक्ष रमेश शास्त्री, सीएमआरजे राजकीय महाविद्यालय, मिट्ठी सुरेरां के पंजाबी विभागाध्यक्ष डॉ. जोगिंदर सिंह, प्रतिष्ठित साहित्यकार लखविंदर सिंह बाजवा, वरिष्ठ पत्रकार एवं शायर भुपिंदर पन्नीवालिया, प्रख्यात समाजसेवी सेवानिवृत्त प्राचार्य करतार सिंह व सुपरिचित पंजाबी लेखिका छिंदर कौर सिरसा पर आधारित अध्यक्षमंडल ने की।

विचार गोष्ठी में मुख्य वक्ता के तौर पर प्रलेस के राष्ट्रीय सचिवमंडल के सदस्य, हरियाणा राज्य महासचिव एवं जीएनसी सिरसा के पंजाबी विभागाध्यक्ष डॉ. हरविंदर सिंह सिरसा ने युग कवि पाश के व्यक्तित्व एवं कृतित्व के संबंध में विस्तृत चर्चा प्रस्तुत करते हुए कहा कि वर्तमान परिवेश में पाश की शायरी का स्वर और प्रखर हुआ है और आमजन की आवाज़ को अभिव्यक्ति प्रदान किए जाने की दृष्टि से इसकी प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है। विचार गोष्ठी में प्राचार्य प्रो. हरजिंदर सिंह, डॉ. जोगिंदर सिंह, परमानंद शास्त्री, डॉ. माँगा राम, डॉ. शेर चंद और करतार सिंह ने भी पाश काव्य के प्रमुख सरोकारों के संबंध में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अब पाश काव्य का अध्ययन मनन करने की और भी अधिक अनिवर्यता हैं क्योंकि यह वर्तमान परिवेश में आमजन का सही मार्ग प्रशस्त करने के सक्षम है। इस अवसर पर हरदेव पुरेवाल, कुलदीप सिरसा, छिन्दर कौर सिरसा, मुख्त्यार सिंह चट्ठा, भुपिंदर पन्नीवालिया, प्रो. हरभगवान चावला, सुरजीत सिरड़ी, अनीश कुमार, हरजीत सिंह देसूमलकाना, छिंदरपाल सिंह देओल, डॉ. सिकंदर सिंह सिद्धू, रमेश शास्त्री इत्यादि ने सामाजिक सरोकारों से ओतप्रोत कविताओं व गीतों की ख़ूबसूरत एवं भावपूर्ण प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के दौरान मुख्त्यार सिंह चट्ठा के नव-प्रकाशित काव्य-संग्रह ‘जागदीयां ज़मीरां’ का लोकार्पण भी किया गया। अमृतसर कलां गाँव में आमजन हेतु पुस्तकालय का संचालन करने वाले मुख्त्यार सिंह चट्ठा को कार्यक्रम के दौरान डॉ. हरविंदर सिंह सिरसा की ओर से दस पुस्तकों का सैट भेंट कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का संचालन पंजाबी लेखक सभा, सिरसा के सचिव सुरजीत सिंह सिरड़ी ने किया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रलेस सिरसा के सचिव डॉ. शेर चंद ने सभी उपस्थितजन के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ. प्रीत कौर, जसवंत कौर, अमृत कौर, अमनदीप कौर, मुस्कान, सिमरन, कॉ. राज कुमार शेखुपुरिया, बलजीत बिट्टू मलिकपुरा, सुरिंदर पाल सिंह साथी, नवनीत सिंह रेणु, सुनील कुमार, बूटा सिंह, सुखदेव सिंह ढिल्लों, कुलदीप सिंह, प्रभु दयाल, बहादर सिंह, हरमीत सिंह इत्यादि समेत विशाल संख्या में प्रबुद्धजन ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज़ करवाई।

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