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मुकम्मल इंसान

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मैं
ख़याल
से ख्बाव और फिर
मन
के सवाल
और जबाव सिर्फ खंजर
पैर खानाबदोश
दिल में उम्मीद
जिंदगी पे रोना
और मौत पे हँसना 
कुछ अनकहे अल्फाज
सफेद कागज
मुक्ति का गीत
जन्म की कमान से निकला हुआ तीर
घरती पे अग्नि की चादर
और जलती हुई जीवन की कथा
जो तुम नही समझ सकते और मैं
लिख नही सकता  ……
आपने कन्धों पे
आपने ही सिर का भार
ढो रहा हूँ
आपने आप को खुद इक
मजदूर बना कर
बस वो जंग
जो खुद के भीतर है
कितने हिस्सों में अलग थलग
मैं उसका इक नाम हूँ
जनाब………
हाज़िर होकर भी गैरहाजिर
दिखने वाला …..मैं
तुम
जैसा ही
मुक्कमल
इंसान हूँ………shaad

2 Comments

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 20 – 08 – 2015 को चर्चा मंच पर चर्चा – 2073 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

    Reply

  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 20 – 08 – 2015 को चर्चा मंच पर चर्चा – 2073 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

    Reply

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मुकम्मल इंसान

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मैं
ख़याल
से ख्बाव और फिर
मन
के सवाल
और जबाव सिर्फ खंजर
पैर खानाबदोश
दिल में उम्मीद
जिंदगी पे रोना
और मौत पे हँसना 
कुछ अनकहे अल्फाज
सफेद कागज
मुक्ति का गीत
जन्म की कमान से निकला हुआ तीर
घरती पे अग्नि की चादर
और जलती हुई जीवन की कथा
जो तुम नही समझ सकते और मैं
लिख नही सकता  ……
आपने कन्धों पे
आपने ही सिर का भार
ढो रहा हूँ
आपने आप को खुद इक
मजदूर बना कर
बस वो जंग
जो खुद के भीतर है
कितने हिस्सों में अलग थलग
मैं उसका इक नाम हूँ
जनाब………
हाज़िर होकर भी गैरहाजिर
दिखने वाला …..मैं
तुम
जैसा ही
मुक्कमल
इंसान हूँ………shaad

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