सिरसा: 7अक्तूबर:- श्री गुरु तेग बहादुर जी द्वारा रचित बाणी और उनके बलिदान की वर्तमान परिवेश में मानवीय आज़ादी, समानता, सामाजिक न्याय व मानवाधिकारों की रक्षा हेतु वैश्विक स्तर पर प्रासंगिकता को चिह्नित करते हुए राजकीय नैशनल महाविद्यालय, सिरसा में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार एवं कवि दरबार का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहादत वर्ष के उपलक्ष्य में राजकीय नैशनल महाविद्यालय, सिरसा में पंजाबी साहित्य अकाडमी, लुधियाना के तत्वावधान में पंजाबी लेखक सभा, सिरसा एवं पंजाबी विभाग, सरकारी नैशनल महाविद्यालय, सिरसा के सहयोग से ‘श्री गुरु तेग बहादुर जी: शब्द एवं शहादत’ विषय पर हुए इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार व कवि दरबार में अंतरराष्ट्रीय ख्यातिनाम पंजाबी चिंतक डॉ. सुखदेव सिंह सिरसा ने मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के तौर पर शिरकत की। उन्होंने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी ने भिन्न धार्मिक मतैक्य वाले समुदाय के मानवीय अधिकारों की रक्षार्थ अपने समय की दमनकारी सत्ता को सीधी चुनौती देते हुए जिस भय-मुक्त मानव के संकल्प का सृजन किया उसकी वैश्विक स्तर पर वर्तमान परिवेश में प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है। सेमिनार संयोजक डॉ. हरविंदर सिंह सिरसा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इस सेमिनार के दौरान छः सत्रों का आयोजन किया गया। उद्घाटन सत्र के उपरान्त आयोजित तीन सत्रों में डॉ. संदीप सिंह मुंडे, डॉ. गुरप्रीत कौर, डॉ. हरमीत कौर, डॉ. चरनदीप सिंह, डॉ. बीरबल सिंह व अमनदीप कौर ने गुरु तेग बहादुर बाणी के विभिन्न आयामों, उनकी यात्राओं, उनके विचारों-विचारधारा व उनके समकालीन शहीदों भाई मती दास, भाई सती दास, भाई दयाला जी के जीवन-वृत्तांत इत्यादि को स्पष्ट करते हुए उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को विलक्षण, उदाहरणीय एवं अनुकरणीय बताया। चुंनिदा शोध-पत्रों पर आधारित सत्र में चालीस शोधार्थियों ने अपना पंजीकरण करवाया इनमें से प्रो. स्वर्णदीप सिंह, प्रो. हरविंदर कौर, हरविंदर सिंह व प्रो. अवतार सिंह ने संबंधित विषयों पर अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। श्री गुरु तेग बहादुर जी को समर्पित कवि दरबार वाले सत्र में सर्वश्री सुरजीत जज, नवतेज गढ़दीवाला, डॉ. बलविंदर सिंह मोहाली, डॉ. गुरचरण कौर कोचर, डॉ. हरी सिंह जाचक, डॉ. निर्मल सिंह, डॉ. गुरप्रीत सिंह सिंधरा, लखविंदर सिंह बाजवा, भुपिंदर पन्नीवालिया, सुरजीत सिंह सिरड़ी, हरदेव सिंह पुरेवाल, करनैल सिंह असपाल, सुभाष सोलंकी, पूरन सिंह निराला, परवीन शर्मा, जसवीर सिंह मौजी, डॉ. खुशनसीब गुरबख्शीश कौर, डॉ. रिपुदमन शर्मा, छिन्दर कौर सिरसा, मुख्त्यार सिंह चट्ठा, हरजीत सिंह देसूमलकाना, शाम लाल शास्त्री, पुरषोत्तम शास्त्री व कुलविंदर सिंह ने कवितायों व गीतों की प्रस्तुति दी। इस दो दिवसीय सेमिनार व कवि दरबार के दौरान आयोजित विभिन्न सत्रों में पंजाबी साहित्य अकाडमी, लुधियाना के अध्यक्ष डॉ. सरबजीत सिंह, महासचिव डॉ. गुलज़ार सिंह पंधेर, उपाध्यक्ष डॉ गुरचरण कौर कोचर, डॉ. अरविंदर कौर काकड़ा, जसपाल मनखेड़ा, डॉ. हरविंदर सिंह सिरसा, प्रबंधकीय बोर्ड सदस्य डॉ. हरी सिंह जाचक, नरिंदर पाल कौर, पंजाबी लेखक सभा, सिरसा के अध्यक्ष परमानंद शास्त्री, सचिव सुरजीत सिंह सिरड़ी, वित्त सचिव अनीश कुमार, राजकीय नैशनल महाविद्यालय, सिरसा के प्राचार्य प्रो. हरजिंदर सिंह के अलावा उच्चतर शिक्षा विभाग, हरियाणा के संयुक्त निदेशक डॉ. सुखविंदर सिंह, समाजसेवी सुरिंदर सिंह वैदवाला, गुरभेज सिंह गुराया, डॉ. सतनाम सिंह जस्सल, डॉ. दलजीत सिंह, अरवेल सिंह विर्क, डॉ. जोगिंदर सिंह, डॉ. प्रीत कौर, डॉ. अनीता मड़िया, का. स्वर्ण सिंह विर्क, प्रो. बलदेव सिंह बल्ली, डॉ. बूटा सिंह विर्क, प्रगतिशील लेखक संघ, पंजाब के अध्यक्ष प्रो. सुरजीत जज, महासचिव डॉ. कुलदीप सिंह दीप, डॉ. नछत्तर सिंह, समाजसेवी राजपाल सिंह, डॉ. रतन सिंह ढिल्लों, कन्हैया मानव सेवा ट्रस्ट, सिरसा के मुख्य सेवक भाई गुरविंदर सिंह, डॉ. करनैल चंद, प्रो. गुरसाहिब सिंह, प्रो. गुरदेव सिंह देव, डॉ. सुरदर्शन गासो, प्रो. दिलराज सिंह, प्रो. हरभगवान चावला व बहादुर सिंह ने गुरु तेग बहादर जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व के विभिन्न पक्षों के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली, राजस्थान इत्यादि क्षेत्रों से चार सौ से अधिक विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि प्रबुद्धजन ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज़ करवाई।


