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घरफूंक थियेटर फेस्टिवल में तांडव नाटक ने समझाई प्यार और रिश्तों की अहमियत

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घरफूंक थियेटर फेस्टिवल में
तांडव नाटक ने समझाई प्यार और रिश्तों की अहमियत

रोहतक, 13 नवम्बर। “प्यार का एहसास अगर किसी वनमानुष को तांडव जैसे कठिन नृत्य में पारंगत बना सकता है, तो प्यार की नाकामी उसे दुनियादारी से विरक्त भी कर सकती है। यही नहीं, सच्चे प्यार को खोने के दुःख के आगे दुनिया के तमाम ऐशोआराम गौण हो जाते हैं , जिसे पाने के लिए इंसान दुनिया तक छोड़ने पर आमादा हो जाता है। अंततः रिश्तों की नजदीकी ही उसे शांति प्रदान करती है।” कुछ ऐसा ही संदेश दिया घरफूंक थियेटर फेस्टिवल में हुए नाटक तांडव ने। सप्तक रंगमंडल, सोसर्ग और पठानिया वर्ल्ड कैंपस द्वारा आयोजित इस फेस्टिवल में रूबरू थियेटर ग्रुप दिल्ली के कलाकारों की यह प्रस्तुति जीवन में सच्चे प्यार की अहमियत को स्थापित करने में सफल रही।

रजनीश कुमार गुप्ता के लिखे और प्रसिद्ध रंगकर्मी, पत्रकार एवं आकाशवाणी की वरिष्ठ अधिकारी काजल सूरी द्वारा निर्देशित इस नाटक की कहानी प्रकृति की गोद में पले बढ़े एक युवक की कहानी है, जो एक नृत्यांगना के प्यार में पड़कर तांडव नृत्य सीखने का प्रण ले लेता है। बेटे के प्यार को देखते हुए सामाजिक वर्जनाओं तथा पारिवारिक बंधनों के चलते नृत्य का त्याग कर चुकी उसकी बूढ़ी मां बेटे को रुद्र तांडव सिखाती है। मां के सानिध्य में तांडव नृत्य में पारंगत होने के बाद वह अपने प्यार को ढूंढता हुआ राजा के दरबार में पहुंच जाता है, जहां वह नृत्यांगना राजनर्तकी के पद पर आसीन है। तमाम तरह के भोग विलास में डूबी अपनी प्रेयसी को नगरवधु के रूप में देखकर युवक का दिल टूत जाता है और वह साधु बनकर पुनः जंगल में चला जाता है। अब युवती को भी अपनी गलती का एहसास होता है। उसे आभास होता है कि उसने कितने प्यारे और बेशकीमती रिश्ते को खो दिया है। इसके बाद वह भी बनवासी होकर साध्वी बन जाती है। इस तरह प्यार की पराकाष्ठा को स्थापित कर नाटक खत्म होता है।

नाटक में कोरियोग्राफर आस्था गुप्ता मृगनयनी के किरदार को जीवंत करते हुए अपने बेहतरीन नृत्य और अभिनय से दर्शकों का मन जीतने में कामयाब रही। अन्य कलाकारों में शांतनु सिंह सैनी, राजीव मैनी, वरुण कुमार, श्रद्धा श्रीवास्तव, राहुल मल्होत्रा, रविन्द्र डबास,और रवि रविन्द्र ने भी प्रभावित किया। ध्वनि और प्रकाश व्यवस्था लोकेश व अज़हर ने संभाली। प्रस्तुति संयोजक मधु शर्मा रहीं और मंच संचालन सुजाता रोहिल्ला ने किया।

इस अवसर पर आकाशवाणी उद्घोषक सम्पूर्ण सिंह बागड़ी, डॉ. सतबीर सागू, मैडम इंदू, शक्ति सरोवर त्रिखा, डॉ. हरीश वशिष्ठ, अविनाश सैनी, तरुण पुष्प त्रिखा, विकास रोहिल्ला, सिद्धार्थ भारद्वाज, मनोज कुमार सहित नाटक प्रेमी व सुपवा के विद्यार्थी उपस्थित थे।

विश्वदीपक त्रिखा,
अध्यक्ष, सप्तक।

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