मंदिर में दाना चुगकर चिड़ियां मस्जिद में पानी पीतीं हैं,मैंने सुना है राधा की चुनरी कोईसलमा बेग़म सीती हैं,एक रफ़ी था महफ़िल महफ़िलरघुपति राघव गाता था,एक प्रेमचंद बच्चों को ईदगाहसुनाता था,कभी कन्हैया की महिमा गातारसखान सुनाई देता है, #ऐसा_देश_है_मेरा 💝
मंदिर में दाना चुगकर चिड़ियां मस्जिद में पानी पीतीं हैं,मैंने सुना है राधा की चुनरी कोईसलमा बेग़म सीती हैं,एक रफ़ी था महफ़िल महफ़िलरघुपति राघव गाता था,एक प्रेमचंद बच्चों को ईदगाहसुनाता था,कभी कन्हैया की महिमा गातारसखान सुनाई देता है, #ऐसा_देश_है_मेरा 💝
मंदिर में दाना चुगकर चिड़ियां मस्जिद में पानी पीतीं हैं,मैंने सुना है राधा की चुनरी कोईसलमा बेग़म सीती हैं,एक रफ़ी था महफ़िल महफ़िलरघुपति राघव गाता था,एक प्रेमचंद बच्चों को ईदगाहसुनाता था,कभी कन्हैया की महिमा गातारसखान सुनाई देता है, #ऐसा_देश_है_मेरा 💝
जिंदा लोग ही जन्दगी क्या मतलब समझते होगे आज के दौर में जिंदगी क्या है क्या मतलब समझते हो कहा से बोल रहा हु धर्म है समाज है राजनीती है जातिया है वोट है नेता है आम आदमी भी है इस भीड़ में जिंदा दिखाई दे रहा है पक्ष विपक्ष रोज रात को डिनर के वक्त टी वी बताता है …
जिंदा लोग ही जन्दगी क्या मतलब समझते होगे आज के दौर में जिंदगी क्या है क्या मतलब समझते हो कहा से बोल रहा हु धर्म है समाज है राजनीती है जातिया है वोट है नेता है आम आदमी भी है इस भीड़ में जिंदा दिखाई दे रहा है पक्ष विपक्ष रोज रात को डिनर के वक्त टी वी बताता है …
कुछ नहीं कीमत सरों की आपकी सरकार मेंसरकटे ही सरकटे आते नज़र दरबार मेंचाहते हो तुम अगर नजदीक आये तितलियाँफूल जैसी कुछ महक पैदा करो किरदार मेंकुछ नया होता नहीं है अब हमारे देश मेंरोज़ खबरे तुम नई क्यों ढूंढते अख़बार मेंक्या नहीं तुम जानते बिकते यहाँ बस कहकहेआंसुओं को बेचने क्यों आ गये बाज़ार मेंफिर दवा भी हार अपनी …
कुछ नहीं कीमत सरों की आपकी सरकार मेंसरकटे ही सरकटे आते नज़र दरबार मेंचाहते हो तुम अगर नजदीक आये तितलियाँफूल जैसी कुछ महक पैदा करो किरदार मेंकुछ नया होता नहीं है अब हमारे देश मेंरोज़ खबरे तुम नई क्यों ढूंढते अख़बार मेंक्या नहीं तुम जानते बिकते यहाँ बस कहकहेआंसुओं को बेचने क्यों आ गये बाज़ार मेंफिर दवा भी हार अपनी …
इन गलियों में आने के अब भी हैं, बहाने हैं ।कुछ लोग नये होंगें, बाकि तो पुराने हैं ।। वो सहन, वो चौबारे, वो चौखट, वो खिड़की,कुछ भी तो नही बदला, जाने-पहचाने हैं ।। माँ जैसी हवेली की देहरी को चूमूंगा,फिर साथ में यारों के अमरूद भी खाने हैं ।। अम्माँ संग बाबूजी, मुंडेर पै दिखते हैं,यादों की गठरी में …
इन गलियों में आने के अब भी हैं, बहाने हैं ।कुछ लोग नये होंगें, बाकि तो पुराने हैं ।। वो सहन, वो चौबारे, वो चौखट, वो खिड़की,कुछ भी तो नही बदला, जाने-पहचाने हैं ।। माँ जैसी हवेली की देहरी को चूमूंगा,फिर साथ में यारों के अमरूद भी खाने हैं ।। अम्माँ संग बाबूजी, मुंडेर पै दिखते हैं,यादों की गठरी में …
एक प्यार का नग़मा है, मौजों की रवानी हैज़िंदगी और कुछ भी नहीं, तेरी मेरी कहानी है – (२) कुछ पाकर खोना है, कुछ खोकर पाना हैजीवन का मतलब तो, आना और जाना हैदो पल के जीवन से, एक उम्र चुरानी हैज़िंदगी और… तू धार है नदिया की, मैं तेरा किनारा हूँतू मेरा सहारा है, मैं तेरा सहारा हूँआँखों में …
बाल मंदिर स्कूल के प्रांगण में 46 वें वार्षिक उत्सव के भव्य एवं गौरवशाली …
गुरु नानक कॉलेज किल्लियांवाली के पूर्व छात्र संघ की वार्षिक आम बैठक 14 नवंबर …
डबवाली शहर के कॉलोनी रोड स्थित श्री अन्नपूर्णा हनुमान मंदिर के समीप स्थित सम्राट …
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