कुछ नहीं कीमत सरों की आपकी सरकार में
सरकटे ही सरकटे आते नज़र दरबार में
चाहते हो तुम अगर नजदीक आये तितलियाँ
फूल जैसी कुछ महक पैदा करो किरदार में
कुछ नया होता नहीं है अब हमारे देश में
रोज़ खबरे तुम नई क्यों ढूंढते अख़बार में
क्या नहीं तुम जानते बिकते यहाँ बस कहकहे
आंसुओं को बेचने क्यों आ गये बाज़ार में
फिर दवा भी हार अपनी मान लेगी एक दिन
ठीक होने की अगर चाहत नहीं बीमार में
अनूप
Check Also
खेलकूद से पैदा होती है अनुशासन की भावना: डा. संदीप गोयल
जीएनसी सिरसा में नैशनल स्पोर्ट्स डे पर हुआ आयोजन सिरसा: 29 अगस्त: व्यक्तित्व के सर्वांगीण …

